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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी: यहां नहीं हुई कोरोना के नए वैरिएंट से एक भी मौत, जांच के बाद हुई पुष्टि

Mon, 17 May 2021 10:17 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 17 May 2021 10:17 AM IST
सार

माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी, एएमयू के प्रमुख अन्वेषक, प्रोफेसर हारिस मंजूर खान के अनुसार, भेजे गए 20 नमूनों में से 18 (90 फीसदी) में बी.1.617.2 वंश था।  जिसे डबल म्यूटेशन वेरिएंट कहा जाता है। इसका पता पहली बार 5 अक्टूबर, 2020 को महाराष्ट्र चला था।

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aligarh muslim university no death from new variant of covid 19 says official after genome sequencing
एएमयू - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अलीगढ़ के थाना सिविल लाइन क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का कोई नया वायरस सक्रिय नहीं है। शिक्षकों की लगातार हो रही मौत के बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जेएन मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब द्वारा नई किस्म के कोरोना वायरस होने के संदेह में  सैंपल की जांच के लिए भेजे गए थे।

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इनकी रिपोर्ट शनिवार को आ गई । रिपोर्ट के मुताबिक जो नमूने भेजे गए थे उनमें 90 फ़ीसदी उस किस्म के वायरस थे जो अक्टूबर 2020 में महाराष्ट्र में पाई गई थी । इसे डबल म्यूटेशन वेरिएंट कहा जाता है।
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एएमयू के कुलपति, प्रोफेसर तारिक मंसूर ने एएमयू और आसपास के सिविल लाइंस क्षेत्र में कोविड-19 के उपभेदों की पूरी तरह से जांच करने की पहल की।  जिससे कोविड के उच्च संक्रामक दर के संभावित कारकों का पता लगाया जा सके।
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इसके बाद वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी, माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने जीनोम अनुक्रमण के लिए सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, नई दिल्ली को 20 कोविड नमूने भेजे।

माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अध्यक्ष और वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी, एएमयू के प्रमुख अन्वेषक, प्रोफेसर हारिस मंजूर खान के अनुसार, भेजे गए 20 नमूनों में से 18 (90 फीसदी) में बी.1.617.2 वंश था।  जिसे डबल म्यूटेशन वेरिएंट कहा जाता है। इसका पता पहली बार 5 अक्टूबर, 2020 को महाराष्ट्र चला था।

प्रोफेसर हारिस मंजूर खान के अनुसार, यह B.1.617 प्रकार का एक उप प्रकार है जो उत्तर प्रदेश में कोविड-19 की दूसरी लहर में फैलने वाला मुख्य वायरस है। डब्ल्यूएचओ ने इसकी उच्च संप्रेषणीयता और पहले से मौजूद एंटीबॉडी से कम न्यूट्रलाइजेशन के कारण इसे 'वेरिएंट ऑफ कंसर्न (वीओसी)' कहा है। बी.1.617 में अन्य परिसंचारी रूपों की तुलना में उच्च विकास दर है जो संचरण की संभावित वृद्धि दर की ओर इशारा करती है।

डब्ल्यूएचओ ने इसे भारतीय संस्करण नहीं कहा है और इसके लिए वैज्ञानिक शब्द का उपयोग करने के लिए कहा है। B.1.617 वैरिएंट, जिसे भारत की विनाशकारी दूसरी लहर के लिए आंशिक रूप से जिम्मेदार माना जाता है, के तीन उप वंश थे। B.1.617.1, B.1.617.2 और B.1.617.3।

एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज द्वारा जो नमूने भेजे गए थे उनमें से दो नमूनों में उस किस्म के वायरस पाए गए जो पहली बार यूनाइटेड किंग्डम और इटली में पाए गए थे। प्रोफेसर हारिस के अनुसार एक नमूने में B.1.1.7 वंश था जो सार्स सीओवी-2 की तुलना में 40-80 फीसदी अधिक पारगम्य है और पहली बार यूके में पाया गया था। एक नमूने में B.1 वंश था जो 2020 में मुख्य रूप से इटली में महामारी के फैलने के लिए जिम्मेदार था जो बाद में दुनिया के बाकी हिस्सों में फैल गया। हालांकि, कोई नया स्ट्रेन नहीं पाया गया। विश्वविद्यालय आईसीएमआर के निदेशक,सीएसआईआर-जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक और सभी संबंधित वैज्ञानिकों के प्रति उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता है।-प्रोफेसर एम हारिस खान, अध्यक्ष, माइक्रोबायोलॉजी विभाग, जेएन मेडिकल कॉलेज

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