अलीगढ़: दो लैब में फेल हुए दाल-सब्जी, जिला अस्पताल की रसोई सील, 240 मरीजों के सामने दो वक्त के खाने का संकट
पहले रिपोर्ट में नमूने फेल हुए तो दूसरी रिपोर्ट आने तक रसोई बंद क्यों नहीं की गई? रसोई में गंदगी पहले से थी तो नियमित निरीक्षण में यह क्यों नहीं पकड़ी गई? मरीजों को खराब गुणवत्ता का भोजन परोसे जाने की जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जिस दाल और सब्जी के सहारे अलीगढ़ के मलखान सिंह जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों की थाली भर रही थी, उसकी गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अरहर की दाल और आलू-पालक की सब्जी के नमूने दो अलग-अलग लैब में जांचे गए और दोनों जगह रिपोर्ट फेल आई। इसके बाद शुक्रवार को खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिला अस्पताल की रसोई बंद करा दी। रसोई में गंदगी भी मिली है।
मामला पांच फरवरी को लिए गए दाल और सब्जी के नमूनों से सामने आया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने दोनों खाद्य पदार्थों के चार-चार सेट तैयार कराए थे। इनमें से एक सेट लखनऊ की राज्य स्तरीय लैब में जांच के लिए भेजा गया। वहां से दोनों नमूनों की रिपोर्ट मानकों के अनुरूप नहीं आई। जिला अस्पताल प्रबंधन ने रिपोर्ट पर असहमति जताई और दूसरे सेट को रेफरल लैब में जांच के लिए भेजा। यहां भी दाल और सब्जी की रिपोर्ट फेल मिली। यानी एक ही खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर दो अलग-अलग जांचों में सवाल खड़े हुए।
रसोई में गंदगी भी मिली
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान रसोई की साफ-सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं मिली। खाद्य पदार्थ तैयार करने वाली जगह पर गंदगी समेत अन्य अनियमितताएं सामने आने के बाद विभाग ने रसोई का संचालन बंद करा दिया। सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त दीपक सिंह ने बताया कि दाल और सब्जी के नमूने दो बार जांचे गए और दोनों बार रिपोर्ट फेल आई। इसके अलावा रसोई में गंदगी भी मिली। इन अनियमितताओं के चलते शुक्रवार को रसोई बंद करा दी गई है।
240 मरीजों के सामने दो वक्त के खाने का संकट
इधर रसोई बंद होने से जिला अस्पताल में भर्ती 240 मरीजों के सामने दो वक्त के भोजन का संकट खड़ा हो गया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को दोपहर करीब एक बजे और रात आठ बजे दाल, रोटी, सब्जी और चावल दिए जाते हैं। सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने रसोई बंद कराई है। शनिवार को मरीजों के लिए खाने-पीने की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने अन्य सवालों का जवाब नहीं दिया।
फिर भी छह माह चलती रही रसोई, क्यों?
पहले रिपोर्ट में नमूने फेल हुए तो दूसरी रिपोर्ट आने तक रसोई बंद क्यों नहीं की गई? रसोई में गंदगी पहले से थी तो नियमित निरीक्षण में यह क्यों नहीं पकड़ी गई? मरीजों को खराब गुणवत्ता का भोजन परोसे जाने की जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? इन सवालों पर अस्पताल, खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने जवाब नहीं दिया।
हर बार शिकायत, कीड़े भी निकले
जिला अस्पताल के भोजन को लेकर पिछले एक वर्ष में आठ बार मरीजों ने शिकायत की है। दो बार अस्पताल परिसर में तीमारदारों का हंगामा भी हुआ। कभी दाल में पानी ज्यादा तो कभी सब्जी-रोटी बेस्वाद, इसी साल जनवरी में कीड़े तक मिले। इसके बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। भाजपा के पूर्व प्रदेश मंत्री राजेंद्र चीफ ने यहां तक आरोप लगाया कि अस्पताल में ब्लैकलिस्टेड फर्म से खाना बनवाया जा रहा था। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से अस्पताल प्रबंधन की जांच कराने की मांग की है।