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अलीगढ़ : 34 लाख रुपये के ऋण घोटाले में जांच टीम बदली
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पूर्व माध्यमिक विद्यालय नरवारी, टप्पल के सेवानिवृत्त शिक्षक जगदीश प्रसाद के जीपीएफ (जनरल प्रोविडेंट फंड) पर 35 किस्तों में दिए गए 34 लाख रुपये के ऋण घोटाले की जांच कर रही टीम बदल दी गई है। डीएम ने अब सिटी मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ कोषाधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा है। शिक्षक संगठनों के अनुरोध पर जांच टीम बदली गई है।
31 मार्च 2020 को शिक्षक जगदीश प्रसाद सेवानिवृत्त हो गए थे। कुछ महीनों के बाद जीपीएफ की धनराशि लेने के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने उनके जीपीएफ पर 34 लाख 34 हजार सात 171 रुपये का ऋण होने के चलते धनराशि देने से इनकार कर दिया। मामला संदिग्ध होने पर वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. अनिल यादव ने ज्येष्ठ लेखाधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार पांडेय व लेखाकार नितिन जैन की दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी थी।
एक हफ्ते की जांच-पड़ताल में लिपिक सुनील कुमार व देवेंद्र सिंह की लापरवाही उजागर हुई। टीम ने अपनी रिपोर्ट डॉ. अनिल यादव को सौंप दी, जिसके बाद उन्होंने दोनों लिपिक को निलंबित कर दिया था। वहीं, शिक्षक जगदीश प्रसाद व सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शंकर सिंह को भी दोषी माना गया था। पक्ष रखने के लिए उन्हें नोटिस भी दिया गया था। जांच टीम वर्ष 2007 से 2012 तक गायब पपत्र को ढूंढ रही थी, तभी डीएम ने शिक्षक संगठनों के अनुरोध पर जांच टीम बदलकर शिक्षा विभाग से इतर सिटी मजिस्ट्रेट व वरिष्ठ कोषाधिकारी की जांच टीम गठित कर दी। वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. अनिल यादव ने बताया कि जांच टीम बदल दी गई है। अब सिटी मजिस्ट्रेट व वरिष्ठ कोषाधिकारी घोटाले की जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी जो भी पपत्र मांगेंगे, उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।
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31 मार्च 2020 को शिक्षक जगदीश प्रसाद सेवानिवृत्त हो गए थे। कुछ महीनों के बाद जीपीएफ की धनराशि लेने के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने उनके जीपीएफ पर 34 लाख 34 हजार सात 171 रुपये का ऋण होने के चलते धनराशि देने से इनकार कर दिया। मामला संदिग्ध होने पर वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. अनिल यादव ने ज्येष्ठ लेखाधिकारी डॉ. अश्विनी कुमार पांडेय व लेखाकार नितिन जैन की दो सदस्यीय जांच टीम गठित कर दी थी।
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एक हफ्ते की जांच-पड़ताल में लिपिक सुनील कुमार व देवेंद्र सिंह की लापरवाही उजागर हुई। टीम ने अपनी रिपोर्ट डॉ. अनिल यादव को सौंप दी, जिसके बाद उन्होंने दोनों लिपिक को निलंबित कर दिया था। वहीं, शिक्षक जगदीश प्रसाद व सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शंकर सिंह को भी दोषी माना गया था। पक्ष रखने के लिए उन्हें नोटिस भी दिया गया था। जांच टीम वर्ष 2007 से 2012 तक गायब पपत्र को ढूंढ रही थी, तभी डीएम ने शिक्षक संगठनों के अनुरोध पर जांच टीम बदलकर शिक्षा विभाग से इतर सिटी मजिस्ट्रेट व वरिष्ठ कोषाधिकारी की जांच टीम गठित कर दी। वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ. अनिल यादव ने बताया कि जांच टीम बदल दी गई है। अब सिटी मजिस्ट्रेट व वरिष्ठ कोषाधिकारी घोटाले की जांच करेंगे। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी जो भी पपत्र मांगेंगे, उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा।
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