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है न कमाल...हत्यारोपी जेल से आरटीओ पहुंचकर दे गया एनओसी

Thu, 18 Mar 2021 01:25 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 18 Mar 2021 01:25 AM IST
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Accused reached RTO from jail and gave NOC
संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में दलालों की घुसपैठ और उनका बोलबाला अक्सर महकमे की फजीहत का कारण बनता है। अब ऐसा ही एक और मामला सुर्खियों में है, जिसमें एक ऐसे युवक द्वारा आरटीओ पहुंचकर अपनी मां के नाम सफारी गाड़ी ट्रांसफर होने का अनापत्ति प्रमाण पत्र देना दर्शाया गया है जो जेल में है। सवाल खड़ा हो रहा है कि वह यहां कैसे और किसकी अनुमति से आ गया। उसे आरटीओ में सीन भी कर दिया गया। चूंकि इस फर्जीवाड़े में युवक के जेल में होने का तथ्य छिपाया गया होगा, शायद इसीलिए जेल में निरुद्ध युवक के बजाय दूसरा फोटो सत्यापन/शपथ पत्रावली पर लगाया गया है। फिलहाल मामले में एआरटीओ प्रशासन ने जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।
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वाकया इस तरह से है कि गांधीपार्क डोरी नगर कर्पूरी नगर निवासी नरोत्तम सिंह के नाम से एक सफारी गाड़ी संख्या यूपी 81 एएल 8600 थी। वर्ष 2019 में नरोत्तम की अचानक मृत्यु हो गई। इस पर परिवार ने गाड़ी बेचने के इरादे से उस गाड़ी को पहले नरोत्तम की पत्नी विमलेश के नाम कराने के लिए आरटीओ में वर्ष 2020 में आवेदन किया। इस पर सभी वारिसों की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र दाखिल होने की प्रक्रिया हुई। इस प्रक्रिया के तहत खुद आवेदक विमलेश देवी के अलावा उनका बड़ा बेटा अंकित, छोटा विनय उर्फ विन्नी व एक बेटी की ओर से शपथ पत्र दिए गए। हालांकि कायदे के अनुसार शपथ पत्र व आवेदकों को गाड़ी सहित एक ही दिन आरटीओ में बुलाकर उन्हें सत्यापित कराया जाना चाहिए। मगर यहां चारों को अलग-अलग तारीखों में आरटीओ बुलाकर सत्यापित कराया गया।
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पत्रावली पर अंकित साक्ष्यों के अनुसार विमलेश देवी को 12 मार्च 2020 को, बेटी को 29 मार्च को व बड़े बेटे अंकित को 13 फरवरी को और छोटे बेटे विनय उर्फ विन्नी को 26 सितंबर 2020 में आरटीओ में सशपथ व सशरीर पहुंचकर अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के लिए सत्यापित करना दिखाया गया है। इसके बाद गाड़ी दिसंबर माह में विमलेश देवी के नाम हस्तांतरित हुई और उन्होंने फरवरी माह में मय अनापत्ति प्रमाण पत्र गाड़ी हाथरस के किसी व्यक्ति को बेच दी है।
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आरटीओ जाने से दो माह पहले से जेल में है विनय
इधर, इस मामले में साक्ष्यों के साथ जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के युवा जिलाध्यक्ष तरुण प्रताप चौहान ने आरटीओ को शिकायती पत्र दिया है। इस शिकायत में कहा गया है कि जिस विनय उर्फ विन्नी को सितंबर माह में अपनी मां के नाम गाड़ी ट्रांसफर के लिए एनओसी देने के लिए आना दिखाया गया है। वह विनय उनकी पार्टी के महानगर युवा इकाई के सचिव व डांसर महावीर सिंह उर्फ माही की हत्या में 6 जुलाई 2020 को जेल गया था। माही की क्वार्सी क्षेत्र में रमेश विहार रोड पर दिनदहाड़े उसकी प्रेमिका ने धोखे से बुलाकर विन्नी से हत्या कराई थी। सीसीटीवी में विन्नी हत्या करते हुए कैद पाया गया था, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे जेल भेजा था। फिर वह आरटीओ कैसे पहुंच गया। साथ ही पत्रावली पर विनय के नाम से जो फोटो लगाया गया है, वह भी विनय का फोटो नहीं है। इससे साफ है कि इस मामले में कहीं न कहीं जानबूझकर गड़बड़ी की गई है।
- वैसे किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी पत्नी के नाम गाड़ी ट्रांसफर होनी है तो किसी अन्य वारिसान के अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। क्योंकि पत्नी सबसे प्रबल वारिस मानी जाती है। इस मामले में दलालों के स्तर से स्टाफ को धोखे में रखकर यह कराया गया होगा। क्यों परिवार के अन्य सदस्यों की एनओसी प्रक्रिया पूरी कराई गई यह तो दलाल ही बता सकते हैं। फिर भी जेल से किसी के आने का सवाल है तो इसकी पत्रावली निकलवाकर जांच कराई जाएगी।

- रंजीत सिंह, एआरटीओ प्रशासन
एनओसी देने के बाद बड़े बेटे की मौत हुई
इस मामले में खास बात यह भी है कि फरवरी माह में विनय के बड़े भाई अंकित ने एनओसी आरटीओ पहुंचकर सत्यापित कराई है और उसकी अगस्त माह में मृत्यु हो गई है।
आरटीओ में नया नहीं यह खेल
आरटीओ कार्यालय में यह खेल नया नहीं है। जुलाई 2020 में जवां पुलिस ने इसी तरह से वाहन चोरों का एक गैंग पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर आरटीओ कार्यालय के सामने से एक फर्जी आरटीओ चलता पकड़ा था। जहां से फर्जी रजिस्ट्रेशन, बीमा, नाम ट्रांसफर आदि के कई सैकड़ा प्रपत्र पकड़े थे। उस मामले में भी पांच लोगों को गिरफ्तार किया था और पाया था कि यह लोग फर्जी प्रपत्र तैयार कर आरटीओ कार्यालय से कागजात बनवा लेते हैं।
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