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अलीगढ़ : शाहबेज हत्या कांड में फरार जफर साढ़े तीन साल बाद गिरफ्तार
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महानगर के सिविल लाइंस इलाके में 2018 के बहुचर्चित शाहबेज हत्याकांड का एक आरोपी जफर मसूद साढ़े तीन साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा है। यह हत्या एक युवती से जुड़ी गैंगवार में हुई थी और हत्या का मुख्य आरोपी कुख्यात अपराधी मुनीर का साथी जुबैर तभी से जेल में है।
पकड़ा गया जफर जुबैर का करीबी साथी है। हालांकि अब तक वह कभी बिहार व दिल्ली में फरारी काट रहा था और चोरी छिपे परिवार से मिलने आता था। इसी खबर पर उसे सिविल लाइंस थाने के पास से दबोचा गया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस के अनुसार अमीर निशा के बाहर अब्दुल्ला कॉलेज की ऊपरकोट निवासी छात्रा अनस की रोडरेज में हत्या के आरोपी जीवनगढ़ के शाहबेज की 23 अक्तूबर 2018 की देर शाम पुरानी चुंगी के पास घेराबंदी कर हत्या की गई थी।
इस हत्या की जांच में उजागर हुआ था कि पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी मुनीर के राइट हैंड अलीगढ़ में मुनीर के गैंग को ऑपरेट कर रहे नौशा बरला के अपराधी जुबैर ने साथियों संग मिलकर ये हत्या की है। उस समय यह भी साफ हुआ था कि जुबैर की किसी महिला मित्र को लेकर यह गैंग दो खेमों में बंट गया था। उसी खेमेबंदी में पहले जुबैर पर हमला हुआ था। बदले में ये हत्या की गई। इस हत्या में फरार चल रहे जफर मसूद को गिरफ्तार किया गया है।
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इंस्पेक्टर के अनुसार पुलिस पूछताछ में जफर ने स्वीकारा कि अहमद उर्फ चिंगारी का शाहबेज के भाई अज्जू से झगड़ा हो गया था। घटना वाले दिन शाहबेज व उसके साथी जहुर व मयंक आदि ने जुबैर के भाई अहमद से मारपीट की थी। इस सूचना पर जुबैर व उसके साथी तस्वीर महल गए।
मगर तब तक शाहबेज व उसके साथी जा चुके थे। इस संबंध में जुबैर, कुमैल, दानिश, सरताज, अहमद उर्फ चिंगारी, जुबैर का भाई अहमद, जुबैर के पिता रफत उल्लाह, आमिर, समीर , जफर मसूद, बाबर गुड्डू, आतिफ आदि ने साजिश रचकर शाहबेज व उसके साथियों को जान से मारने की योजना बनाई।
योजना के तहत आतिफ ने हथियार मुहैया कराए। इसी दौरान शाहबेज मिल गया और बाइकों से घेराबंदी कर एएमयू कैंपस से दौड़ाते हुए पुरानी चुंगी से आगे रेडियो कॉलोनी के सामने शाहबेज को गोलियों से भून दिया गया। इस हत्या के लिए जुबैर के पिता रफत उल्लाह ने रुपये खर्च करने का वायदा किया था।
उसने स्वीकारा कि वह हत्या के बाद से कभी बिहार कभी दिल्ली में फरारी काट रहा था। दिल्ली के जामिया इलाके में जुबैर की मदद से ही वहां रुका था। अब वह अपने पान वाली कोठी घर मिलने आया था। तभी दबोच लिया गया।
- साढ़े तीन साल से फरार जफर मसूद को गिरफ्तार करने में पुलिस ने सफलता हासिल की है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कुछ अन्य अपराधी अभी भी वांछित हैं। जिनकी तलाश जारी है।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
मुनीर संग मिलकर की थी जुबैर ने गनर की हत्या
गिरफ्तार किए गए जफर जिस जुबैर के साथ काम करता है। उसका व उसके भाइयों का लंबा चौड़ा आपराधिक रिकार्ड है। जुबैर के दो भाई यासिर व फहद लंबे समय तक दिल्ली जेल में रहे हैं। जुबैर ने मुनीर संग मिलकर पान दरीबा में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या की थी। उससे पिस्टल लूटा था। बाद में उस पिस्टल के लिए जुबैर ने अपने सगे भाई सद्दाम की भी मुनीर संग मिलकर हत्या कर दी थी। कुछ समय पहले उसे अलीगढ़ से दिल्ली पुलिस गिरफ्तार करके ले गई थी।
गैंगवार में ही मारी गई थी छात्रा अनस
अमीर निशा के पास छात्रा स्कूल से घर लौटती अब्दुल्ला की अनस की गोली लगने से मौत हो गई थी। उस समय उसे रोडरेज में घटना माना गया था। मगर शाहबेज की हत्या के बाद यह खुलासा हुआ था कि जुबैर व जहूर गैंग में हुए बिखराव के बाद उनमें झगड़े शुरू हो गए। अनस की हत्या के दिन भी दोनों में गैंगवार में गोली चली और छात्रा की गोली लगने से जान चली गई।
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पकड़ा गया जफर जुबैर का करीबी साथी है। हालांकि अब तक वह कभी बिहार व दिल्ली में फरारी काट रहा था और चोरी छिपे परिवार से मिलने आता था। इसी खबर पर उसे सिविल लाइंस थाने के पास से दबोचा गया है। इंस्पेक्टर सिविल लाइंस के अनुसार अमीर निशा के बाहर अब्दुल्ला कॉलेज की ऊपरकोट निवासी छात्रा अनस की रोडरेज में हत्या के आरोपी जीवनगढ़ के शाहबेज की 23 अक्तूबर 2018 की देर शाम पुरानी चुंगी के पास घेराबंदी कर हत्या की गई थी।
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इस हत्या की जांच में उजागर हुआ था कि पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी मुनीर के राइट हैंड अलीगढ़ में मुनीर के गैंग को ऑपरेट कर रहे नौशा बरला के अपराधी जुबैर ने साथियों संग मिलकर ये हत्या की है। उस समय यह भी साफ हुआ था कि जुबैर की किसी महिला मित्र को लेकर यह गैंग दो खेमों में बंट गया था। उसी खेमेबंदी में पहले जुबैर पर हमला हुआ था। बदले में ये हत्या की गई। इस हत्या में फरार चल रहे जफर मसूद को गिरफ्तार किया गया है।
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इंस्पेक्टर के अनुसार पुलिस पूछताछ में जफर ने स्वीकारा कि अहमद उर्फ चिंगारी का शाहबेज के भाई अज्जू से झगड़ा हो गया था। घटना वाले दिन शाहबेज व उसके साथी जहुर व मयंक आदि ने जुबैर के भाई अहमद से मारपीट की थी। इस सूचना पर जुबैर व उसके साथी तस्वीर महल गए।
मगर तब तक शाहबेज व उसके साथी जा चुके थे। इस संबंध में जुबैर, कुमैल, दानिश, सरताज, अहमद उर्फ चिंगारी, जुबैर का भाई अहमद, जुबैर के पिता रफत उल्लाह, आमिर, समीर , जफर मसूद, बाबर गुड्डू, आतिफ आदि ने साजिश रचकर शाहबेज व उसके साथियों को जान से मारने की योजना बनाई।
योजना के तहत आतिफ ने हथियार मुहैया कराए। इसी दौरान शाहबेज मिल गया और बाइकों से घेराबंदी कर एएमयू कैंपस से दौड़ाते हुए पुरानी चुंगी से आगे रेडियो कॉलोनी के सामने शाहबेज को गोलियों से भून दिया गया। इस हत्या के लिए जुबैर के पिता रफत उल्लाह ने रुपये खर्च करने का वायदा किया था।
उसने स्वीकारा कि वह हत्या के बाद से कभी बिहार कभी दिल्ली में फरारी काट रहा था। दिल्ली के जामिया इलाके में जुबैर की मदद से ही वहां रुका था। अब वह अपने पान वाली कोठी घर मिलने आया था। तभी दबोच लिया गया।
- साढ़े तीन साल से फरार जफर मसूद को गिरफ्तार करने में पुलिस ने सफलता हासिल की है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कुछ अन्य अपराधी अभी भी वांछित हैं। जिनकी तलाश जारी है।
- श्वेताभ पांडेय, सीओ तृतीय
मुनीर संग मिलकर की थी जुबैर ने गनर की हत्या
गिरफ्तार किए गए जफर जिस जुबैर के साथ काम करता है। उसका व उसके भाइयों का लंबा चौड़ा आपराधिक रिकार्ड है। जुबैर के दो भाई यासिर व फहद लंबे समय तक दिल्ली जेल में रहे हैं। जुबैर ने मुनीर संग मिलकर पान दरीबा में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर की हत्या की थी। उससे पिस्टल लूटा था। बाद में उस पिस्टल के लिए जुबैर ने अपने सगे भाई सद्दाम की भी मुनीर संग मिलकर हत्या कर दी थी। कुछ समय पहले उसे अलीगढ़ से दिल्ली पुलिस गिरफ्तार करके ले गई थी।
गैंगवार में ही मारी गई थी छात्रा अनस
अमीर निशा के पास छात्रा स्कूल से घर लौटती अब्दुल्ला की अनस की गोली लगने से मौत हो गई थी। उस समय उसे रोडरेज में घटना माना गया था। मगर शाहबेज की हत्या के बाद यह खुलासा हुआ था कि जुबैर व जहूर गैंग में हुए बिखराव के बाद उनमें झगड़े शुरू हो गए। अनस की हत्या के दिन भी दोनों में गैंगवार में गोली चली और छात्रा की गोली लगने से जान चली गई।