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हंगामेदार रही एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 29 May 2016 01:44 AM IST
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एएमयू
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एग्जीक्यूटिव काउंसिल में यूजीसी अधिनियम 2010 को पूरी तरह एडप्ट करने का मुद्दा अधर में लटक गया। ईसी की बैठक में अधिनियम को एडप्ट करने एवं स्टेट्यूट्स तथा आर्डिनेंस में चेंजेज के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया। लेकिन यह भी जोड़ा गया है कि यूजीसी अधिनियम 2010 के क्लाज 7.3.0 छोड़कर विचार किया जाएगा, क्योंकि यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उल्लेखनीय है कि इसी क्लाज के तहत एएमयू कुलपति की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
शनिवार को एएमयू ईसी की बैठक करीब दस घंटे तक चली। कई मसले को लेकर खुश हंगामा भी हुए। सर सैयद एजूकेशन ट्रस्ट से एएमयू का करार कराने का प्रयास भी फिलहाल विफल हो गया और इसके लिए यूनिवर्सिटी के कोषाध्यक्ष प्रो. हबीबुर्रहमान की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई जो इस पर विचार करेगी। इस कमेटी में ईसी सदस्य डॉ. इलियास खान, खालिद मसूद, नसीम अहमद, प्रो. एनएके दुर्रानी एवं प्रो. तारिक मंसूर को रखा गया है। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 31 जुलाई तक देनी है। यूनिवर्सिटी पालीटेक्निक में 23 लाख के गबन मामले के आरोपी सेक्शन आफिसर फैज आलम को दोषी मानते हुए सेवा समाप्त कर दी गई। जबकि प्रिंसिपल प्रो. इकबाल अली को चेतावनी दी गई। विधि विभाग के पूर्व डीन प्रो. शब्बीर को क्लीन चिट दे दी गई। ईसी द्वारा 2 अप्रैल को वीसी पैनल बनाने को लेकर आयोजित ईसी की बैठक को निरस्त कर दिया गया। 2 अप्रैल की बैठक में ही नियमों का उल्लंघन कर नए कुलपति के लिए पांच नामों का पैनल बना था, जिसे अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद रद्द कर दिया गया था। ईसी की बैठक में अमुटा नेताओं द्वारा वीसी पर लगाए गए आरोपों को लेकर भी खूब चर्चा हुई। कुलपति ने कहा कि कुलपति पद से हटने के बाद सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन ट्रस्ट में रहने का उनका कोई इरादा नहीं है।
केंद्रीय विवि के लिए यूजीसी अधिनियम 2010 अनिवार्य
19 अप्रैल 2016 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एएमयू को पत्र भेजकर साफ कर दिया था कि यूजीसी अधिनियम 2010 सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले (कल्याणी मथिवानन/केवी जयराज एंड अदर्स) का उल्लेख भी किया गया था। यह भी कहा गया था कि जिन विश्वविद्यालयों ने अभी तक यूजीसी अधिनियम 2010 को एडप्ट नहीं किया है, वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में तुरंत एडप्ट कर ले। जरूरी हो तो अपने स्टेट्यूट्स एंड आर्डिनेंस में संशोधन भी कर ले। ईसी की बैठक में यूजीसी अधिनियम 2010 एडप्ट नहीं होने के कारण कैंपस में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। लोग यह भी कह रहे है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस पर नजर रखे हुए है। यूजीसी अधिनियम 2010 के अंतर्गत वहीं आदमी केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति बन सकता है, जिसके पास 10 वर्ष का प्रोफेसर का अनुभव हो। शनिवार को आयोजित ईसी की बैठक में यह भी चर्चा हुई कि एएमयू वीसी के लिए नया पैनल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनेगा।
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शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने रोकी वीसी की गाड़ी
एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में शामिल होने जा रहे कुलपति जमीरउद्दीन शाह की गाड़ी को शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने गेट पर ही रोक दिया और प्राइवेट ट्रस्ट सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन को दिए गए 51 लाख रुपये वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही ईसी के एजेंडे में निजी ट्रस्ट को एएमयू की जमीन देने से संबंधित एजेंडा पर चिंता जताई। अपनी मांगों से ज्ञापन देने के बाद कुलपति को ईसी की बैठक में जाने दिया।
शनिवार के अंक में अमर उजाला के पेज नंबर 5 पर प्रकाशित खबर ‘निजी ट्रस्ट को 51.78 लाख का भुगतान, एएमयू में घमासान’ प्रकाशित होने के बाद खलबली मच गई है। शनिवार को ईसी की बैठक शुरू होने के पहले ही अमुटा अध्यक्ष प्रो. मुजाहिद बेग, सचिव सैयद मुस्तफा जैदी, संयुक्त सचिव अशरफ मतिन, डॉ. गुलफिशां खान, एएमयू टेक्निकल स्टॉफ एसोसिएशन के अध्यक्ष फैसल रईस गांधी, एएमयू ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन के युसुफ जमाल एवं अहमद कलीम खान तथा एएमयू इंपलाइज यूनियन एवं अन्य संगठनों के पदाधिकारी प्रशासनिक ब्लाक के सामने पहुंच गए। ईसी की बैठक में शामिल होने जा रहे सदस्यों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन दिया और एएमयू की जमीन को प्राइवेट ट्रस्ट को दिए जाने से संबंधित एजेंडा पर गहरी चिंता जताई। सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन के सचिव सलमान जाफरी को 51 लाख रुपये दिए जाने पर कड़ा एतराज जताया। शिक्षक नेताओं का कहना था कि ट्रस्ट के सलमान जाफरी एक बिल्डर है और एएमयू के कई बड़े ठेके इनको मिले हुए है। वीसी स्वयं ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी है और निजी फायदा पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।
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एएमयू कुलपति समेत ईसी सदस्यों को लीगल नोटिस
एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल में सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन को जमीन ट्रांसफर किए जाने से संबंधित एजेंडे के खिलाफ निलंबित छात्र आमिर मिंटो ने कुलपति जमीरउद्दीन शाह समेत तमाम ईसी सदस्यों को लीगल नोटिस भेजा है। आमिर ने कहा है की यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत कोई भी फैसला नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अत: सर सैयद फाउंडेशन से करार अवैध है। मिंटो ने आरोप लगाया कि कुलपति पहले भी इस संस्था को जमीन देने की कोशिश कर चुके है लेकिन कामयाब नहीं सके थे। कुलपति खुद इस संस्था के ट्रस्टी है। इसमें कुलपति का निजी स्वार्थ जुड़ा हुआ है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार रात्रि को मीटिंग कर एएमयू के सीनियर छात्रों ने भी जमीन स्थानांतरण से संबंधित मसले का विरोध किया था। बैठक के पूर्व छात्र एवं शिक्षक ईसी सदस्यों से मिल सकते है।
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शनिवार को एएमयू ईसी की बैठक करीब दस घंटे तक चली। कई मसले को लेकर खुश हंगामा भी हुए। सर सैयद एजूकेशन ट्रस्ट से एएमयू का करार कराने का प्रयास भी फिलहाल विफल हो गया और इसके लिए यूनिवर्सिटी के कोषाध्यक्ष प्रो. हबीबुर्रहमान की अध्यक्षता में एक छह सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई जो इस पर विचार करेगी। इस कमेटी में ईसी सदस्य डॉ. इलियास खान, खालिद मसूद, नसीम अहमद, प्रो. एनएके दुर्रानी एवं प्रो. तारिक मंसूर को रखा गया है। कमेटी को अपनी रिपोर्ट 31 जुलाई तक देनी है। यूनिवर्सिटी पालीटेक्निक में 23 लाख के गबन मामले के आरोपी सेक्शन आफिसर फैज आलम को दोषी मानते हुए सेवा समाप्त कर दी गई। जबकि प्रिंसिपल प्रो. इकबाल अली को चेतावनी दी गई। विधि विभाग के पूर्व डीन प्रो. शब्बीर को क्लीन चिट दे दी गई। ईसी द्वारा 2 अप्रैल को वीसी पैनल बनाने को लेकर आयोजित ईसी की बैठक को निरस्त कर दिया गया। 2 अप्रैल की बैठक में ही नियमों का उल्लंघन कर नए कुलपति के लिए पांच नामों का पैनल बना था, जिसे अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद रद्द कर दिया गया था। ईसी की बैठक में अमुटा नेताओं द्वारा वीसी पर लगाए गए आरोपों को लेकर भी खूब चर्चा हुई। कुलपति ने कहा कि कुलपति पद से हटने के बाद सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन ट्रस्ट में रहने का उनका कोई इरादा नहीं है।
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19 अप्रैल 2016 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एएमयू को पत्र भेजकर साफ कर दिया था कि यूजीसी अधिनियम 2010 सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले (कल्याणी मथिवानन/केवी जयराज एंड अदर्स) का उल्लेख भी किया गया था। यह भी कहा गया था कि जिन विश्वविद्यालयों ने अभी तक यूजीसी अधिनियम 2010 को एडप्ट नहीं किया है, वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में तुरंत एडप्ट कर ले। जरूरी हो तो अपने स्टेट्यूट्स एंड आर्डिनेंस में संशोधन भी कर ले। ईसी की बैठक में यूजीसी अधिनियम 2010 एडप्ट नहीं होने के कारण कैंपस में चर्चा का बाजार गर्म हो गया है। लोग यह भी कह रहे है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस पर नजर रखे हुए है। यूजीसी अधिनियम 2010 के अंतर्गत वहीं आदमी केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति बन सकता है, जिसके पास 10 वर्ष का प्रोफेसर का अनुभव हो। शनिवार को आयोजित ईसी की बैठक में यह भी चर्चा हुई कि एएमयू वीसी के लिए नया पैनल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनेगा।
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शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने रोकी वीसी की गाड़ी
एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में शामिल होने जा रहे कुलपति जमीरउद्दीन शाह की गाड़ी को शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने गेट पर ही रोक दिया और प्राइवेट ट्रस्ट सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन को दिए गए 51 लाख रुपये वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही ईसी के एजेंडे में निजी ट्रस्ट को एएमयू की जमीन देने से संबंधित एजेंडा पर चिंता जताई। अपनी मांगों से ज्ञापन देने के बाद कुलपति को ईसी की बैठक में जाने दिया।
शनिवार के अंक में अमर उजाला के पेज नंबर 5 पर प्रकाशित खबर ‘निजी ट्रस्ट को 51.78 लाख का भुगतान, एएमयू में घमासान’ प्रकाशित होने के बाद खलबली मच गई है। शनिवार को ईसी की बैठक शुरू होने के पहले ही अमुटा अध्यक्ष प्रो. मुजाहिद बेग, सचिव सैयद मुस्तफा जैदी, संयुक्त सचिव अशरफ मतिन, डॉ. गुलफिशां खान, एएमयू टेक्निकल स्टॉफ एसोसिएशन के अध्यक्ष फैसल रईस गांधी, एएमयू ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन के युसुफ जमाल एवं अहमद कलीम खान तथा एएमयू इंपलाइज यूनियन एवं अन्य संगठनों के पदाधिकारी प्रशासनिक ब्लाक के सामने पहुंच गए। ईसी की बैठक में शामिल होने जा रहे सदस्यों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन दिया और एएमयू की जमीन को प्राइवेट ट्रस्ट को दिए जाने से संबंधित एजेंडा पर गहरी चिंता जताई। सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन के सचिव सलमान जाफरी को 51 लाख रुपये दिए जाने पर कड़ा एतराज जताया। शिक्षक नेताओं का कहना था कि ट्रस्ट के सलमान जाफरी एक बिल्डर है और एएमयू के कई बड़े ठेके इनको मिले हुए है। वीसी स्वयं ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी है और निजी फायदा पहुंचाने का प्रयास कर रहे है।
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एएमयू कुलपति समेत ईसी सदस्यों को लीगल नोटिस
एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल में सर सैयद एजूकेशन फाउंडेशन को जमीन ट्रांसफर किए जाने से संबंधित एजेंडे के खिलाफ निलंबित छात्र आमिर मिंटो ने कुलपति जमीरउद्दीन शाह समेत तमाम ईसी सदस्यों को लीगल नोटिस भेजा है। आमिर ने कहा है की यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत कोई भी फैसला नहीं लिया जा सकता है, क्योंकि एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अत: सर सैयद फाउंडेशन से करार अवैध है। मिंटो ने आरोप लगाया कि कुलपति पहले भी इस संस्था को जमीन देने की कोशिश कर चुके है लेकिन कामयाब नहीं सके थे। कुलपति खुद इस संस्था के ट्रस्टी है। इसमें कुलपति का निजी स्वार्थ जुड़ा हुआ है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार रात्रि को मीटिंग कर एएमयू के सीनियर छात्रों ने भी जमीन स्थानांतरण से संबंधित मसले का विरोध किया था। बैठक के पूर्व छात्र एवं शिक्षक ईसी सदस्यों से मिल सकते है।