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भूकंप के कंपनों को नाप रहा है अलीगढ़
आशीष निगम
Updated Tue, 12 Apr 2016 01:42 AM IST
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आर स्वरूप
- फोटो : अलीगढ़/ब्यूरो
स्वर्ण जयंती नगर के मकान नंबर एमएस 32 में गुजरे एक साल से भूकंप के कंपन नापे जा रहे हैं। इन कंपनों को नापने के लिए जमीन के 10 फीट अंदर एक रॉड डाली गई है। इस रॉड ने जमीन की अंदरूनी सतह पर कुछ कंपन महसूस किये तो वह रिफ्लेक्टर के माध्यम से मीटर में दर्ज किये गये। कुछ बात बनी तो काम आगे बढ़ा। इस कंपन में उत्पन्न होने वाली सूक्ष्म ध्वनि तरंगों से विद्युतीय ऊर्जा मिली। अलग-अलग मीटर लगे तो पता चला कि इन छोटे-छोटे कंपनों में माइक्रो एंपियर का करंट, मिनी वोल्ट का वोल्टेज और नैनो वॉट पॉवर है। जिसको बाकायदा मीटर में दर्ज किया गया और वीडियो फिल्म बनाई गई। दरअसल, इस पूरे प्रोजेक्ट में सीस्मो इलेक्ट्रिक इफेक्ट से पैदा हुई बिजली को प्रभावी बनाने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल की मदद ली जा रही है। इस सिग्नल को पैदा करने लिए जमीन के अंदर डाली गई पहली रॉड के समांतर ही दो रॉडें और लगाई गई हैं। वहीं रिफ्लेक्टर ने रविवार शाम को आए भूकंप के कंपन भी नापे हैं।
डीएस कालेज में भौतिक विज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर और सिंघानिया यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति आर स्वरूप ने अपने इस क्रियाशील छोटे से मॉडल से ये साबित किया है कि जमीन के कंपन से विद्युतीय ऊर्जा पैदा हो सकती है, जो बिजली संकट को दूर सकती है। अगर 10 से 15 फीट की गहराई के कंपन से ऐसा हो सकता है तो और गहराई में होने वाले कंपन हमें आसानी से बिजली दे सकते हैं। बोले.. घर में लगाए गए इस मॉडल की कीमत बहुत कम है लेकिन बड़े स्तर पर इसे अमलीजामा पहनाने के लिए बड़े बजट की दरकार है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इकोनॉमी, टैक्नोलॉजी एवं डिफिसिएंसी मिशन (ईटीडी) के तहत इस प्रोजेक्ट को दिल्ली की मंजूरी का इंतजार है। यही नहीं इसको भारत सरकार के माध्यम से पेटेंट कराने की भी कवायद जारी है। प्रो. स्वरूप ने बताया कि इसी तरह से समुद्री ज्वार भाटा की ऊर्जा का प्रयोग कर बिजली बनाई जा सकती है।
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गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी बड़ी नदियों की लहरों और बाढ़ की बलवती ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में बदला जा सकता है। बस इसके लिए कुछ ऐसे उपकरण बनाये जाएं जो जगह जगह इस्तेमाल कर पानी की लहरों के वेग से पहले यांत्रिकी ऊर्जा और बाद इसी यांत्रिकी ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में बदल सकें। इस पर भी वह एक मॉडल बना रहे हैं।
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डीएस कालेज में भौतिक विज्ञान विभाग के पूर्व प्रोफेसर और सिंघानिया यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति आर स्वरूप ने अपने इस क्रियाशील छोटे से मॉडल से ये साबित किया है कि जमीन के कंपन से विद्युतीय ऊर्जा पैदा हो सकती है, जो बिजली संकट को दूर सकती है। अगर 10 से 15 फीट की गहराई के कंपन से ऐसा हो सकता है तो और गहराई में होने वाले कंपन हमें आसानी से बिजली दे सकते हैं। बोले.. घर में लगाए गए इस मॉडल की कीमत बहुत कम है लेकिन बड़े स्तर पर इसे अमलीजामा पहनाने के लिए बड़े बजट की दरकार है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इकोनॉमी, टैक्नोलॉजी एवं डिफिसिएंसी मिशन (ईटीडी) के तहत इस प्रोजेक्ट को दिल्ली की मंजूरी का इंतजार है। यही नहीं इसको भारत सरकार के माध्यम से पेटेंट कराने की भी कवायद जारी है। प्रो. स्वरूप ने बताया कि इसी तरह से समुद्री ज्वार भाटा की ऊर्जा का प्रयोग कर बिजली बनाई जा सकती है।
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