फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Aligarh: Emotional connection of Chaudhary Charan Singh's family with Iglas

अलीगढ़ : चौधरी चरण सिंह के परिवार का इगलास से भावनात्मक जुड़ाव

Thu, 23 Dec 2021 12:45 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Dec 2021 12:45 AM IST
विज्ञापन
Aligarh: Emotional connection of Chaudhary Charan Singh's family with Iglas
इकराम वारिस
विज्ञापन

अलीगढ़। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती आज (23 दिसंबर) है। उनकी जयंती को किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। जयंती का जिक्र इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इसी दिन रालोद-सपा की संयुक्त महारैली हो रही है, वह भी इगलास विधानसभा क्षेत्र में, जो प्रदेश भर में मिनी छपरौली के नाम से विख्यात है। दरअसल, इसी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण की पत्नी गायत्री देवी व बेटी ज्ञानवती ने न कि चुनाव लड़ा, बल्कि विधानसभा में भी पहुंचीं। इस क्षेत्र से उनके परिवार का भावनात्मक जुड़ाव है। यही वजह है कि संयुक्त चुनावी बिगुल फूंकने के लिए इगलास को चुना गया। इगलास की सीमा कई जिलों को छूती है, जहां जाट समुदाय की अच्छी खासी तादाद है। इस इलाके को जाटलैंड भी कहते हैं। साथ ही जाट मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश भी होगी।
इगलास विधानसभा क्षेत्र में पौने चार लाख मतदाता हैं। इनमें करीब एक लाख मतदाता जाट समुदाय के हैं। चौधरी चरण सिंह पहले कांग्रेस में थे। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कई खेमे थे। आजादी के कुछ वर्षों के बाद इस क्षेत्र से शिवदान सिंह कांग्रेस के विधायक चुने गए, जिनकी निकटता चौधरी चरण सिंह से थी। वर्ष 1967 में खैर-बरौली से क्षेत्र बदलकर इगलास से चुनाव लड़ने का मन मोहनलाल गौतम ने बना लिया और वह कांग्रेस से टिकट ले आए। शिवदान सिंह को कांग्रेस से टिकट न मिलना सहित अन्य कई वजहों से चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी और भारतीय क्रांति दल नाम से नई पार्टी बना ली।
विज्ञापन

नई पार्टी से शिवदान सिंह ने चुनाव लड़ा, लेकिन वह मोहनलाल गौतम से हार गए। दो साल बाद 1969 को हुए चुनाव में चौधरी चरण सिंह ने अपनी पत्नी गायत्री देवी को भारतीय क्रांति दल से प्रत्याशी उतारा और वह चुनाव जीत गईं। इसके बाद 1974 में बीकेडी से शिवदान सिंह के बेटे राजेंद्र सिंह विधायक बने। 1977 में भी वह विधायक बने। वर्ष 1979 में इसी सीट से जनता दल से चौधरी चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती विधायक बनीं। 1980 में इस सीट से राजेंद्र सिंह फिर विधायक चुने गए। इस दौरान राजेंद्र सिंह की चौधरी चरण सिंह की नजदीकी काफी बढ़ गई। उन्हें चौधरी चरण सिंह बेटा मानते थे। वर्ष 1989 में वह बिजेंद्र सिंह से चुनाव हार गए। कई वर्षों के बाद जाट मतदाताओं ने चौधरी चरण सिंह से प्यार होने का सुबूत वर्ष 2007 में रालोद से विमलेश सिंह व 2012 से रालोद से
विज्ञापन
विज्ञापन

त्रिलोकीराम दिवाकर को विधानसभा भेजकर दिया। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा से राजवीर दिलेर चुने गए। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा प्रत्याशी बनाया गया, जिसमें वह जीत गए। संसद बनने पर उन्होंने विधायकी से इस्तीफा दे दिया। उप चुनाव में प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजा महेंद्र प्रताप के नाम से राजकीय विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा करके जाट समुदाय के वोटों को सहेजने की कोशिश की, जिसमें उन्हें सफलता भी मिली। अब 23 दिसंबर को रालोद-सपा की संयुक्त रैली से जयंत चौधरी व अखिलेश यादव भी परंपरागत जाट मतों को लामबंद करने की कोशिश करेंगे, जिसका असर कई जिलों में भी पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed