गालिब की 225वीं जयंती: जब ठन गई थी एएमयू के संस्थापक सर सैयद और मिर्जा गालिब में
शायर मिर्जा गालिब की 225वीं जयंती पर उस वाक्ये को भुलाया नहीं जा सकता, जब एएमयू के संस्थापक सर सैय्यद अहमद खान और अजीम शायर मिर्जा गालिब के बीच ठन गई थी। सर सैय्यद मिर्जा गालिब को चचा कहते थे। फिर भी दोनों में मनमुटाव हुए और कई साल बाद वह मनमुटाव दूर हुए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मिर्जा गालिब ऐसे शायर हैं, जिनकी मकबूलियत तकरीबन दो सौ साल बाद भी बनी हुई है। आम लोगों के बीच उनके अनेक शेर मुहावरे की तरह जुमलों में इस्तेमाल होते हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान न सिर्फ गालिब के समकालीन थे, बल्कि इस अजीम शायर से अनूठा रिश्ता भी था। सर सैयद गालिब को चचा कहते और गालिब उन्हें लेखन के बारे में नसीहतें देते। कहते हैं कि शेरो-सुखन के मुद्दे पर सर सैयद और गालिब के बीच तल्खियां भी पैदा हो गई थीं, जिसे बाद में सुलझा लिया गया था।
उर्दू साहित्य में नामचीन शायर मिर्जा गालिब की 225वीं जयंती आज 27 दिसंबर को है। मिर्जा गालिब और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान के बीच गहरा रिश्ता था। दिल्ली में दोनों का घर आसपास था। इस नाते सर सैयद का उनके घर आना-जाना था। सर सैयद मिर्जा गालिब को चचा कहकर बुलाते थे।
सर सैयद ने चचा गालिब कहा तो पूरी दुनिया ने अपना लिया
एएमयू उर्दू एकेडमी के पूर्व निदेशक डॉ. राहत अबरार ने बताया कि मिर्जा गालिब और सर सैयद अहमद खां के बीच परिवारिक संबंध थे। गालिब सर सैयद से 20 साल बड़े थे। इसलिए सर सैयद उन्हें चचा गालिब कहते थे। इसके बाद वह पूरी दुनिया में चचा गालिब नाम से मशहूर हो गए। उन्होंने कहा कि सर सैयद से मुसलमानों की शिक्षा पर गालिब काम लेना चाहते थे। सर सैयद मुसलमानों के इतिहास पर किताब असरारुनसीर लिख रहे थे, जो आईन-ए-अकबरी से प्रेरित थी।
जब भी गालिब से उनकी मुलाकात होती तो वह टोककर आधुनिक शिक्षा पर काम करने के लिए कहते। वर्ष 1855 में मिर्जा गालिब से सर सैयद ने मुलाकात की और उनसे किताब के बारे में शेर लिखने के लिए अनुरोध किया, वह मान गए। फारसी में शेर भी लिखे, लेकिन कुछ शेर ऐसे लिख दिए, जिस पर दोनों में मनमुटाव हो गया। कई साल के बाद सर सैयद ने ही पहल करके मनमुटाव को दूर किया। वर्ष 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद सर सैयद ने आधुनिक शिक्षा पर काम शुरू किया। 1859 में मुरादाबाद में गुलशन नाम से स्कूल खोला। वर्ष 1861 में गाजीपुर में विक्टोरिया स्कूल शुरू किया। वर्ष 1863 में साइंस सोसाइटी की स्थापना की।
मिर्जा गालिब
मृत्यु : 15 फरवरी 1869 दिल्ली
मिर्जा गालिब के किरदार में नजर आए थे अलीगढ़ के जॉनी फॉस्टर
आगरा में जन्मे उर्दू और फारसी के मशहूर शायर मिर्जा गालिब की जिंदगी पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनी। इसमें एएमयू के पूर्व छात्र मुजतेजाब मलिक के निर्देशन में एएमयू के पूर्व छात्र, शायर और संगीतकार जॉनी फॉस्टर ने मिर्जा गालिब का किरदार निभाया है। जॉनी ने बताया कि इस 45 मिनट के फिल्म में गालिब की शायरी और उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं पर बारीकी से रोशनी डाली गई है। फिल्म की शूटिंग में अलीगढ़ व नुमाइश का दरबार हॉल और दिल्ली में हुई है। जॉनी गालिब के उसी गेटअप में फिल्माए गए हैं, जिसमें उनकी छवि फिल्मों और किताबों में दिखाई देती है।
गालिब के साहित्य पर सात से ज्यादा शोध
अलीगढ़। एएमयू के उर्दू विभाग में मिर्जा गालिब के साहित्य पर पांच शोध हो चुके हैं। दो शोधार्थी शोध कर रहे हैं। उधर, प्रो. खुर्शीद उल इस्लाम ने मिर्जा गालिब पर आलोचनात्मक लेख लिखे थे। प्रो. परमानंद शास्त्री ने मिर्जा गालिब के गजल का अनुवाद संस्कृत में किया था।