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अलीगढ़ : अमोनिया रिसाव में लापरवाही पर मंथन, कमिश्नर की मुहर बाकी
सार
अभी मालिक उसी दिन से फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें लगी हुई हैं।हर पहलू पर जांच जारी, प्रथमदृष्टया इंजीनियर दोषीजांच दल द्वारा इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। शनिवार को भी बयान दर्ज किए गए थे।दर्जन भर कमियों पर फैक्टरी को नोटिस, प्रतिबंधित रहेगा क्षेत्रइस मामले में जेडी उद्योग के साथ सहायक निदेशक कारखाना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी जांच के लिए मौके पर पहुंचे। इधर, जांच में यह भी पाया गया है कि अमोनिया प्रेसर पाइप की नियमित जांच नहीं कराई गई।
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विस्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
बसपा नेता व प्रमुख मीट निर्यातक हाजी जहीर की मीट फैक्टरी अलदुआ फूड प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया रिसाव कांड की शासन के निर्देश पर चल रही जांच अंतिम दौर में है। इस मामले में डीआईजी रेंज के अलावा जेडी उद्योग के नेतृत्व में उद्योग, कारखाना व प्रदूषण टीम ने जांच लगभग पूरी कर ली है। अब मंडलायुक्त के अवकाश से लौटने पर उन्हें सौंपकर अग्रिम निर्णय व शासन को भेजने पर फैसला लिया जाएगा। इधर, डीआईजी दीपक कुमार शनिवार को भी जांच के अन्य पहलुओं को संकलित करने में लगे रहे।
तालसपुर स्थित इस फैक्टरी में 29 सितंबर की सुबह सुबह हुए गैस रिसाव में 59 महिला कर्मचारी बेहोश हो गई थीं। इस कांड को शासन स्तर से गंभीरता से लिया गया और कमिशभनर गौरव दयाल की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। जिसमें डीआईजी रेंज व जेडी उद्योग भी शामिल किए गए। शासन के आदेश पर डीआईजी व जेडी उद्योग ने जांच शुरू कर दी।
मगर कमिशभनर के अवकाश पर होने के कारण वे जांच में शामिल नहीं हो सके। इधर, जिला पुलिस ने मामले में प्रथम दृष्टया वैल्ड पाइप के सहारे अमोनिया आपूर्ति का मामला उजागर होने पर लापरवाही मानते हुए मालिक सहित सात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया और छह लोग जेल भेज दिए। अभी मालिक उसी दिन से फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें लगी हुई हैं।
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हर पहलू पर जांच जारी, प्रथमदृष्टया इंजीनियर दोषी
जांच दल द्वारा इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। फैक्टरी नियम के तहत सभी दस्तावेज देखे गए हैं। पहला आदेश लापरवाही जांचने का है। जिसमें अब तक की जांच में प्रथम दृष्टया इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। मालिक की भूमिका व उसकी गतिविधियों को भी जांच में शामिल किया गया है। डीआईजी दीपक कुमार बताते हैं कि फैक्टरी में क्वालिटी व मैनेजमेंट फेल्योर अब तक सामने आया है। इसमें अभी यह साफ नहीं है कि सीधे सीधे कौन दोषी है। बाकी इस पहलू पर जिले की अन्य वे सभी फैक्टरी, जिनमें अमोनिया का प्रयोग होता है, उनके मानक भी देखे जाएंगे। उन्हें सलाह दी जाएगी। रोहिंग्या के मामले में जिला स्तर पर जांच की जा रही है। हम भी उन्हें अपनी जांच में देख रहे हैं। एक-दो दिन में जांच पूरी कर दी जाएगी। अभी लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। शनिवार को भी बयान दर्ज किए गए थे।
दर्जन भर कमियों पर फैक्टरी को नोटिस, प्रतिबंधित रहेगा क्षेत्र
इस मामले में जेडी उद्योग के साथ सहायक निदेशक कारखाना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी जांच के लिए मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान मिली खामियों के आधार पर फैक्टरी को निर्देश/नोटिस दिया गया है। जिसमें दुर्घटना वाले इलाके को प्रतिबंधित रखा गया है और कहा है कि जब तक मशीनरी व संयत्र की उचित मरम्मत नहीं हो जाती है। साथ ही जांच के बाद निदेशक कारखाना कानपुर से एनओसी नहीं ले ली जाती। नोटिस का जवाब नहीं दे दिया जाता। तब तक ये प्रतिबंध लागू रहेगा। इधर, जांच में यह भी पाया गया है कि अमोनिया प्रेसर पाइप की नियमित जांच नहीं कराई गई। साथ में संचालन को लेकर चैंबर व मशीनों की जांच नहीं कराई गई थी। मरम्मत कार्य समय पर नहीं कराया गया। इन सहित दर्जन भर खामियां सामने आई हैं। इसे लेकर जेडी उद्योग वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि जांच लगभग अंतिम दौर में है। मंडलायुक्त को उसे सौंपा जाएगा। उनके स्तर से शासन को प्रकरण संदर्भित किया जाएगा।
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बसपा नेता व प्रमुख मीट निर्यातक हाजी जहीर की मीट फैक्टरी अलदुआ फूड प्रोसेसिंग यूनिट में अमोनिया रिसाव कांड की शासन के निर्देश पर चल रही जांच अंतिम दौर में है। इस मामले में डीआईजी रेंज के अलावा जेडी उद्योग के नेतृत्व में उद्योग, कारखाना व प्रदूषण टीम ने जांच लगभग पूरी कर ली है। अब मंडलायुक्त के अवकाश से लौटने पर उन्हें सौंपकर अग्रिम निर्णय व शासन को भेजने पर फैसला लिया जाएगा। इधर, डीआईजी दीपक कुमार शनिवार को भी जांच के अन्य पहलुओं को संकलित करने में लगे रहे।
तालसपुर स्थित इस फैक्टरी में 29 सितंबर की सुबह सुबह हुए गैस रिसाव में 59 महिला कर्मचारी बेहोश हो गई थीं। इस कांड को शासन स्तर से गंभीरता से लिया गया और कमिशभनर गौरव दयाल की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। जिसमें डीआईजी रेंज व जेडी उद्योग भी शामिल किए गए। शासन के आदेश पर डीआईजी व जेडी उद्योग ने जांच शुरू कर दी।
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मगर कमिशभनर के अवकाश पर होने के कारण वे जांच में शामिल नहीं हो सके। इधर, जिला पुलिस ने मामले में प्रथम दृष्टया वैल्ड पाइप के सहारे अमोनिया आपूर्ति का मामला उजागर होने पर लापरवाही मानते हुए मालिक सहित सात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया और छह लोग जेल भेज दिए। अभी मालिक उसी दिन से फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस टीमें लगी हुई हैं।
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हर पहलू पर जांच जारी, प्रथमदृष्टया इंजीनियर दोषी
जांच दल द्वारा इस मामले में सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। फैक्टरी नियम के तहत सभी दस्तावेज देखे गए हैं। पहला आदेश लापरवाही जांचने का है। जिसमें अब तक की जांच में प्रथम दृष्टया इंजीनियर दोषी पाए गए हैं। मालिक की भूमिका व उसकी गतिविधियों को भी जांच में शामिल किया गया है। डीआईजी दीपक कुमार बताते हैं कि फैक्टरी में क्वालिटी व मैनेजमेंट फेल्योर अब तक सामने आया है। इसमें अभी यह साफ नहीं है कि सीधे सीधे कौन दोषी है। बाकी इस पहलू पर जिले की अन्य वे सभी फैक्टरी, जिनमें अमोनिया का प्रयोग होता है, उनके मानक भी देखे जाएंगे। उन्हें सलाह दी जाएगी। रोहिंग्या के मामले में जिला स्तर पर जांच की जा रही है। हम भी उन्हें अपनी जांच में देख रहे हैं। एक-दो दिन में जांच पूरी कर दी जाएगी। अभी लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। शनिवार को भी बयान दर्ज किए गए थे।
दर्जन भर कमियों पर फैक्टरी को नोटिस, प्रतिबंधित रहेगा क्षेत्र
इस मामले में जेडी उद्योग के साथ सहायक निदेशक कारखाना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी जांच के लिए मौके पर पहुंचे। जांच के दौरान मिली खामियों के आधार पर फैक्टरी को निर्देश/नोटिस दिया गया है। जिसमें दुर्घटना वाले इलाके को प्रतिबंधित रखा गया है और कहा है कि जब तक मशीनरी व संयत्र की उचित मरम्मत नहीं हो जाती है। साथ ही जांच के बाद निदेशक कारखाना कानपुर से एनओसी नहीं ले ली जाती। नोटिस का जवाब नहीं दे दिया जाता। तब तक ये प्रतिबंध लागू रहेगा। इधर, जांच में यह भी पाया गया है कि अमोनिया प्रेसर पाइप की नियमित जांच नहीं कराई गई। साथ में संचालन को लेकर चैंबर व मशीनों की जांच नहीं कराई गई थी। मरम्मत कार्य समय पर नहीं कराया गया। इन सहित दर्जन भर खामियां सामने आई हैं। इसे लेकर जेडी उद्योग वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि जांच लगभग अंतिम दौर में है। मंडलायुक्त को उसे सौंपा जाएगा। उनके स्तर से शासन को प्रकरण संदर्भित किया जाएगा।