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लावारिस मरीज के लिए सीएमएस बन गए अभिभावक, बच गई जिंदगी
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डा. रामकिशन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
- फोटो : CITY OFFICE
मलखान सिंह जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने एक लावारिस मरीज का अभिभावक बनकर कर मानवता की मिसाल पेश की है। जिला अस्पताल में आंतों की समस्या से ग्रस्त कासगंज निवासी धर्मेंद्र का कोई अभिभावक न होने से ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था। कारण है कि ऑपरेशन से पहले अभिभावक को फॉर्म भरना होता है।
आपरेशन न हो पाने से युवक की जान को खतरा था। यह बात जब अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामकिशन को पता लगी तो उन्होंने अस्पताल के फॉर्म में स्वयं को युवक का अभिभावक घोषित किया, जिसके बाद उसके ऑपरेशन का रास्ता साफ हो गया। युवक का ऑपरेशन हो चुका है और वह पूरी तरह स्वस्थ है।
मेरी आंतें पूरी तरह खराब हो गई थीं। मेरा परिवार में कोई नहीं है। बीमार होने के बाद ननिहाल के लोगों से इलाज कराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। यहां पर डॉक्टर साहब (सीएमएस) ने मेरी बहुत मदद की। मेरे सारे कागज उन्होंने भर दिए इसके बाद मेरा ऑपरेशन हुआ। मैं उनका जिंदगी भर अहसानमंद रहूंगा।
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-धर्मेंद्र, मरीज, मलखान सिंह जिला अस्पताल
यहां पर आने से पहले धर्मेंद्र का किसी प्राइवेट नर्सिंग होम में ऑपरेशन हुआ था, जो बिगड़ चुका था। जब मरीज से कहा गया कि ऑपरेशन करना है और किसी को बुला लो तो बताया कि परिवार में कोई नहीं है। ननिहाल में कुछ रिश्तेदार थे, लेकिन उन्होंने यहां आने से मना कर दिया। इसके साथ नशे की भी समस्या थी। बाद में हमने और अस्पताल स्टाफ ने मिलकर जिम्मेदारी ली और अब यह पूरी तरह स्वस्थ है।
-डॉ. रामकिशन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मलखान सिंह जिला अस्पताल
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आपरेशन न हो पाने से युवक की जान को खतरा था। यह बात जब अस्पताल के सीएमएस डॉ. रामकिशन को पता लगी तो उन्होंने अस्पताल के फॉर्म में स्वयं को युवक का अभिभावक घोषित किया, जिसके बाद उसके ऑपरेशन का रास्ता साफ हो गया। युवक का ऑपरेशन हो चुका है और वह पूरी तरह स्वस्थ है।
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मेरी आंतें पूरी तरह खराब हो गई थीं। मेरा परिवार में कोई नहीं है। बीमार होने के बाद ननिहाल के लोगों से इलाज कराने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। यहां पर डॉक्टर साहब (सीएमएस) ने मेरी बहुत मदद की। मेरे सारे कागज उन्होंने भर दिए इसके बाद मेरा ऑपरेशन हुआ। मैं उनका जिंदगी भर अहसानमंद रहूंगा।
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-धर्मेंद्र, मरीज, मलखान सिंह जिला अस्पताल
यहां पर आने से पहले धर्मेंद्र का किसी प्राइवेट नर्सिंग होम में ऑपरेशन हुआ था, जो बिगड़ चुका था। जब मरीज से कहा गया कि ऑपरेशन करना है और किसी को बुला लो तो बताया कि परिवार में कोई नहीं है। ननिहाल में कुछ रिश्तेदार थे, लेकिन उन्होंने यहां आने से मना कर दिया। इसके साथ नशे की भी समस्या थी। बाद में हमने और अस्पताल स्टाफ ने मिलकर जिम्मेदारी ली और अब यह पूरी तरह स्वस्थ है।
-डॉ. रामकिशन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, मलखान सिंह जिला अस्पताल