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अविश्वास प्रस्ताव से नहीं झुलसेगा बजट
Updated Thu, 22 Jun 2017 11:31 PM IST
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अविश्वास प्रस्ताव की आंच में नहीं झुलसेगी जिला योजना
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की आंच में जिला योजना नहीं झुलसेगी। डीएम ने इस मामले में मिलने पहुंचे अध्यक्ष विरोधी धड़े को जिला योजना पास होने तक इस विषय पर किसी चर्चा से इंकार दिया है।
इसके साथ ही 24 जून को प्रभारी मंत्री सुरेश राणा की अध्यक्षता में होने वाली जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में अध्यक्ष की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है।
वर्ष 2017-18 की जिला योजना नियमानुसार 17 जनवरी 2017 तक अनुमोदित हो जानी थी लेकिन पहले विधानसभा चुनाव आचार संहिता और उसके बाद वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ धड़ेबंदी के चलते यह अब तक लटकी हुई है।
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दैनिक ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को जोर शोर से प्रकाशित किया था। 24 जून को जिला पंचायत के पंत सभागार में होने जा रही जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में जिला योजना पास होने की तैयारियां जोर शोर से चल रही थी।
लेकिन इस बीच अध्यक्ष के विरोधी धड़ों की सक्रियता ने प्रशासनिक मशीनरी के होश उड़ा दिए थे। माना जा रहा था कि विरोधी धड़ा बोर्ड बैठक में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है।
ऐसे में जिला योजना का एक बार फिर लटकना तय था। गुरुवार को विरोधी खेमे के लोग अविश्वास प्रस्ताव के मसले पर डीएम से मिले। लेकिन डीएम ने साफ कह दिया कि पहले बैठक होगी, उसके बाद कोई चर्चा होगी।
जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने यह स्वीकार किया है कि जिला पंचायत के कुछ लोग उनसे मिले थे और अविश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी।
अब पास नहीं होगी तो पड़ जाएंगे लेने के देने
चुनाव और धड़ेबंदी के चक्कर में जिला योजना पहले ही छह माह लेट हो चुकी है। ऐसे में जब प्रदेश के करीब 60 जिलों में जिला योजना पास होकर उसके लिए शासन स्तर से बजट भी जारी हो चुका है तो अब तक इससे वंचित जिलों के बजट में कटौती का खतरा मंडरा रहा है।
जानकारों का मानना है कि यदि और देरी हुई और सरकार ने जिला योजना का बजट किसी और मद में खर्च कर डाला तो जिले को नाममात्र का बजट ही मिल पाएगा। इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर जिले के विकास पर पड़ना तय है।
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की आंच में जिला योजना नहीं झुलसेगी। डीएम ने इस मामले में मिलने पहुंचे अध्यक्ष विरोधी धड़े को जिला योजना पास होने तक इस विषय पर किसी चर्चा से इंकार दिया है।
इसके साथ ही 24 जून को प्रभारी मंत्री सुरेश राणा की अध्यक्षता में होने वाली जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में अध्यक्ष की कुर्सी पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है।
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वर्ष 2017-18 की जिला योजना नियमानुसार 17 जनवरी 2017 तक अनुमोदित हो जानी थी लेकिन पहले विधानसभा चुनाव आचार संहिता और उसके बाद वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष उपेंद्र सिंह नीटू के खिलाफ धड़ेबंदी के चलते यह अब तक लटकी हुई है।
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दैनिक ‘अमर उजाला’ ने इस मुद्दे को जोर शोर से प्रकाशित किया था। 24 जून को जिला पंचायत के पंत सभागार में होने जा रही जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में जिला योजना पास होने की तैयारियां जोर शोर से चल रही थी।
लेकिन इस बीच अध्यक्ष के विरोधी धड़ों की सक्रियता ने प्रशासनिक मशीनरी के होश उड़ा दिए थे। माना जा रहा था कि विरोधी धड़ा बोर्ड बैठक में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है।
ऐसे में जिला योजना का एक बार फिर लटकना तय था। गुरुवार को विरोधी खेमे के लोग अविश्वास प्रस्ताव के मसले पर डीएम से मिले। लेकिन डीएम ने साफ कह दिया कि पहले बैठक होगी, उसके बाद कोई चर्चा होगी।
जिलाधिकारी ऋषिकेश भास्कर याशोद ने यह स्वीकार किया है कि जिला पंचायत के कुछ लोग उनसे मिले थे और अविश्वास प्रस्ताव प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी।
अब पास नहीं होगी तो पड़ जाएंगे लेने के देने
चुनाव और धड़ेबंदी के चक्कर में जिला योजना पहले ही छह माह लेट हो चुकी है। ऐसे में जब प्रदेश के करीब 60 जिलों में जिला योजना पास होकर उसके लिए शासन स्तर से बजट भी जारी हो चुका है तो अब तक इससे वंचित जिलों के बजट में कटौती का खतरा मंडरा रहा है।
जानकारों का मानना है कि यदि और देरी हुई और सरकार ने जिला योजना का बजट किसी और मद में खर्च कर डाला तो जिले को नाममात्र का बजट ही मिल पाएगा। इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर जिले के विकास पर पड़ना तय है।