AMU: गंगा को निर्मल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा एएमयू, नमामि गंगे को देता यह रिपोर्ट
गंगा किनारे बसे शहर का गंदा पानी सीधे गंगा में नहीं जा सकेगा। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के जरिये शहर का गंदा पानी स्वच्छ कर उसे मानक के अनुरूप बनाया जाएगा, फिर स्वच्छ पानी को गंगा में छोड़ा जाएगा।
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गंगा को निर्मल बनाने में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) अहम भूमिका निभा रहा है। नमामि गंगे योजना ने यूनिवर्सिटी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. नदीम खलील की यह जिम्मेदारी सौंपी है। वह जमीनी पड़ताल और अध्ययन के बाद पूरी रिपोर्ट नमामि गंगे को देते हैं। जिसके आधार पर गंगा किनारे बसे शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर पानी को साफ किया जाएगा।
प्रो. नदीम खलील ने बताया कि गंगा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए पंडित दीनदयाल नगर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना है। उसके लिए उप्र जल निगम ने 300 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया था। जब उन्होंने अध्ययन और जमीनी पड़ताल की तो पता चला कि यह प्लांट 260 करोड़ रुपये में बन जाना चाहिए। उनकी संस्तुति स्वीकार कर ली गई है।
प्रो. नदीम ने कहा कि पानी को अच्छी तरह से साफ करने के लिए जो नई तकनीक आ रही हैं, उसके बारे में जानकारी दी जाती है। लागत कम हो, इस पर जोर होता है। सरकार का खर्चा भी कम आए और तकनीक भी बेहतर हो। ऐसी तकनीक भी न हो जो अन्य देशों में लग चुकी है। इस पर अध्ययन करके पूरी रिपोर्ट नमामि गंगे को देते हैं। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे ने अपनी योजना में अलीगढ़ को शामिल कर लिया है। यहां 90 एमएलडी का एसटीपी बनेगा। शहर में जो एसटीपी बना है, वह 45 एमएलडी है। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ से रोजाना 130 एमएलडी (मेगा लीटर प्रतिदिन) गंदा पानी निकलता है।
छह राज्यों से निकलती है गंगा
प्रो. नदीम खलील ने कहा कि गंगा की लंबाई 20500 किमी है। यह उत्तराखंड से निकलती है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल तक पहुंचती है। 40 फीसदी कृषि गंगा के पानी पर आधारित है। गंगा के किनारे जो शहर बसे हैं, वहां नमामि गंगे के तहत एसटीपी बनेगा।
ये काम करेगा एसटीपी
प्रो. नदीम खलील ने कहा कि गंगा किनारे बसे शहर का गंदा पानी सीधे गंगा में नहीं जा सकेगा। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के जरिये शहर का गंदा पानी स्वच्छ कर उसे मानक के अनुरूप बनाया जाएगा, फिर स्वच्छ पानी को गंगा में छोड़ा जाएगा।