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किसान बन लेखपाल ने लूटा वजीफा
Aligarh
Updated Tue, 05 Feb 2013 05:30 AM IST
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इगलास। तहसील में तैनात एक लेखपाल का फर्जीवाड़े से खुद को किसान दिखाकर कम आय का प्रमाणपत्र तैयार करा लिया। इतना ही नहीं उसके बेटा और बेटी ने हजारों रूपये की छात्रवृत्ति भी ले ली। तहसीलदार ने उसका प्रमाणपत्र निरस्त कराकर जांच शुरू कर दी है।
तहसील के गांव रजावल निवासी रमेश चंद्र पुत्र गनेशी लाल तहसील में लेखपाल के पद पर तैनात है। लेखपाल का एक बेटा मथुरा के इंजीनियरिंग कॉलेज में तथा बेटी गाजियाबाद में ग्रेजुएशन कर रही है। दोनों बच्चों को वजीफा दिलाने के लिए उसने खुद की नौकरी को छिपाकर किसान बताते हुए फर्जी तरीके से आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिये प्रार्थनापत्र दे दिया। लेखपाल ने फर्जी तरीके से इलाका लेखपाल व राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट तैयार करके तहसीलदार से भी 84 हजार वार्षिक आय का प्रमाणपत्र तैयार कराकर हस्ताक्षर करा लिये। 23 अगस्त 2012 को उसने अपना प्रमाणपत्र तैयार करा लिया। चर्चा है कि वह उसके दोनों बच्चों ने बेटों ने छात्रवृत्ति भी ले ली। सूत्रों की मानें तो लेखपाल का गांव राजस्व निरीक्षक हसनगढ़ में पड़ता है किंतु रिपोर्ट पर राजस्व निरीक्षक गोरई की सील लगाकर हस्ताक्षर भी मानिक चंद्र के कर लिये हैैं। इस संबंध में तहसीलदार दर्शन सिंह का कहना है कि प्रमाणपत्र को निरस्त करके जांच कराई जा रही है। चर्चा यह भी है कि तहसील के कुछ अन्य कर्मचारी भी इस तरह का फर्जीवाड़ा कर चुके हैं।
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तहसील के गांव रजावल निवासी रमेश चंद्र पुत्र गनेशी लाल तहसील में लेखपाल के पद पर तैनात है। लेखपाल का एक बेटा मथुरा के इंजीनियरिंग कॉलेज में तथा बेटी गाजियाबाद में ग्रेजुएशन कर रही है। दोनों बच्चों को वजीफा दिलाने के लिए उसने खुद की नौकरी को छिपाकर किसान बताते हुए फर्जी तरीके से आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिये प्रार्थनापत्र दे दिया। लेखपाल ने फर्जी तरीके से इलाका लेखपाल व राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट तैयार करके तहसीलदार से भी 84 हजार वार्षिक आय का प्रमाणपत्र तैयार कराकर हस्ताक्षर करा लिये। 23 अगस्त 2012 को उसने अपना प्रमाणपत्र तैयार करा लिया। चर्चा है कि वह उसके दोनों बच्चों ने बेटों ने छात्रवृत्ति भी ले ली। सूत्रों की मानें तो लेखपाल का गांव राजस्व निरीक्षक हसनगढ़ में पड़ता है किंतु रिपोर्ट पर राजस्व निरीक्षक गोरई की सील लगाकर हस्ताक्षर भी मानिक चंद्र के कर लिये हैैं। इस संबंध में तहसीलदार दर्शन सिंह का कहना है कि प्रमाणपत्र को निरस्त करके जांच कराई जा रही है। चर्चा यह भी है कि तहसील के कुछ अन्य कर्मचारी भी इस तरह का फर्जीवाड़ा कर चुके हैं।
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