प्रशासन की ओर से दिल्ली-एनसीआर सहित अन्य राज्यों या शहरों से पलायन कर आए दिहाड़ी मजदूरों के लिए तमाम इंतजाम करते हुए प्रवासी शिविर तो शहर से लेकर देहात तक बनवा दिए। मगर, इन शिविरों से प्रवासी ही गायब हैं। अधिकांश लोग अपने-अपने घरों को वाहन बंद होने के बाद भी पैदल ही पलायन कर चुके हैं, जिनके साथ छोटे बच्चे या वह खुद अब पैदल चलने में असमर्थ हैं। वही, जिले में बने इन शिविरों में ठहरे हुए हैं।
बुधवार को जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक तहसीलों में बनाए 17 राहत शिविरों में 322 लोगों रुके हुए हैं। यह सभी क्वारंटीन किए गए हैं। डॉक्टरों की अनुमति के बिना इनको कहीं भी भेजने से जिलाधिकारी ने इंकार कर दिया है। इसके साथ ही शहर की बात करें तो यहां बन्नादेवी थाना क्षेत्र के अंतर्गत गगन स्कूल, इंडियन पब्लिक स्कूल, इंग्राहम स्कूल में प्रवासी शिविर बनाए हैं। क्वार्सी क्षेत्र में एक प्रवासी शिविर रामघाट रोड स्थित सुगम समागम मैरिज होम में बनाया गया है। इनमें खानपान से लेकर सभी सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं। इसके बाद भी लोगों का यहां ठहराव नहीं हुआ। इधर, गांधी पार्क बस अड्डे और गूलर रोड स्थित नगर निगम के शेल्टर होम में करीब 110 लोग ठहरे हुए हैं। यह वह लोग हैं, जो शहर में रहकर दिहाड़ी मजदूरी कर अपना पालन पोषण करते हैं।