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अलीगढ़ : फिरोज की बनाई पोशाक से सजेंगे लड्डू गोपाल
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इकराम वारिस
अलीगढ़। फिरोज नईम के हाथों से बनी पोशाक से लड्डू गोपाल सजेंगे। लॉकडाउन में देवी-देवताओं की पोशाक का कारोबार फीका पड़ गया था, लेकिन अब पोशाक का काम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर चमक गया है। कारोबार के चमकने से फिरोज की आंखों में भी चमक आ गई है। उन्हें दीपावली पर भी अच्छी आमदनी की उम्मीद है।
पोशाक बनाने वाले फिरोज नईम बताते हैं कि उन्होंने पोशाक बनाने का काम अपने पिता नईम अहमद से सीखा था। अब वह दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी परंपरा को कायम कर रखा है। देवी-देवताओं की पोशाक तैयार करने वाली एक ही परिवार की चौथी पीढ़ी है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, श्रीगणेश पूजा सहित अन्य त्योहारों से कुछ दिन पहले ही पोशाक बनाने की तैयारी में परिवार लग जाता है। देवी-देवताओं की पोशाक सिल्क के कपड़े से बनाई जाती हैं।
चमकीली लेस, गोटा लगाकर उनसे शानदार पोशाक तैयार की जाती हैं। इन पोशाकों को हाथरस, कासगंज, बुलंदशहर सहित आसपास जिलों के दुकानदार खरीदने आते हैं। नईम कहते हैं कि श्रीराधा-कृष्णा, सीताजी, हनुमानजी सहित अन्य देवी-देवताओं के लिए पोशाक बनाना उनकी रोजी-रोटी है।
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बयान
भगवान की पोशाक बनाने का काम काफी पुराना है। लॉकडाउन की मार से कारोबार थोड़ा हल्का हो गया था। अब श्रीकृष्णा जन्माष्टमी आ रही है, उससे कारोबार और बाजार में रौनक है। दीपावली पर भी अच्छा हाथ चलेगा।
-फिरोज नईम, पोशाक कारोबारी, महावीरगंज
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अलीगढ़। फिरोज नईम के हाथों से बनी पोशाक से लड्डू गोपाल सजेंगे। लॉकडाउन में देवी-देवताओं की पोशाक का कारोबार फीका पड़ गया था, लेकिन अब पोशाक का काम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर चमक गया है। कारोबार के चमकने से फिरोज की आंखों में भी चमक आ गई है। उन्हें दीपावली पर भी अच्छी आमदनी की उम्मीद है।
पोशाक बनाने वाले फिरोज नईम बताते हैं कि उन्होंने पोशाक बनाने का काम अपने पिता नईम अहमद से सीखा था। अब वह दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी परंपरा को कायम कर रखा है। देवी-देवताओं की पोशाक तैयार करने वाली एक ही परिवार की चौथी पीढ़ी है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, श्रीगणेश पूजा सहित अन्य त्योहारों से कुछ दिन पहले ही पोशाक बनाने की तैयारी में परिवार लग जाता है। देवी-देवताओं की पोशाक सिल्क के कपड़े से बनाई जाती हैं।
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चमकीली लेस, गोटा लगाकर उनसे शानदार पोशाक तैयार की जाती हैं। इन पोशाकों को हाथरस, कासगंज, बुलंदशहर सहित आसपास जिलों के दुकानदार खरीदने आते हैं। नईम कहते हैं कि श्रीराधा-कृष्णा, सीताजी, हनुमानजी सहित अन्य देवी-देवताओं के लिए पोशाक बनाना उनकी रोजी-रोटी है।
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भगवान की पोशाक बनाने का काम काफी पुराना है। लॉकडाउन की मार से कारोबार थोड़ा हल्का हो गया था। अब श्रीकृष्णा जन्माष्टमी आ रही है, उससे कारोबार और बाजार में रौनक है। दीपावली पर भी अच्छा हाथ चलेगा।
-फिरोज नईम, पोशाक कारोबारी, महावीरगंज