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अलीगढ़ः एएमयू ने रंगमंच व बॉलीवुड को दिए नगीने
Sun, 27 Mar 2022 12:16 AM IST
राजेश सिंह
न्यूूज डेस्क, इकराम वारिस, अलीगढ़।
न्यूूज डेस्क, इकराम वारिस, अलीगढ़।
Published by: राजेश सिंह
Updated Sun, 27 Mar 2022 12:16 AM IST
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) ने रंगमंच और बॉलीवुड को नायाब कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी कलाकारी व अदाकारी का कायल दुनिया को बना दिया। इन कलाकारों का जिक्र इसलिए हो रहा है कि रविवार को विश्व रंगमंच दिवस है। एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद ने ड्रामाटिक सोसाइटी बनाई थी और नुमाइश में नाटक का मंचन किया था।
वर्ष 1884 में सर सैयद ने मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के संचालन के लिए ड्रामाटिक सोसाइटी बनाई थी। नुमाइश में स्वयं सर सैयद ने नाटक का मंचन किया है। उनके बाद छात्र नाटक का मंचन करने लगे। 1916 में यूनिवर्सिटी, स्ट्रेची हॉल, मैरिस हॉल, अब्दुल्ला हॉल में नाटक का मंचन होता था। वर्ष 1948 में देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद ने जनरल एजूकेशन के नाम पर पालिसी बनाई, जिसका मकसद कला वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान वर्ग के बारे में जानकारी देना और विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को कला वर्ग के बारे में जानकारी देना था।
इसमें म्यूजिक, फाइन आर्ट सहित 13 विषय पढ़ाए जाते थे। सेंटर बनाने के लिए अमेरिका के फोर्ड फाउंडेशन ने 22 लाख रुपये देकर दान दिया था, क्योंकि डेमोक्रेटिक पार्टी के हेड कैनेडी थे। उन्हीं के नाम से हॉल बनाया गया। बाद में जनरल एजूकेशन सेंटर का नाम बदलकर कल्चरल एजूकेशन सेंटर ने कर दिया गया। सेंटर में ड्रामा क्लब, फिल्म क्लब, म्यूजिक क्लब सहित 11 क्लब हैं।
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राही मासूम रजा, हबीब तनवीर जैसे तमाम नाम देश-दुनिया में छाए
एएमयू के कल्चरल एजूकेशन सेंटर ने देश को थियेटर और फिल्मी दुनिया को नायाब हीरे दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा का कायल बना दिया। अपनी कलाकारी, गीतों से लोगों को अपना मुरीद बना दिया। इनमें ख्वाजा अहमद अब्बास, राही मासूम रजा, बेगम पारा, खुर्शीद, हबीब तनवीर, कादिर अली बेग, प्रो. मुजीबुर्रहमान, जाहिदा जैदी, साजिदा जैदी, कुदशिया जैदी, नसीर उद्दीन शाह, अनुभव सिन्हा, दिलीप ताहिल, कुलभूषण खरबंदा, फराज हैदर, शारिक, जमा हबीब, इमरान रशीद, सईद आलम के नाम अहम हैं।
यहां पर नसीर उद्दीन, गिरीश कर्नाड, टॉम ऑल्टर कर चुके हैं नाटक
एएमयू के कैनेडी हाल में आगरा बाजार, जूलियस सीजर, दरवाजा खोल दो, शतरंज के मोहरे, भंवर, जीरो ऑवर्स, चड्डी पहनकर फूल खिला है, आजाद, इस्मत आपा के नाम आदि नाटक का मंचन हो चुका है। नाटक का मंचन नसीर उद्दीन शाह, गिरीश कर्नाड, टॉम ऑल्टर सरीखे कलाकार कर चुके हैं। कैनेडी हॉल जैसा विशाल हॉल किसी के पास नहीं है। 70 फुट चौड़ा और 60 फुट लंबा है। 13 सौ ज्यादा सीटें हैं। 300 लाइटें हैं। दो घूमने वाला स्टेज है।
बॉलीवुड हो या थियेटर। सभी जगह सीईसी के विद्यार्थियों ने एएमयू का नाम रोशन किया है और कर भी रहे हैं। यह एएमयू की उपलब्धि है। हर साल विद्यार्थी निकलते हैं, जो स्टेज, थियेटर करके छोटे और बड़े पर्दे का हिस्सा बन रहे हैं।
- प्रो. एफएस शीरानी, कोआर्डिनटर, कल्चरल एजूकेशन सेंटर, एएमयू।
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वर्ष 1884 में सर सैयद ने मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज के संचालन के लिए ड्रामाटिक सोसाइटी बनाई थी। नुमाइश में स्वयं सर सैयद ने नाटक का मंचन किया है। उनके बाद छात्र नाटक का मंचन करने लगे। 1916 में यूनिवर्सिटी, स्ट्रेची हॉल, मैरिस हॉल, अब्दुल्ला हॉल में नाटक का मंचन होता था। वर्ष 1948 में देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद ने जनरल एजूकेशन के नाम पर पालिसी बनाई, जिसका मकसद कला वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान वर्ग के बारे में जानकारी देना और विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को कला वर्ग के बारे में जानकारी देना था।
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इसमें म्यूजिक, फाइन आर्ट सहित 13 विषय पढ़ाए जाते थे। सेंटर बनाने के लिए अमेरिका के फोर्ड फाउंडेशन ने 22 लाख रुपये देकर दान दिया था, क्योंकि डेमोक्रेटिक पार्टी के हेड कैनेडी थे। उन्हीं के नाम से हॉल बनाया गया। बाद में जनरल एजूकेशन सेंटर का नाम बदलकर कल्चरल एजूकेशन सेंटर ने कर दिया गया। सेंटर में ड्रामा क्लब, फिल्म क्लब, म्यूजिक क्लब सहित 11 क्लब हैं।
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राही मासूम रजा, हबीब तनवीर जैसे तमाम नाम देश-दुनिया में छाए
एएमयू के कल्चरल एजूकेशन सेंटर ने देश को थियेटर और फिल्मी दुनिया को नायाब हीरे दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा का कायल बना दिया। अपनी कलाकारी, गीतों से लोगों को अपना मुरीद बना दिया। इनमें ख्वाजा अहमद अब्बास, राही मासूम रजा, बेगम पारा, खुर्शीद, हबीब तनवीर, कादिर अली बेग, प्रो. मुजीबुर्रहमान, जाहिदा जैदी, साजिदा जैदी, कुदशिया जैदी, नसीर उद्दीन शाह, अनुभव सिन्हा, दिलीप ताहिल, कुलभूषण खरबंदा, फराज हैदर, शारिक, जमा हबीब, इमरान रशीद, सईद आलम के नाम अहम हैं।
यहां पर नसीर उद्दीन, गिरीश कर्नाड, टॉम ऑल्टर कर चुके हैं नाटक
एएमयू के कैनेडी हाल में आगरा बाजार, जूलियस सीजर, दरवाजा खोल दो, शतरंज के मोहरे, भंवर, जीरो ऑवर्स, चड्डी पहनकर फूल खिला है, आजाद, इस्मत आपा के नाम आदि नाटक का मंचन हो चुका है। नाटक का मंचन नसीर उद्दीन शाह, गिरीश कर्नाड, टॉम ऑल्टर सरीखे कलाकार कर चुके हैं। कैनेडी हॉल जैसा विशाल हॉल किसी के पास नहीं है। 70 फुट चौड़ा और 60 फुट लंबा है। 13 सौ ज्यादा सीटें हैं। 300 लाइटें हैं। दो घूमने वाला स्टेज है।
बॉलीवुड हो या थियेटर। सभी जगह सीईसी के विद्यार्थियों ने एएमयू का नाम रोशन किया है और कर भी रहे हैं। यह एएमयू की उपलब्धि है। हर साल विद्यार्थी निकलते हैं, जो स्टेज, थियेटर करके छोटे और बड़े पर्दे का हिस्सा बन रहे हैं।
- प्रो. एफएस शीरानी, कोआर्डिनटर, कल्चरल एजूकेशन सेंटर, एएमयू।