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राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में बजट का टोटा
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परिवार के पालन पोषण के लिए घर के मुखिया पर बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में अगर उस मुखिया की अचानक किसी कारण से मृत्यु हो जाती है तो परिवार पर मानो दुखों का एक पहाड़ ही टूट पड़ता है। उन्हें न केवल उस परिवार को सामाजिक दिक्कतें उठानी पड़ती हैं, साथ ही आर्थिक तंगी से भी जूझना पड़ता है।
ऐसे में प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना उनके लिए उम्मीद होती है। लेकिन तीन साल से इस योजना में समाज कल्याण विभाग को जिले के लिए बजट ही नहीं मिल सका है। जिससे करीब डेढ़ हजार से अधिक आवेदक विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अफसरों से हर बार उन्हें आश्वासन मिलता है। इस साल अब तक विभाग को 500 से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। पिछले दो साल से करीब 1123 आवेदन पहले से ही लंबित पड़े हुए हैं।
यह है योजना
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को लाभ दिया जाता है। समाज कल्याण विभाग को इस योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें परिवार के मुख्य कमाऊ मुखिया महिला या पुरुष की मौत के बाद उनके आश्रितों को योजना में ऑनलाइन आवेदन के बाद 30 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। इसमें शर्त है कि ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों की वार्षिक आय अधिकतम 46,080 और शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से कम होनी चाहिए ।
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केस-एक
लोधा ब्लॉक क्षेत्र की राजकुमारी के पति वीरेंद्र की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। वे मजदूरी करते थे। घर के एक मात्र मुखिया व कमाऊ होने के चलते पत्नी को घरेलू खर्च चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में उन्होंने सरकारी मदद के लिए आवेदन किया था। तब से वह ब्लाक, तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट चुकी है।
केस- दो
जवां ब्लॉक की हरप्यारी के पति की कई साल पहले मौत हो चुकी है। बीते साल बेटे की भी सड़क हादसे में मौत हो गई। बेटे की पत्नी व दो बच्चों की देखभाल को वह मजदूरी कर रही हैं। फिर भी ठीक से परिवार का गुजारा नहीं हो पा रहा है। सरकारी मदद की उम्मीद में वह सरकारी दफ्तरों में तमाम बार चक्कर काट चुकी है। अभी भी उन्हें मदद की दरकार है।
शासन स्तर से आवेदकों की संख्या के सापेक्ष अभी तक बजट नहीं मिला है। कई बार पत्र व्यवहार किया जा चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में मात्र 100 पात्रों को लाभ देने का बजट मिला था। जिसे विभाग ने वर्ष 2015 से लंबित चले आ रहे आवेदनों के निपटारे के बाद 30-30 हजार रुपये की धनराशि चयनित पात्रों के खातों में ऑनलाइन भेज दी थी। जैसे ही धनराशि मिलेगी उसका लाभार्थियों को भुगतान दिलाया जाएगा।
- सूरज कुमारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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ऐसे में प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना उनके लिए उम्मीद होती है। लेकिन तीन साल से इस योजना में समाज कल्याण विभाग को जिले के लिए बजट ही नहीं मिल सका है। जिससे करीब डेढ़ हजार से अधिक आवेदक विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। अफसरों से हर बार उन्हें आश्वासन मिलता है। इस साल अब तक विभाग को 500 से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। पिछले दो साल से करीब 1123 आवेदन पहले से ही लंबित पड़े हुए हैं।
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यह है योजना
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को लाभ दिया जाता है। समाज कल्याण विभाग को इस योजना के क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। इसमें परिवार के मुख्य कमाऊ मुखिया महिला या पुरुष की मौत के बाद उनके आश्रितों को योजना में ऑनलाइन आवेदन के बाद 30 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। इसमें शर्त है कि ग्रामीण क्षेत्र के आवेदकों की वार्षिक आय अधिकतम 46,080 और शहरी क्षेत्र में 56,460 रुपये से कम होनी चाहिए ।
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लोधा ब्लॉक क्षेत्र की राजकुमारी के पति वीरेंद्र की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। वे मजदूरी करते थे। घर के एक मात्र मुखिया व कमाऊ होने के चलते पत्नी को घरेलू खर्च चलाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में उन्होंने सरकारी मदद के लिए आवेदन किया था। तब से वह ब्लाक, तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर काट चुकी है।
केस- दो
जवां ब्लॉक की हरप्यारी के पति की कई साल पहले मौत हो चुकी है। बीते साल बेटे की भी सड़क हादसे में मौत हो गई। बेटे की पत्नी व दो बच्चों की देखभाल को वह मजदूरी कर रही हैं। फिर भी ठीक से परिवार का गुजारा नहीं हो पा रहा है। सरकारी मदद की उम्मीद में वह सरकारी दफ्तरों में तमाम बार चक्कर काट चुकी है। अभी भी उन्हें मदद की दरकार है।
शासन स्तर से आवेदकों की संख्या के सापेक्ष अभी तक बजट नहीं मिला है। कई बार पत्र व्यवहार किया जा चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में मात्र 100 पात्रों को लाभ देने का बजट मिला था। जिसे विभाग ने वर्ष 2015 से लंबित चले आ रहे आवेदनों के निपटारे के बाद 30-30 हजार रुपये की धनराशि चयनित पात्रों के खातों में ऑनलाइन भेज दी थी। जैसे ही धनराशि मिलेगी उसका लाभार्थियों को भुगतान दिलाया जाएगा।
- सूरज कुमारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी