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एएमयू में गोश्त संकट दूर करने के लिए कमेटी गठित

Fri, 31 Mar 2017 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
अमर उजाला ब्यूूराे Updated Fri, 31 Mar 2017 01:56 AM IST
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AMU constitutes committee to overcome Gosht crisis
अमुवि कै‌टिंन में दाल रोटी चावल से छात्रों के साथ खाना खाते अमुवि छात्रसंघ अध्यक्ष फैजुल हसन। - फोटो : Amar Ujala
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में गोश्त संकट दूर करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। हॉलों में गोश्त सप्लाई सुनिश्चित  करने के लिए कमेटी के सदस्य लाइसेंस होल्डर वेंडरों से संपर्क स्थापित करेंगे। अवैध बूचड़खाना एवं मीट विक्रेताओं पर अंकुश लगने के बाद महानगर के साथ-साथ एएमयू में गोश्त संकट उत्पन्न हो गया है। एएमयू के हॉलों में पिछले पांच दिनों से गोश्त की सप्लाई बंद है। एएमयू के 18 हॉलों में करीब 12 हजार से अधिक छात्र रहते है और डायनिंग में प्रत्येक दिन नॉनवेज बनता है।
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एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष फैजुल हसन ने एएमयू कुलपति को पत्र लिखकर हॉलों में वैध फैक्ट्री से गोश्त सुनिश्चित कराने का आग्रह किया था। अध्यक्ष का कहना है कि हॉलों में प्रत्येक दिन करीब 500 किलो गोश्त की जरूरत है। छात्र संघ अध्यक्ष के पत्र के बाद गुरुवार को डीएसडब्लू प्रो. जमशेद सिद्दीकी की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर हालात पर विचार किया गया। गोश्त सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई, जिसमें वीएम हॉल के प्रवोस्ट प्रो. शादाब खुर्शीद, आईजी हॉल की प्रवोस्ट डॉ. आसिया चौधरी, आफताब हॉल के प्रवोस्ट प्रो. मैराज अहमद, सुलेमान हॉल के प्रवोस्ट प्रो. सलमान हबीब और सैयद हामिद सीनियर सेकेंडरी स्कूल ब्वायज के प्रिंसिपल मेजर एसएम मुस्तफा को शामिल किया गया है। प्रो. जमशेद सिद्दीकी ने बताया कि कमेटी के सदस्य शुक्रवार 31 मार्च को गोश्त सप्लाई को सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस होल्डर वेंडरों से संपर्क स्थापित करेंगे। उन्होंने बताया कि अलीगढ़ के जिला प्रशासन से भी इस संबंध में शीघ्र संपर्क साधा जाएगा ताकि विश्वविद्यालय में गोश्त की आपूर्ति बहाल हो सके।
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यूपी को होगा बड़ा राजस्व घाटा, बेरोेेजगारी बढ़ेगी
 ज्यादातर बूचड़खाने बिना लाइसेंस व परमिट के मिली भगत से चलते हैं। सिर्फ बूचड़खाने ही नहीं देश में ज्यादातर छोटे कारोबारी जैसे दूध वाला, पेपर वाला, सब्जी वाला, धकेल वाला, रोड साइड बेंडर आदि के पास सामान्यत: लाइसेंस या परमिट नहीं होते। इसे असंगठित या अनौपचारिक सेक्टर कहते हैं। यहीं लोग अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यहीं लोग रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं। इनके बिजनेस को बंद करने के बदले इन्हें व्यवस्थित करने का प्रयास होना चाहिए। यह कहना है एएमयू अर्थशास्त्र विभाग के शोध छात्र जुल्फिकार शेठ का। वह बूचड़खाने पर सख्ती के बाद उपजे हालात पर शोध कर रहे हैं। प्रदेश में सिर्फ 38 लाइसेंसी बूचड़खाने है। यह सभी गल्फ कंट्री में मीट निर्यात कर रहे हैं। आम लोगों की जरूरत अवैध कट्टीघर व छोटी-मोटी दुकानों से पूरी होती है। देश के मीट उत्पादन में यूपी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। पिछले साल उत्तर प्रदेश को 15 हजार करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी। काउंसिल ऑफ लेदर एक्सपर्ट के मुताबिक पिछले साल भारत ने लेदर का करीब 38 हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट किया था।    
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सख्ती के बाद हालात...
- ज्यादातर नॉनवेज ढाबे या तो बंद हो गए या मेन्यू चेंज कर दिए
- पिछले सप्ताह की तुलना में सब्जियों के भाव में 30 फीसदी तक इजाफा
- चिकेन के भाव में भारी वृद्धि 
- एएमयू के 18 हॉलों में पांच दिन से छात्रों को नहीं मिल पा रहा मीट 
- एएमयू के आसपास के क्षेत्रों में ठेले लगाने वाले बेच रहे शाकाहारी बिरियान

एक्सपोर्ट यूनिटें खोलेंगी बफैलो मीट आउटलेट
भैंस मीट कारोबारियों की हड़ताल जल्द ही खत्म हो सकती है। प्रशासन के साथ गुरुवार को हुई बैठक में मीट कारोबारियों ने इसका आश्वासन दिया है। मौके पर मौजूद एक्सपोर्ट फैक्ट्रियों के संचालकों ने महानगर में मीट की किल्लत को देखते हुए पांच आउटलेट खोलने पर सहमति दी है। यही नहीं खुदरा कारोबारियों को 140 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भैंस मीट उपलब्ध कराने पर भी सहमति हो गई है। एडीएम सिटी एसबी सिंह ने बताया कि जरूरत पड़ी तो रेट 130 रुपये किलो भी किया जा सकता है। एक्सपोर्ट यूनिटें दोदपुर में दो, शमशाद मार्केट में एक, ऊपरकोट तथा रसलगंज में एक एक आउटलेट खोलेंगी। जरूरत पड़ने पर फैक्ट्री में भी आउटलेट खोला जाएगा। मीट से निकलने वाली हड्डियों को काली पालीथिन अथवा कंटेनर में रखकर फैक्ट्रियों को दिया जाएगा, जिसका 25 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान होगा। मीट खरीदने का समय सुबह छह से आठ बजे तक होगा। सभी को हिदायत दी गई है कि मीट की बिक्री मात्र लाइसेंसधारी ही करें और सफाई का विशेष ध्यान रखें। इस दौरान लाइव स्टाक सप्लायरों की सूची भी तैयार हुई। इस मौके पर मीट फैक्ट्री संचालक जहीर समेत अन्य मीट कारोबारी मौजूद थे। वहीं मीटिंग के दौरान ऐलाना फैक्ट्री संचालकों ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में बकरे एवं बकरी के मीट के स्लाटर की जगह और व्यवस्था के साथ लाइसेंस भी है। मीट विक्रेता यहां आकर बकरे अथवा बकरी का कटान करा सकते हैं। 
 
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