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साथा चीनी मिल: कब पूरा होगा गन्ना किसानों का इंतजार, चुनावी सभा में सीएम ने की थी नई चीनी मिल बनाने की घोषणा

Sun, 01 Sep 2024 05:18 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Sun, 01 Sep 2024 05:18 PM IST
सार

चीनी मिल के नए सिरे से निर्माण कराने की मांग को लेकर किसान पिछले काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं। बंद पड़ी चीनी मिल को शुरू कराने का मुद्दा कई बार विधानसभा में भी उठ चुका है। 

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condition of satha sugar mill
दि सहकारी चीनी मिल साथा बंद गेट - फोटो : संवाद

विस्तार

कभी गन्ना बेल्ट में शामिल रहे अलीगढ़ में गन्ने का रकबा निरंतर घट रहा है। आंकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि गन्ने का क्षेत्रफल पहले की तुलना में मात्र 25 फीसदी रह गया है। वर्ष 2005-06 में गन्ने की फसल 22 हजार हेक्टेयर में थी, जो मौजूदा वर्ष में महज 4500 हेक्टेयर रह गई है। जिले की एकमात्र दि सहकारी साथा चीनी मिल करीब 55 साल पुरानी है। मशीनें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि मिल का संचालन तीन साल से बंद है। मिल के बंद रहने से गन्ना किसानों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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जर्जर हालत में पड़ी साथा चीनी मिल को चालू करने के नाम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। इसके चलते जनपद में उत्पादित गन्ने को बुलंदशहर की साबितगढ़, कासगंज की न्याैली चीनी मिल को भेजा जा रहा है। चीनी मिल के नए सिरे से निर्माण कराने की मांग को लेकर किसान पिछले काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं। बंद पड़ी चीनी मिल को शुरू कराने का मुद्दा कई बार विधानसभा में भी उठ चुका है। 
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साथा चीनी मिल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो साल पहले कासिमपुर में चुनावी सभा में इस चीनी मिल की नई यूनिट लगवाने का आश्वासन दिया था। प्रदेश सरकार ने अपने बजट में मिल को जल्द शुरू कराने के लिए उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ को 50.55 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। जिससे साथा चीनी मिल का आधुनिकीकरण व उच्चीकरण होगा और मिल की क्षमता 1250 से बढ़कर 1700 टीसीडी हो जाएगी। इसके बाद भी चीनी मिल के निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। आज भी चीनी मिल को अपने उद्धार का इंतजार है।
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बोले किसान

चीनी मिल के बंद रहने से गन्ने की खेती से मोह भंग हो रहा है। उन्हें जिले में चीनी मिल होने के बाद भी दूसरी चीनी मिलों तक अपना गन्ना लेकर जाना पड़ रहा है।- डाॅ. शैलेंद्रपाल सिंह
चीनी मिल बंद हो जाने से गन्ना किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों को दूसरी मिलों तक जाना पड़ रहा है।- चौधरी अजय सिंह
सरकार से बजट मिल जाने के बाद भी बंद पड़ी साथा चीनी मिल का नए सिरे से निर्माण शुरू नहीं कराया गया है। बेहतर होता कि किसानों के हित में गन्ना मिल की यूनिट जल्द लगवाएं।- विनेश कुमार सिंह
तीन साल से चीनी मिल बंद पड़ी हुई है। इससे गन्ना किसानों को मिल तक पहुंचाने में अपना कीमती समय और भाड़ा तक देना पड़ रहा है। आखिर मिल कब तक चालू होगी।- बिजेंद्र कुमार सिंह
दि साथा चीनी मिल के निर्माण, उच्चीकरण व क्षमता वृद्धि के लिए शासन स्तर से मिल के लिए 50.55 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। लखनऊ से पिछले दिनों एक टीम आकर साथा चीनी मिल का निरीक्षण कर अपने सुझाव भी दे चुकी है और उसने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध भी करा दी है।- राहुल कुमार यादव, प्रभारी, महाप्रबंधक साथा चीनी मिल

जिले में गन्ना-चीनी मिल की स्थिति
साथा चीनी मिल की स्थापना : 1969
स्थापना के समय पेराई क्षमता : 12500 क्विंटल प्रतिदिन
साथा मिल को आवंटित : 950 हेक्टेयर क्षेत्र का गन्ना
शेष गन्ना : साबितगढ़ मिल बुलंदशहर, न्यौली मिल कासगंज व अन्य चीनी मिलों में स्थानांतरित
जिले में गन्ने का कुल रकवा : 4500 हेक्टेयर
कुल गन्ना किसान : करीब दस हजार
कुल उत्पादन : 36 लाख क्विंटल
जिले में कुल गन्ना क्रय केंद्र : 15

चीनी मिल की मरम्मत पर हुआ खर्चा
वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपया
वर्ष 2018-19 में 1.10 करोड़ रुपया
वर्ष 2019-20 में 85 लाख रुपया
वर्ष 2020-21 में 1.50 करोड़ रुपया
वर्ष 2021-22 में 1.25 करोड़ रुपया
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