Chaitra Navratri: नवरात्रि 8 या 9 अप्रैल को, किस पर आएंगी और जाएंगी माता, ज्योतिष कहता है यह
भारतीय संस्कृति और ऋषियों-मुनियों ने चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नववर्ष का आरंभ माना है। इसी दिन से चैत्र वसंतिक नवरात्रि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाएगा। इस नवरात्रि पर मां जगदंबा घोड़े पर सवार होकर आएंगी और मनुष्य के कंधे पर बैठकर पृथ्वी से देवलोक को प्रस्थान करेंगी।
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विस्तार
चैत्र नवरात्रि इस बार 8 अप्रैल से हैं या 9 अप्रैल से, इसे लेकर संशय खत्म हो गया है। ज्योतिष के अनुसार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं, जो 17 अप्रैल तक चलेंगे। मां जगदंबा इस बार घोड़े पर सवार होकर आएंगी और मनुष्य के कंधे पर सवार हो कर जाएंगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित ह्रदय रंजन शर्मा ने बताया कि भारतीय संस्कृति और ऋषियों-मुनियों ने चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नववर्ष का आरंभ माना है। इसी दिन से चैत्र वसंतिक नवरात्रि चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाएगा। इस नवरात्रि पर मां जगदंबा घोड़े पर सवार होकर आएंगी और मनुष्य के कंधे पर बैठकर पृथ्वी से देवलोक को प्रस्थान करेंगी।
नवरात्रि में घट स्थापना का महत्त्व है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित किया जाता है। दिवाकाल 10:45 से 01:54 बजे तक कलश स्थापना शुभ रहेगी। इसके बाद दोपहर में अभिजित मुहूर्त 11:39 से 12:25 तक रहेगा। इसमें भी घटस्थापना शुभ है। पहला नवरात्र शैलपुत्री की उपासना के साथ नौ अप्रैल से शुरू होगा। नवरात्र में ''सुंदरकांड'', ''रामरक्षास्तोत्र'' और देवी भगवती के मंत्र जाप का विशेष महत्त्व है।
नौ दिन इनकी होगी उपासना
- पहला नवरात्र - प्रथमा तिथि, 09अप्रैल, माँ शैलपुत्री की उपासना।
- दूसरा नवरात्र - द्वितीया तिथि, 10 अप्रैल, माँ ब्रह्मचारिणी की उपासना।
- तीसरा नवरात्र - तृतीया तिथि, 11अप्रैल, माँ चंद्रघंटा की उपासना।
- चौथा नवरात्र - चतुर्थी तिथि, 12अप्रैल, माँ कुष्मांडा की उपासना।
- पांचवां नवरात्र - पंचमी तिथि, 13 अप्रैल, माँ स्कन्द की उपासना।
- छठा नवरात्र - षष्ठी तिथि, 14 अप्रैल, माँ कात्यायनी की उपासना।
- सातवां नवरात्र - सप्तमी तिथि, 15अप्रैल, माँ कालरात्रि की उपासना।
- आठवां नवरात्र - अष्टमी तिथि, 16 अप्रैल, माँ महागौरी की उपासना।
- नौवां नवरात्र - नवमी तिथि, 17 अप्रैल, माँ सिद्धिदात्री की उपासना।
दुर्गा पूजन सामग्री
पंचमेवा पंच मिठाई, रूई, कलावा, रोली, सिंदूर, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, 5 सुपारी, लौंग, पान के पत्ते 5 , घी, कलश, कलश हेतु आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, शर्करा, फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी की गांठ, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदन, श्रीखंड चंदन, जौ, तिल, माँ की प्रतिमा, आभूषण, श्रृंगार का सामान, फूल माला
ये करें मां की आरती
जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ ॐ जय…
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥ ॐ जय…
कनक समान कलेवर, रक्तांबर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै ॥ ॐ जय…
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ॥ ॐ जय…
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर, राजत सम ज्योती ॥ ॐ जय…
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती ॥ॐ जय…
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भय दूर करे ॥ॐ जय…
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ॐ जय…
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैंरू ।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥ॐ जय…
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता ।
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता ॥ॐ जय…
भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी ।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ॥ॐ जय…
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती ॥ॐ जय…
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे ॥ॐ जय…