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संक्रमित महिला की मौत पर जीवन ज्योति हॉस्पिटल में हंगामा, जांच बैठी
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निजी कोविड अस्पतालों में मरीजों से इलाज के नाम पर अधिक रकम वसूलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। शुक्रवार को सारसौल चौराहा स्थित जीवन ज्योति हॉस्पिटल में कोविड संक्रमित महिला की मौत होने के बाद परिवार वालों ने हंगामा काट दिया। परिवार ने इलाज के नाम पर अधिक बिल बनाने, मरीज की मौत होने के बाद भी जानकारी न देने का आरोप लगाया। बताया कि बीते 19 दिन चले इलाज के दौरान उनको मरीज से मुलाकात तक नहीं करने दी। एसीएम प्रथम कुंवर बहादुर सिंह ने मामले की तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराने का आश्वासन देकर हंगामा शांत कराया। इधर, मृतका के पति की ओर से बन्नादेवी थाने में हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी गई है।
पीड़ित नरेंद्र कुमार निवासी सुरेंद्र नगर, क्वार्सी ने बताया कि उनकी पत्नी 38 वर्षीय मनीषा कोविड संक्रमित थीं। 2 मई को जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के नाम पर अस्पताल ने 1.70 लाख रुपये पहले ही ले लिए। इसके बाद बृहस्पतिवार को पांच लाख रुपये का बिल थमा दिया। शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की गई। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद अस्पताल ने 2.70 लाख रुपये का बिल जमा कराने की बात की। शुक्रवार दोपहर को पत्नी को यहां से डिस्चार्ज कराकर दीनदयाल अस्पताल में भर्ती करने का मन बनाया। जानकारी हॉस्पिटल प्रबंधन को दी और छुट्टी देने की बात कही।
आरोप है कि हॉस्पिटल प्रबंधन ने एक घंटे बाद पत्नी को अचेत हालत में डिस्चार्ज किया। इसके बाद जैसे ही एंबुलेंस में लेकर पहुंचे एंबुलेंस संचालक ने बताया कि उनकी पत्नी की मौत हो चुकी है। वापस अस्पताल गए और डाक्टरों को देखने के लिए कहा तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ लिया। बीते 19 दिनों तक चले इलाज के दौरान एक भी दिन पत्नी से किसी भी परिवार वाले को मिलने या उसे दूर से देखने तक नहीं दिया गया। आरोप है कि पत्नी की मौत होने के बाद भी प्रबंधन ने इलाज के नाम पर पैसा बनाने के लिए मौत की बात को छुपाए रखा। इस मामले में थाना पुलिस तहरीर दी गई। इधर, हंगामे की सूचना पर पहुंचे एसीएम प्रथम कुंवर बहादुर सिंह ने बताया तीन सदस्यीय कमेटी से मामले की जांच कराई जाएगी। इलाज के नाम पर दिए बिल, सभी दवाओं की रिपोर्ट, अस्पताल के सीसीटीवी आदि की जांच की जाएगी।
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पीड़ित नरेंद्र कुमार निवासी सुरेंद्र नगर, क्वार्सी ने बताया कि उनकी पत्नी 38 वर्षीय मनीषा कोविड संक्रमित थीं। 2 मई को जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के नाम पर अस्पताल ने 1.70 लाख रुपये पहले ही ले लिए। इसके बाद बृहस्पतिवार को पांच लाख रुपये का बिल थमा दिया। शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की गई। प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद अस्पताल ने 2.70 लाख रुपये का बिल जमा कराने की बात की। शुक्रवार दोपहर को पत्नी को यहां से डिस्चार्ज कराकर दीनदयाल अस्पताल में भर्ती करने का मन बनाया। जानकारी हॉस्पिटल प्रबंधन को दी और छुट्टी देने की बात कही।
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आरोप है कि हॉस्पिटल प्रबंधन ने एक घंटे बाद पत्नी को अचेत हालत में डिस्चार्ज किया। इसके बाद जैसे ही एंबुलेंस में लेकर पहुंचे एंबुलेंस संचालक ने बताया कि उनकी पत्नी की मौत हो चुकी है। वापस अस्पताल गए और डाक्टरों को देखने के लिए कहा तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ लिया। बीते 19 दिनों तक चले इलाज के दौरान एक भी दिन पत्नी से किसी भी परिवार वाले को मिलने या उसे दूर से देखने तक नहीं दिया गया। आरोप है कि पत्नी की मौत होने के बाद भी प्रबंधन ने इलाज के नाम पर पैसा बनाने के लिए मौत की बात को छुपाए रखा। इस मामले में थाना पुलिस तहरीर दी गई। इधर, हंगामे की सूचना पर पहुंचे एसीएम प्रथम कुंवर बहादुर सिंह ने बताया तीन सदस्यीय कमेटी से मामले की जांच कराई जाएगी। इलाज के नाम पर दिए बिल, सभी दवाओं की रिपोर्ट, अस्पताल के सीसीटीवी आदि की जांच की जाएगी।
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