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अलीगढ़: सर सैयद के करीबी मौलाना मीर रहे थे अल्लामा इकबाल के उस्ताद
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दीपक शर्मा
सर सैयद के बेहद करीबी रहे मौलाना सैयद मीर हसन सियालकोटी मशहूर शायर इकबाल के अध्यापक रहे थे। इसके साथ ही सर सैयद के एक और करीबी खान बहादुर मोहम्मद बरकत अली खान को उनके समाज सुधार और शिक्षा के प्रति जागरूकता के लिए उन्हें पंजाब का सर सैयद भी कहा जाता था।
सैयद मीर हसन सियालकोटी (1844-1929) सियालकोट में पैदा हुए सैयद मीर को शमशुल उलमा की उपाधि हासिल थी। वह अरेबिक और पर्शियन के विद्वान थे। सियालकोट में स्कॉटिश मिशन कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर काम करते थे। उनके पढ़ाई गए छात्रों में सर अल्लामा इकबाल जैसी शख्सियत शामिल हैं। सर सैयद के साथ इनका बहुत गहरा जुड़ाव था और बेहद नाजुक और अहम मसलों पर सर सैयद इनके साथ सलाह मशवरा किया करते थे। सर सैयद की अमीर हसन के साथ नजदीकियां दोनों के बीच होने वाले पत्र व्यवहार में देखी जा सकती हैं। 25 सितंबर 1929 को इनका देहांत हो गया।
खान बहादुर मोहम्मद बरकत अली खान (1821-1905) बरकत अली के पूर्वज शाहजहांपुर से ताल्लुक रखते थे इसलिए यह अपने नाम के पीछे शाहजहांपुर का जिक्र कर दिया करते थे। बरकत अली लाहौर की कद्दावर शख्सियत में गिने जाते थे। अपने जीवन काल में बरकत अली सर्वोच्च सरकारी पदों पर आसीन रहे। अपने रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज सुधार और शिक्षा के साथ नैतिक दशाओं के उत्थान के लिए लगा दिया।
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धार्मिक रूप से बेहद आस्थावान बरकत अली ने लाहौर की कई मस्जिदों का जीर्णोद्धार कराया। यह सर सैयद के जबरदस्त समर्थक थे। सर सैयद जब भी कॉलेज के सिलसिले में लाहौर जाते तो वह बरकत अली के यहां ठहरते थे। शिक्षा, समाज सुधार, आधुनिक दृष्टिकोण आदि के लिए लगातार काम करते रहने के चलते इन्हें पंजाब का सर सैयद कहा जाने लगा।
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सर सैयद के बेहद करीबी रहे मौलाना सैयद मीर हसन सियालकोटी मशहूर शायर इकबाल के अध्यापक रहे थे। इसके साथ ही सर सैयद के एक और करीबी खान बहादुर मोहम्मद बरकत अली खान को उनके समाज सुधार और शिक्षा के प्रति जागरूकता के लिए उन्हें पंजाब का सर सैयद भी कहा जाता था।
सैयद मीर हसन सियालकोटी (1844-1929) सियालकोट में पैदा हुए सैयद मीर को शमशुल उलमा की उपाधि हासिल थी। वह अरेबिक और पर्शियन के विद्वान थे। सियालकोट में स्कॉटिश मिशन कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर काम करते थे। उनके पढ़ाई गए छात्रों में सर अल्लामा इकबाल जैसी शख्सियत शामिल हैं। सर सैयद के साथ इनका बहुत गहरा जुड़ाव था और बेहद नाजुक और अहम मसलों पर सर सैयद इनके साथ सलाह मशवरा किया करते थे। सर सैयद की अमीर हसन के साथ नजदीकियां दोनों के बीच होने वाले पत्र व्यवहार में देखी जा सकती हैं। 25 सितंबर 1929 को इनका देहांत हो गया।
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खान बहादुर मोहम्मद बरकत अली खान (1821-1905) बरकत अली के पूर्वज शाहजहांपुर से ताल्लुक रखते थे इसलिए यह अपने नाम के पीछे शाहजहांपुर का जिक्र कर दिया करते थे। बरकत अली लाहौर की कद्दावर शख्सियत में गिने जाते थे। अपने जीवन काल में बरकत अली सर्वोच्च सरकारी पदों पर आसीन रहे। अपने रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना जीवन समाज सुधार और शिक्षा के साथ नैतिक दशाओं के उत्थान के लिए लगा दिया।
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धार्मिक रूप से बेहद आस्थावान बरकत अली ने लाहौर की कई मस्जिदों का जीर्णोद्धार कराया। यह सर सैयद के जबरदस्त समर्थक थे। सर सैयद जब भी कॉलेज के सिलसिले में लाहौर जाते तो वह बरकत अली के यहां ठहरते थे। शिक्षा, समाज सुधार, आधुनिक दृष्टिकोण आदि के लिए लगातार काम करते रहने के चलते इन्हें पंजाब का सर सैयद कहा जाने लगा।