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अलीगढ़ : सरकारी अस्पतालों में नहीं हो रहा हेपेटाइटिस बी का इलाज
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मलखान सिंह जिला अस्पताल में शनिवार को अपनी बेटी कविता को लेकर सीएमएस डॉ. अनुपम भास्कर को हेपेटाइट
- फोटो : CITY OFFICE
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जिले के सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस बी का इलाज नहीं हो रहा है। मलखान सिंह जिला अस्पताल में इस बीमारी का इलाज होता ही नहीं है तो वहीं, पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में दवा उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर मरीजों को टरकाया जा रहा है। मरीज दिनभर अस्पताल पहुंचते हैं और दवाएं न मिलने पर थक हारकर वापस घर लौट जाते हैं। अधिकांश मरीज 1200 रुपये महीने की इन दवाओं को नहीं खरीद पाते हैं।
बचपन में ही सभी बच्चों को हेपेटाइटिस का टीका लगाया जाता है। हालांकि, कई लोग ऐसे भी हैं जो वैक्सीन के अभाव में या फिर अन्य कारणों से इस वायरस जनित बीमारी के संपर्क में आ जाते हैं। हेपेटाइटिस ए बीमारी अधिकांश मरीजों में मिल जाती है। जिनका उपचार हफ्ते से लेकर महीनों के अंदर हो जाता है।
लेकिन हेपेटाइटिस बी और सी ऐसी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक व्यक्ति के जीवन पर असर डालती हैं। इन दोनों बीमारी का इलाज सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। दीनदयाल अस्पताल प्रबंधन मरीजों को दवाएं मंगवाने का बहाना देकर टरका देता है। ऐसे में गरीब मरीज बाहर से 1200 रुपये महीने की दवाएं नहीं खरीद पाते हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में महंगे इलाज के चलते मरीज इलाज कराने से कतराने लगे हैं।
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सीएमएस से हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाया मरीज
- शनिवार को नौरंगाबाद के आंबेडकर कालोनी निवासी विजय प्रकाश अपनी बेटी के साथ दीनदयाल अस्पताल में सीएमएस डॉ. अनुपम भास्कर से मिले। यहां हाथ जोड़कर विजय प्रकाश गिड़गिड़ाते हुए बोले कि साहब एक महीने पहले अस्पताल से ही हेपेटाइटिस बी की रिपोर्ट मिली है।
लेकिन अभी तक दवाएं न मिलने के चलते इलाज शुरू नहीं हो पाया है। डॉक्टरों ने जेएन मेडिकल कॉलेज भेजा। वहां दो हजार रुपये जांच के लिए बताए। इस कारण इलाज शुरू नहीं कर सके। जबकि बाहर 1200 रुपये महीने की दवाएं मिल रही हैं। लॉकडाउन में नौकरी चली गई तो अब शादी विवाह में मजदूरी कर रहा था। लेकिन बीमारी के चलते वह भी काम नहीं कर पा रहा हूं। तीन बेटियां घर में हैं। बड़ी बेटी टीबी की मरीज है।
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हेपेटाइटिस बी की दवाएं शासन उपलब्ध कराता है। काफी समय से मांग भेज गई है। शुक्रवार को डिमांड का रिमाइंडर भी भेजा है। दवाएं न होने के चलते मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। - डॉ. अनुपम भास्कर, सीएमएस, पं. दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय
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बचपन में ही सभी बच्चों को हेपेटाइटिस का टीका लगाया जाता है। हालांकि, कई लोग ऐसे भी हैं जो वैक्सीन के अभाव में या फिर अन्य कारणों से इस वायरस जनित बीमारी के संपर्क में आ जाते हैं। हेपेटाइटिस ए बीमारी अधिकांश मरीजों में मिल जाती है। जिनका उपचार हफ्ते से लेकर महीनों के अंदर हो जाता है।
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लेकिन हेपेटाइटिस बी और सी ऐसी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक व्यक्ति के जीवन पर असर डालती हैं। इन दोनों बीमारी का इलाज सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। दीनदयाल अस्पताल प्रबंधन मरीजों को दवाएं मंगवाने का बहाना देकर टरका देता है। ऐसे में गरीब मरीज बाहर से 1200 रुपये महीने की दवाएं नहीं खरीद पाते हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में महंगे इलाज के चलते मरीज इलाज कराने से कतराने लगे हैं।
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सीएमएस से हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाया मरीज
- शनिवार को नौरंगाबाद के आंबेडकर कालोनी निवासी विजय प्रकाश अपनी बेटी के साथ दीनदयाल अस्पताल में सीएमएस डॉ. अनुपम भास्कर से मिले। यहां हाथ जोड़कर विजय प्रकाश गिड़गिड़ाते हुए बोले कि साहब एक महीने पहले अस्पताल से ही हेपेटाइटिस बी की रिपोर्ट मिली है।
लेकिन अभी तक दवाएं न मिलने के चलते इलाज शुरू नहीं हो पाया है। डॉक्टरों ने जेएन मेडिकल कॉलेज भेजा। वहां दो हजार रुपये जांच के लिए बताए। इस कारण इलाज शुरू नहीं कर सके। जबकि बाहर 1200 रुपये महीने की दवाएं मिल रही हैं। लॉकडाउन में नौकरी चली गई तो अब शादी विवाह में मजदूरी कर रहा था। लेकिन बीमारी के चलते वह भी काम नहीं कर पा रहा हूं। तीन बेटियां घर में हैं। बड़ी बेटी टीबी की मरीज है।
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हेपेटाइटिस बी की दवाएं शासन उपलब्ध कराता है। काफी समय से मांग भेज गई है। शुक्रवार को डिमांड का रिमाइंडर भी भेजा है। दवाएं न होने के चलते मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। - डॉ. अनुपम भास्कर, सीएमएस, पं. दीनदयाल संयुक्त चिकित्सालय