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रक्षाबंधन के दिन खुशाली को नहीं भूलती शाहजहां
Aligarh
Updated Mon, 11 Aug 2014 05:30 AM IST
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सोल्डर...
कच्चे धागे के मजबूत रिश्ते, स्नेह व विश्वास की अद्भुत मिसाल
हेडिंग...
अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। भाई-बहन के अटूट प्रेम एवं स्नेह का त्योहार होता है रक्षाबंधन। महानगर के पला साहिबाबाद में लोग पिछले 24 साल से इस अटूट बंधन की अनुपम मिसाल देखते आ रहे हैं। ये भाई-बहन एक मां के पेट से पैदा नहीं हुए, लेकिन इनका आपसी प्यार व स्नेह किसी सहोदर भाई-बहन से कम नहीं है। वर्ष 1990 में अलीगढ़ में कुछ समय के लिए सांप्रदायिकता की काली छाया रही। वातावरण में असुरक्षा एवं आशंका का माहौल था। पला साहिबाबाद में परिवार के साथ शाहजहां रहती थी। मोहल्ले के ही खुशाली उर्फ सीताराम व शाहजहां के परिवार के बीच अच्छे ताल्लुकात थे। पूर्व से रक्षाबंधन के दिन शाहजहां खुशाली को राखी बांधकर व टीके लगाकर उनके सुखमय जीवन की दुआ करती थी। उस विकट दौर में खुशाली ने ‘कच्चे धागे’ के मजबूत रिश्तों को निभाया और शाहजहां के पूरे परिवार को सुरक्षित जमालपुर पहुंचाने में मदद की। इस घटना के बाद भाई-बहन का प्यार व स्नेह और सघन होता चला गया। रक्षाबंधन के दिन शाहजहां 24 साल से अपने भाई को नहीं भूलती है।
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कच्चे धागे के मजबूत रिश्ते, स्नेह व विश्वास की अद्भुत मिसाल
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अमर उजाला ब्यूरो
अलीगढ़। भाई-बहन के अटूट प्रेम एवं स्नेह का त्योहार होता है रक्षाबंधन। महानगर के पला साहिबाबाद में लोग पिछले 24 साल से इस अटूट बंधन की अनुपम मिसाल देखते आ रहे हैं। ये भाई-बहन एक मां के पेट से पैदा नहीं हुए, लेकिन इनका आपसी प्यार व स्नेह किसी सहोदर भाई-बहन से कम नहीं है। वर्ष 1990 में अलीगढ़ में कुछ समय के लिए सांप्रदायिकता की काली छाया रही। वातावरण में असुरक्षा एवं आशंका का माहौल था। पला साहिबाबाद में परिवार के साथ शाहजहां रहती थी। मोहल्ले के ही खुशाली उर्फ सीताराम व शाहजहां के परिवार के बीच अच्छे ताल्लुकात थे। पूर्व से रक्षाबंधन के दिन शाहजहां खुशाली को राखी बांधकर व टीके लगाकर उनके सुखमय जीवन की दुआ करती थी। उस विकट दौर में खुशाली ने ‘कच्चे धागे’ के मजबूत रिश्तों को निभाया और शाहजहां के पूरे परिवार को सुरक्षित जमालपुर पहुंचाने में मदद की। इस घटना के बाद भाई-बहन का प्यार व स्नेह और सघन होता चला गया। रक्षाबंधन के दिन शाहजहां 24 साल से अपने भाई को नहीं भूलती है।