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Air pollution: दिवाली पर पटाखों के धूमधड़ाके से खतरनाक हुई हवा, सांस रोगियों की बढ़ी दिक्कतें

Mon, 04 Nov 2024 05:30 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Mon, 04 Nov 2024 05:30 PM IST
सार

जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा ने बताया कि ठंडे मौसम में अस्थमा और सांस के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्थमा अटैक आने लगते हैं।

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Air becomes dangerous due to burst of firecrackers on Diwali
आगरा रोड एडीए कॉलोनी में चलते पटाखे - फोटो : संवाद

विस्तार

दिवाली पर हुई आतिशबाजी से अलीगढ़ शहर की आबोहवा बिगड़ गई है। वायु प्रदूषण बढ़ने से एक बार फिर सांस और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। सुबह-शाम की हल्की ठंड से अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में मरीजों को सावधान रहने की जरूरत है। घर के बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क लगाएं।

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3 नवंबर को जिला अस्पताल और दीनदयाल अस्पताल की इमरजेंसी में सांस के करीब 30 से अधिक मरीज आए। ओपीडी में भी लगातार सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पिछले पांच दिनों में दोनों अस्पतालों की ओपीडी में सांस संबंधी करीब 600 से अधिक मरीजों ने चिकित्सकों से परामर्श लिया है। वहीं निजी अस्पतालों में भी 40 फीसदी तक मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जगवीर वर्मा ने बताया कि ठंडे मौसम में अस्थमा और सांस के मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्थमा अटैक आने लगते हैं। जिला अस्पताल के डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि अस्थमा में सांस की नली में सूजन आ जाती है। वायु प्रदूषण, कम तापमान और आतिशबाजी के बाद पटाखों का धुआं अस्थमा अटैक का मुख्य कारण है।

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आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रदीप बंसल बताते हैं कि इस मौसम में निजी अस्पतालों की ओपीडी में भी सांस व अस्थमा के रोगियों की संख्या 40 फीसदी तक बढ़ गई है। बताया कि वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण सांस के जरिये फेफड़े में पहुंचते हैं। इससे ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी, अस्थमा के मरीजों की बीमारी बढ़ सकती है। इस वजह से अस्थमा का अटैक भी हो सकता है।

ये होती हैं बीमारियां
जुकाम, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, गले में संक्रमण, अस्थमा, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां आदि।

ये बरतें सावधानी
घर से बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क या रुमाल बांधे। आंखों पर चश्मा लगाएं। एक ही मास्क का कई बार उपयोग न करें, इससे संक्रमण फैलने का खतरा है। अस्थमा के मरीज बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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