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जागरूकता ही गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव
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गर्भाशय कैंसरजांच शिविर में महिलाओं का चेकप करतीं डॉक्टर राखी मल्होत्रा।
- फोटो : CITY OFFICE
महिलाओं में होने वाला गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का बचाव जागरूकता ही है। क्योंकि इसका टीका उपलब्ध है। यदि 9 से 13 साल तक की किशोरियों को यह टीका लग जाए तो भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की आशंका नहीं होगी। ये बात शुक्रवार को किलकारी अस्पताल में अमर उजाला फाउंडेशन के तहत आयोजित जागरूकता शिविर में वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ राखी मेहरोत्रा ने बताई। शिविर में 28 में से दो महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लक्षण मिले।
उन्होंने कहा कि भारत में हर साल एक लाख 34 हजार मामले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के होते हैं, जिनमें से 72 हजार महिलाओं की मृत्यु जागरूकता न होने की वजह से हो जाती है। अगर प्रारंभिक स्तर पर पता चल जाए कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर है तो इसका इलाज संभव है। अंतिम स्तर पर बचाव की स्थिति कम रह जाती है। उन्होंने बताया कि महिलाएं 30 साल के बाद हर साल पैप टेस्ट कराएं। इसकी जांच पांच मिनट में हो जाती है। खास बात यह है कि इसका टीका उपलब्ध है। किशोरियों को 9 से लेकर 13 वर्ष के बीच में यह टीका लगवाना चाहिए। इससे भविष्य में कैंसर की स्थिति न के बराबर रहेगी। शिविर में पहुंची 28 महिलाओं ने गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लिए पैप टेस्ट करवाया, जिनमें से दो महिलाओं में कैंसर के लक्षण मिले हैं। इस मौके पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा, लाइफ लाइन मेडिकोज से अजय मेहरोत्रा, सीता मेडिकोज से अमित मेहरोत्रा, हितेंद्र, सिस्टर रेनू, सिस्टर सर्वेश आदि का योगदान रहा।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लक्षण
डॉ. राखी मेहरोत्रा ने बताया कि 30 से ऊपर उम्र होने पर हर महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के लक्षण पाए जाते हैं। इसकी जांच के लिए पैप टेस्ट होता है। अगर पुरानी ल्यूकोरिया की शिकायत है, असामान्य श्वेत स्राव हो रहा हो या माहवारी सामान्य न हो, पीठ में बराबर दर्द एवं पेशाब में दर्द व जलन हो, जननांगों में खुजली, घाव या छाल की शिकायत हो, गर्भाशय वाले स्थान पर कुछ सूजन या भारीपन का अनुभव हो, अगर विवाह छोटी उम्र में हुआ हो, इन सभी के अलावा अगर बच्चे अधिक हैं तो भी पैप टेस्ट करवाना चाहिए, क्योंकि ये लक्षण गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के हो सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत में हर साल एक लाख 34 हजार मामले गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के होते हैं, जिनमें से 72 हजार महिलाओं की मृत्यु जागरूकता न होने की वजह से हो जाती है। अगर प्रारंभिक स्तर पर पता चल जाए कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर है तो इसका इलाज संभव है। अंतिम स्तर पर बचाव की स्थिति कम रह जाती है। उन्होंने बताया कि महिलाएं 30 साल के बाद हर साल पैप टेस्ट कराएं। इसकी जांच पांच मिनट में हो जाती है। खास बात यह है कि इसका टीका उपलब्ध है। किशोरियों को 9 से लेकर 13 वर्ष के बीच में यह टीका लगवाना चाहिए। इससे भविष्य में कैंसर की स्थिति न के बराबर रहेगी। शिविर में पहुंची 28 महिलाओं ने गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लिए पैप टेस्ट करवाया, जिनमें से दो महिलाओं में कैंसर के लक्षण मिले हैं। इस मौके पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास मेहरोत्रा, लाइफ लाइन मेडिकोज से अजय मेहरोत्रा, सीता मेडिकोज से अमित मेहरोत्रा, हितेंद्र, सिस्टर रेनू, सिस्टर सर्वेश आदि का योगदान रहा।
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गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लक्षण
डॉ. राखी मेहरोत्रा ने बताया कि 30 से ऊपर उम्र होने पर हर महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के लक्षण पाए जाते हैं। इसकी जांच के लिए पैप टेस्ट होता है। अगर पुरानी ल्यूकोरिया की शिकायत है, असामान्य श्वेत स्राव हो रहा हो या माहवारी सामान्य न हो, पीठ में बराबर दर्द एवं पेशाब में दर्द व जलन हो, जननांगों में खुजली, घाव या छाल की शिकायत हो, गर्भाशय वाले स्थान पर कुछ सूजन या भारीपन का अनुभव हो, अगर विवाह छोटी उम्र में हुआ हो, इन सभी के अलावा अगर बच्चे अधिक हैं तो भी पैप टेस्ट करवाना चाहिए, क्योंकि ये लक्षण गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के हो सकते हैं।
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