एएमयू: पुरानी चहारदीवारी-गोल्फ कोर्स के टीले खोल रहे दावों की पोल, शहर में विवि की 1000 करोड़ की अचल संपत्ति
अलीगढ़ शहर में एएमयू की एक हजार करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां हैं, जिसमें भवन, भूमि और दुकानें शामिल हैं। कुछ जमीन सरकार से मिली है तो कुछ प्रबुद्ध लोगों द्वारा समय-समय पर विवि को दान में दी गई है।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और नगर निगम के बीच एक कीमती जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद गहरा गया है। जिस जमीन पर नगर निगम अपना दावा ठोंकते हुए नए बोर्ड और फ्लेक्स लगा रहा है, वहां एएमयू का दशकों पुराना इतिहास बिखरा पड़ा है। मौके पर मौजूद एएमयू की पुरानी ईंटों की चहारदीवारी, दो ट्यूबवेल और गोल्फ कोर्स के टीले नगर निगम के दावों पर सीधे सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के अनुसार, लगभग 30 साल पहले एएमयू के तत्कालीन कुलपति महमूदउर्रहमान ने इस मैदान पर गोल्फ कोर्स विकसित करने के लिए पोल गड़वाए थे। गोल्फ के अनुकूल तीन टीलों का निर्माण कराया था। उस दौर में यह जमीन शहर के बाहरी इलाके में आती थी, लेकिन अब शहर के विस्तार के साथ यह बिल्कुल बीचों-बीच आ चुकी है।
बचपन से यहां घोड़े दौड़ते देखे हैं
एएमयू गेम्स कमेटी के राइडिंग क्लब में कार्यरत मो. नसीर ने बताया कि उनके पिता ने राइडिंग क्लब में 30 साल नौकरी की। उनके बाद वह यहां सेवा दे रहे हैं। इस मैदान पर राइडिंग क्लब के घोड़ों को दौड़ते और तमाम खेल गतिविधियां होते देखी हैं। अब नगर निगम अचानक आकर इसे अपनी जमीन बता रहा है। क्षेत्र के बुजुर्ग हाजी तसब्बुर हुसैन का कहना है कि यह हमेशा से एएमयू का ही खेल का मैदान रहा है, जिसे अब जबरन विवाद का विषय बनाया जा रहा है। मैदान पर जगह-जगह से टूटी हुई एएमयू की चहारदीवारी आज भी मौजूद है, जिसकी पुरानी ईंटें साफ बताती हैं कि यह जमीन लंबे समय से एएमयू के ही अधिकार क्षेत्र में रही है। वहीं दूसरी ओर, नगर निगम द्वारा हाल ही में लगाए गए बोर्ड देखकर वहां से गुजरने वाला हर व्यक्ति हैरान है।
13 जून 1925 को यूनाइटेड प्रोविंस के गवर्नर ने यह जमीन विश्वविद्यालय को दी थी। 11 जुलाई 1925 के गजट में भी इसका जिक्र किया गया। 1992 की खतौनी में यह एएमयू घुड़सवारी मैदान के रूप में दर्ज है। 14 जनवरी 2022 को सेतु निगम ने एएमयू क पत्र लिखा जिसमें पिलर लगाए जाने के लिए यह जमीन एएमयू से मांगी। यह सभी साक्ष्य दर्शाते हैं कि जमीन एएमयू की है। - प्रो. मो. नवेद, प्रॉक्टर, एएमयू
अधिकारी वही, अब करेंगे सुनवाई : एएमयू को न्याय की उम्मीद
जिस एसडीएम गजेंद्र सिंह ने एक दिन पहले नगर निगम को विवादित जमीन पर कब्जा दिलवाकर अपने सामने बोर्ड लगवाए थे, अब वही अधिकारी एएमयू के अभिलेखीय सुधार (रिकॉर्ड दुरुस्त करने) के वाद की सुनवाई करेंगे। इस अजीबोगरीब स्थिति पर एएमयू प्रशासन ने संयमित रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. नवेद का कहना है कि उन्हें अधिकारी की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उन्हें अदालत से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। एसडीएम गजेंद्र सिंह ने जिलाधिकारी कार्यालय पर कहा कि उन्होंने तो सिर्फ उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन किया था।
शहर में एएमयू की एक हजार करोड़ की अचल संपत्ति
शहर में एएमयू की एक हजार करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां हैं, जिसमें भवन, भूमि और दुकानें शामिल हैं। कुछ जमीन सरकार से मिली है तो कुछ प्रबुद्ध लोगों द्वारा समय-समय पर विवि को दान में दी गई है। हॉर्स राइडिंग क्लब का विवाद सामने आने के बाद अब इन सभी संपत्तियों की देखरेख पर बहस छिड़ गई है। विवि के प्रॉक्टर प्रो. नवेद ने बताया कि इन सभी संपत्तियों की देखरेख सुचारू रूप से की जा रही है। जिन मामलों में स्थानीय या ऊपरी अदालतों में मामला विचाराधीन है, उनमें नियमित पैरवी कराई जा रही है ताकि उन्हें मुक्त कराया जा सके। उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय पर पूरा भरोसा है।
विवि की अचल संपत्तियाें की देखरेख के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं जाएं, ताकि कोई कब्जा न कर सके। पूर्व छात्र इसमें मदद करना चाहते हैं। विवि की कानूनी लड़ाई में हम सब साथ हैं।-इंजी. सैयद वसीम अहमद, पूर्व छात्र एवं पूर्व कांग्रेस महानगर अध्यक्ष।
हॉर्स राइडिंग क्लब में लगाए गए नगर निगम के बोर्ड हटवाए जाएं। अदालत के फैसले के बाद ही कोई कदम उठाया जाए। फैसला आने के बाद ही कुछ किया जाए।-गुलजार अहमद, पूर्व एएमयू छात्र।
छात्र बोले-सोमवार तक नहीं हटे बोर्ड तो आंदोलन
हॉर्स राइडिंग क्लब की भूमि पर मालिकाना हक को लेकर हो रही दावेदारी का प्रकरण तूल पकड़ रहा है। विवि के छात्रों ने शुक्रवार को पहले डक पांड और उसके बाद लाइब्रेरी कैंटीन परिसर में बैठक की। लाइब्रेरी कैंटीन में हुई जनरल बॉडी मीटिंग में छात्रों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने विवि की कुलपति के समक्ष अपना पक्ष रखा है। जिसमें कहा गया है कि अगर सोमवार तक नगर निगम ने वहां से अपने बोर्ड नहीं हटवाए तो आंदोलन शुरू होगा। जिसकी जिम्मेदारी नगर निगम और जिला प्रशासन की होगी। छात्रों ने कहा कि विवि की एक-एक इंच जमीन कीमती है, इसको छोड़ा नहीं जा सकता है। आंदोलन कितना भी लंबा चले वे पीछे नहीं हटेंगे। इस दौरान बाब ए सैयद से लेकर कैंटीन तक गहमागहमी बनी रही।
विवि की कुलपति से कहा है कि सोमवार तक नगर निगम ने अपने बोर्ड नहीं हटाए तो बड़ा आंदोलन होगा। हम इस आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।-अहमद फराज, शोधार्थी।
अब विवि प्रशासन को अपनी सभी जमीन की तारबंदी कर बोर्ड लगाना चाहिए। चौकीदार की तैनाती हो ताकि कोई दोबारा ऐसा न कर सके।-फैजल त्यागी, पीएचडी छात्र।
विवि की जमीन को कोई भी सरकारी विभाग ऐसे ही नहीं ले सकता है। हमें अदालत के फैसले का इंतजार है। उम्मीद हे कि इंसाफ होगा।-आरिफ त्यागी, पीएचडी छात्र।
छात्र पूरे मामले पर नजर रखें हैं। सोमवार तक नगर निगम ने बोर्ड नहीं हटाए तो आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। हम सब तैयार हैं।-आसिफ अली, शोधार्थी।