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कुछ सूनी तो थी डगर, लेकिन बाजार रहा बेअसर
Sun, 10 Nov 2019 04:28 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
Published by: अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2019 04:28 AM IST
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दिन का आलम
- फोटो : अमर उजाला
ताला और तालीम के शहर में शनिवार की सुबह का सूरज अपने तय समय पर पूरी चमक के साथ निकला। जैसे-जैसे सुबह की रंगत और निखरी वैसे ही शहर के मिजाज के मुताबिक सड़कों, चौराहों पर कचौड़ी, खस्ते की ढके लें, पान की गुमटियां, चाय की टपरियां वैसे ही सज रही थीं, जैसे अन्य दिनों में सजती हैं।
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सब्जी के भगोने से उड़ती भाप और कड़ाही में तली जा रही कचौड़ियों के लिए उनके शौकीन वैसे ही जमा थे, जैसे अन्य दिनों में रहते हैं। बस चर्चा थी तो एक कि 10:30 बजे सुप्रीम कोर्ट के फैसले में क्या होगा? इसको लेकर माहौल में एक ‘खिंचाव’ महसूस किया जा सकता था।
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वैसे भी बाजार सुबह के 10-11 बजे के बाद ही खुलना शुरू होता है। इसलिए इससे पहले सड़कों पर ‘अलीगढ़ का नाश्ता’ जिसे कचौड़ी, खस्ते भी कहते हैं, उनकी मांग में कोई कमी नहीं आई।
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रेलवे रोड पर सेनेटरी का काम करने वाले राजेश कुमार अरोड़ा कहते हैं कि उन्हें अच्छी तरह याद था कि आज फैसला आने वाला है, लेकिन जब वह अपने घर से अप्सरा मार्केट की ओर गए तो कचौड़ी और खस्ते वाले जहां अपना स्टाल लगाते हैं, वहीं पर थे और सब कुछ सामान्य था। जब तक बाजार खुला और पूरी तरह सजा तब तक फैसला आ चुका था और उसके प्रावधान भी स्पष्ट हो चुके थे। उस पर चर्चा भी हो रही थी, लेकिन उसको लेकर किसी तरह की कोई असहज स्थिति बाजार में देखने को नहीं मिली।
देखने को मिला तो यह कि लोगों की आवाजाही जरूर अन्य दिनों की अपेक्षा कम थी। व्यापारी नेता हेमंत गर्ग कहते हैं कि जिनको बहुत जरूरी काम था, उन्होंने ही बाजार का रुख किया। बाकी जिनकी बाजार में दुकानें थीं, या गोदाम आदि हैं, वह लोग सामान्य रूप से अपने प्रतिष्ठानों तक पहुंचे। इसके बाद जैसे जैसे दिन गुजरता गया यह शहर अपनी सहजता की ओर बढ़ने लगा। शाम तक बाजारों में गहमागहमी भी बढ़ी और लोग की सड़कों पर चहलकदमी भी बढ़ गई।
पुराने शहर का हाल
सुबह की शुरुआत के साथ ही शहर के रेलवे रोड, मामू भांजा, महावीरगंज, बड़ा बाजार, फूल चौराहा, अब्दुल करीम चौराहा, हलवाईखाना, कनवरीगंज, छिपैटी, पत्थर बाजार, जयगंज, हलवाई खाना, देहली गेट, खैर रोड, फफाला, बारहद्वारी आदि प्रमुख बाजार सामान्य दिनों की तरह खुल तो गए। मगर इन बाजारों में सामान्य दिनों की तरह भीड़ या जाम या फर्राटा दौड़ती जिंदगी नहीं थी। लोगों की आवाजाही बेहद कम थी। इक्का दुक्का ग्राहक ही बाजार में घूमते या बेहद जरूरी काम से आने वाले लोग ही बाजार में दिखाई दे रहे थे।
इनमें मुस्लिमों की संख्या न के बराबर थी। हां, दोपहर 2 बजे के बाद इन बाजारों में भीड़ सामान्य दिनों की तरह होने लगी और शाम होते होते सब ठीक हो गया। इसके उलट जामा मस्जिद, ऊपरकोट, चंदन शहीद रोड, चिराग चियान के बाजारों में इक्का दुक्का दुकानें ही खुल रही थीं। लोग घरों व दुकानों के आगे बैठे आपस में चर्चा कर रहे थे। दिन भर यहां सड़कें सूनी रहीं और शाम तक बाजार नहीं खुले। इस दौरान लोग तमाम आशंकाओं के चलते लोग बाजारों में भी घूमने नहीं निकले।
सिविल लाइंस का हाल
इसी तरह सिविल लाइंस के सेंटर प्वाइंट, मैरिस रोड, रामघाट रोड, क्वार्सी, स्वर्ण जयंती, दोदपुर, केलानगर, मेडिकल रोड, अमीर निशा आदि इलाकों में बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले। मगर यहां भी भीड़ दोपहर तक न के बराबर रही। हां, दोपहर बाद इन इलाकों में भी हालात सामान्य हुए। यहां भी लोग तरह-तरह की आशंकाओं से घिरे रहे। मगर दोपहर बाद जब सब कुछ सामान्य रहा तो लोगों की आवाजाही शुरू हो गई।
एएमयू में दिन भर पसरा रहा सन्नाटा
एएमयू के चारों ओर सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई थी। मगर यहां दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। कैंपस के अंदर व बाहर किसी तरह की गतिविधि नहीं दिखाई दी। अंदर से ही लोग दोपहर बाद तक यह जानने को आतुर रहे कि शहर में सब ठीक है या नहीं। कहीं कोई बात तो नहीं है। अगर सब ठीक है तो इंटरनेट सेवाएं क्यों बाधित कर रखी हैं।

चन्दन शहीद रोड़ बाजार पर सब्जी की दुकान पर उमड़ी भीड़।- फोटो : CITY OFFICE