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अलीगढ़ : डिफेंस कॉरिडोर के लिए किसानों की जमीन का अब नहीं होगा अधिग्रहण, प्रशासन ने वापस लिया फैसला

Sun, 23 Aug 2020 04:48 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 23 Aug 2020 04:48 PM IST
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Aligarh: Farmers land will not be acquired for defense corridor, district administration takes back its decision
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

अलीगढ़ मे खैर के अंडला गांव में बनने जा रहे देश के पहले डिफेंस कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर पिछले पांच दिनों से छिड़ी रार को डीएम ने खत्म कर दिया है। अब अंडला, पेराई और हैवतपुर में किसी भी किसान की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। सिर्फ सरकारी भूमि 49 हेक्टेयर और पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी 7 हेक्टेयर सहित कुल 56 हेक्टेयर भूमि पर डिफेंस कॉरिडोर का निर्माण होगा।

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भविष्य में डिफेंस कॉरिडोर का विस्तार करने के लिए जिला प्रशासन ने अन्य तहसीलों में स्थित सरकारी जमीन को विकल्प के तौर पर रखा है। डीएम ने साफ किया कि गभाना के ख्यामई और कोल तहसील के बराकलां गांव में प्रशासन द्वारा खाली कराई दो हजार बीघा जमीन को भविष्य में डिफेंस कॉरिडोर के विस्तार के लिए रिजर्व रखा जाएगा।
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इसके साथ ही डीएम ने किसान यूनियन, राजनैतिक दलों की किसानों के साथ सोमवार को प्रस्तावित पंचायत को भी न करने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि अब किसानों से जमीन अधिग्रहण करने का मुद्दा ही खत्म हो गया है। ऐसे में किसी भी प्रकार की पंचायत का आयोजन न किया जाए।
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अंडला में देश का पहला डिफेंस कॉरिडोर बनने जा रहा है। इसके लिए वहां स्थित कृषि विभाग की 49 हेक्टेयर के करीब जमीन, जो कि वन विभाग के नाम पर हस्तांरित की गई। उसे वन विभाग ने उप्र विकास प्राधिकरण को सौंप दिया। इसके बाद इस जमीन के पास ही 7 हेक्टेयर जमीन किसानों से प्रशासन ने सर्किल रेट के दोगुने दामों पर अधिग्रहण की। इस प्रकार यहां कुल 56 हेक्टेयर जमीन पर डिफेंस कॉरिडोर बनना तय हुआ।

14 अगस्त को यहां जमीन का निरीक्षण करने अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी आए। उन्होंने किसानों, प्रधान और उद्योगपतियों के साथ बैठक की। बैठक में उद्योगपतियों की रूचि को देखते हुए उन्होंने जिला प्रशासन को कॉरिडोर के भविष्य के विस्तार के लिए 250 हेक्टेयर और जमीन तलाशकर खरीदने का निर्देश दे दिए। उसके अगले दिन से ही किसान जमीन देने की एवज में चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। डीएम ने साफ कर दिया है कि वह दो गुना मुआवजा ही देंगे। 18 अगस्त से जमीन देने की एवज में किसान चार गुना मुआवजा मांगने लगे।

इसके बाद वह झांसी में विकसित होने जा रहे डिफेंस कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की जा रही जमीन के लिए किसानों को चार गुना मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने का उदाहरण रख दिया था। जिला प्रशासन अपने दोगुने दाम की बात पर अड़ा था। किसान चार गुना की मांग पर अड़े थे। इस बीच शुक्रवार को इसमें राजनैतिक दखल शुरू हो गया। शनिवार को किसान यूनियनों ने भी किसानों के समर्थन का एलान कर दिया। इसकी चर्चा लखनऊ स्तर पर हो गई।

इसके बाद जिला प्रशासन ने रविवार को बैठक की। बैठक में डीएम ने जिले में डिफेंस कॉरिडोर के विस्तार के लिए किसानों की जमीन न लेकर सरकारी जमीनों का विकल्प तलाशा। इसमें उनको पिछले दिनों गभाना तहसील के ख्यामई गांव में खाली कराई जमीन और शनिवार को कोल तहसील के गांव बराकलां में खाली कराई जमीन का विकल्प मिल गया। इस पर उन्होंने मुहर लग दी। डीएम चंद्रभूषण सिंह के मुताबिक अब किसानों की जमीन अधिग्रहण नहीं की जाएगी। किसानों को किसी भी प्रकार की पंचायत करने की जरूरत नहीं है। 

राजनीतिक बिसात और आंदोलन धराशाई

अंडला प्रकरण को ठीक दस साल पहले हुए टप्पल के पास जेपी टाउनशिप बसाने के जमीन अधिग्रहण जैसा एतिहासिक विवाद बनाने की तैयारी हो रही थी। उस आंदोलन में तीन लोगों की मौत हो गई थी। उस वक्त भी किसान नोएडा के बराबर मुआवजा देने की मांग पर अड़े थे और प्रशासन अलीगढ़ के अलग रेट दे रहा था।

ठीक दस वर्ष बाद टप्पल से पहले अंडला पर फिर इतिहास खुद को दोहरा रहा था। प्रशासन दोगुना मुआवजा दे रहा है और किसान झांसी की तर्ज पर चार गुना मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। किसान यूनियनों से लेकर आगामी पंचायत चुनावों के संभावित प्रत्याशी खुद को किसानों का रहनुमा बताते हुए आंदोलन खड़ा कर अपना चेहरा चमकाने की तैयारी में थे।

मगर, जिलाधिकारी के रविवार दोपहर को लिए फैसले ने उस आंदोलन की कमर तोड़ दी है। दोपहर से ही इस बात को लेकर जिले से लेकर कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। दरअसल, इस पूरे मामले में पूर्व सांसद चौ. विजेंद्र सिंह भी किसानों के पक्ष में हैं। उन्होंने पूरे मामले से कांग्रेस आलाकमान को भी अवगत कराया है। उन्होंने ही वर्ष 2010 में जिकरपुर टप्पल और भट्टा पारसौल में किसानों को सही मुआवजा दिलाने के लिए कांग्रेस उनके साथ खड़ी थी। यह बयान देकर किसानों को उस आंदोलन की याद दिलाई थी।

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