Toll Plaza: आगरा-अलीगढ़ और मुरादाबाद हाईवे पर बेलन टोल प्लाजा की बढ़ी वैल्यू, 25 करोड़ में उठा ठेका
जब टोल संचालन और रखरखाव पर करोड़ों रुपये का निवेश हो रहा है, तो यात्रियों की अपेक्षाएं भी बढ़ना स्वाभाविक है। सवाल यह है कि क्या टोल प्लाजा पर साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और अन्य सुविधाओं में सुधार दिखाई देगा? क्या वाहन चालकों को लंबी कतारों और अव्यवस्थाओं से राहत मिलेगी? क्या यात्रियों को उनकी दी जा रही टोल राशि के अनुपात में बेहतर सेवाएं मिल पाएंगी?
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आगरा से अलीगढ़ होते हुए मुरादाबाद तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-509 (एनएच-509) की आर्थिक अहमियत लगातार बढ़ रही है। इसका संकेत हाल ही में सामने आया है, जब इस मार्ग पर स्थित बेलन टोल प्लाजा के संचालन और टोल वसूली का एक वर्षीय ठेका 25.69 करोड़ रुपये में दिया गया। यह सिर्फ एक टोल अनुबंध नहीं, बल्कि पूरे कॉरिडोर की बढ़ती कारोबारी और आर्थिक संभावनाओं का संकेत माना जा रहा है। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के कई जिलों की तस्वीर बदलने वाला है। आगरा, हाथरस, अलीगढ़ और मुरादाबाद तक इस कॉरिडोर के आसपास जमीनों के दाम तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसका दूसरा असर पड़ोसी जिलों की जमीनों पर भी दिख रहा है।
एनएचएआई द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार बेलन टोल प्लाजा पर टोल शुल्क वसूली और सुविधाओं के रखरखाव का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपा गया है। अनुबंध के तहत कंपनी टोल वसूली के साथ-साथ परिसर में स्थित शौचालयों, यात्री सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन भी करेगी। ठेका एक वर्ष की अवधि के लिए दिया गया है और इसकी कुल कीमत 25.69 करोड़ रुपये है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी टोल प्लाजा के लिए इतनी बड़ी बोली यह दर्शाती है कि संबंधित मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है और भविष्य में इससे अच्छी आय की संभावना देखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में एनएच-509 पर सड़क चौड़ीकरण, बेहतर संपर्क और औद्योगिक गतिविधियों में बढ़ोतरी ने इस मार्ग की उपयोगिता बढ़ाई है। अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, संभल और मुरादाबाद बेल्ट में हाईवे के आसपास वेयरहाउस, लॉजिस्टिक्स, पेट्रोल पंप, होटल और व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार भी देखने को मिला है।
रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि हाईवे के किनारे स्थित जमीनों में निवेशकों की रुचि बढ़ी है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण कई इलाकों में कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग बढ़ रहा है। ऐसे में एनएच-509 अब केवल एक परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उभरते आर्थिक कॉरिडोर के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि इस पूरे मामले का दूसरा पक्ष भी है। जब टोल संचालन और रखरखाव पर करोड़ों रुपये का निवेश हो रहा है, तो यात्रियों की अपेक्षाएं भी बढ़ना स्वाभाविक है। सवाल यह है कि क्या टोल प्लाजा पर साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय और अन्य सुविधाओं में सुधार दिखाई देगा? क्या वाहन चालकों को लंबी कतारों और अव्यवस्थाओं से राहत मिलेगी? क्या यात्रियों को उनकी दी जा रही टोल राशि के अनुपात में बेहतर सेवाएं मिल पाएंगी?
बेलन टोल प्लाजा अलीगढ़-मथुरा और अलीगढ़-मुरादाबाद मार्ग के बीच एक महत्वपूर्ण बिंदु माना जाता है। प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में 25.69 करोड़ रुपये का यह अनुबंध न केवल टोल प्रबंधन बल्कि पूरे एनएच-509 कॉरिडोर की आर्थिक गतिविधियों पर भी नजरें टिकाने वाला घटनाक्रम बन गया है।
25.69 करोड़ के ठेके की 5 बड़ी बातें
- टोल : बेलन टोल प्लाजा, एनएच-509
- एजेंसी : एनएचएआई
- अवधि : 1 वर्ष
- राशि : 25.69 करोड़
- जिम्मेदारी : टोल वसूली + टॉयलेट व अन्य सुविधाओं का रखरखाव