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Aligarh News: एनसीआर की जहरीली हवा का अलीगढ़ पर भी असर, एक्यूआई 350 तक पहुंचा
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दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) का दूसरा चरण लागू होने के बीच अलीगढ़ की हवा भी प्रदूषण की चपेट में है। शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 350 तक पहुंचने के आंकड़े सामने आए हैं। एएमयू के हरियाली से भरपूर परिसर में भी पीएम-10 का स्तर सामान्य से करीब तीन गुना अधिक दर्ज किया गया है। इससे शहर की आबोहवा पर प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
एएमयू में स्थापित वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के मुताबिक, यहां पीएम-10 का स्तर 235 दर्ज किया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में पेड़-पौधे और हरियाली होने के बावजूद प्रदूषण का यह स्तर चिंता बढ़ाने वाला है। वहीं, शहर के अन्य हिस्सों और औद्योगिक क्षेत्रों में एक्यूआई 350 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के साथ अलीगढ़ की वायु गुणवत्ता पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है। ऐसे में शहर के विभिन्न इलाकों में नियमित निगरानी जरूरी है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक विश्वनाथ शर्मा के मुताबिक, जिन शहरों में लगातार तीन-चार वर्षों तक वायु गुणवत्ता खराब बनी रहती है, वहां ग्रेप के प्रावधान लागू किए जाते हैं। अलीगढ़ में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए एएमयू के साथ थर्ड पार्टी के रूप में करार किया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से प्रत्येक महीने के अंत में प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है।
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एएमयू में स्थापित वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के मुताबिक, यहां पीएम-10 का स्तर 235 दर्ज किया गया है। विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में पेड़-पौधे और हरियाली होने के बावजूद प्रदूषण का यह स्तर चिंता बढ़ाने वाला है। वहीं, शहर के अन्य हिस्सों और औद्योगिक क्षेत्रों में एक्यूआई 350 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
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दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के साथ अलीगढ़ की वायु गुणवत्ता पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है। ऐसे में शहर के विभिन्न इलाकों में नियमित निगरानी जरूरी है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक विश्वनाथ शर्मा के मुताबिक, जिन शहरों में लगातार तीन-चार वर्षों तक वायु गुणवत्ता खराब बनी रहती है, वहां ग्रेप के प्रावधान लागू किए जाते हैं। अलीगढ़ में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए एएमयू के साथ थर्ड पार्टी के रूप में करार किया गया है। विश्वविद्यालय की ओर से प्रत्येक महीने के अंत में प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाती है।