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स्पीड गवर्नर बिक्री करने वाले कर रहे टैक्स की चोरी
Updated Sun, 30 Sep 2018 01:56 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
आरटीओ कार्यालय में स्पीड गवर्नर के नाम पर न केवल अवैध वसूली हो रही है, बल्कि अधिकारियों की नाक के नीचे टैक्स की चोरी भी खुलेआम हो रही है। इसके कारण वाहन स्वामी अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है। स्पीड गवर्नर लगाने वाली लोग वाहन स्वामी को रसीद तक नहीं दे रहे हैं। अज्ञानता के कारण वाहन स्वामी भी बिना रसीद के ही स्पीड गवर्नर लगवाकर टैक्स चोरी करने वालों का सहयोग कर रहे हैं।
केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश के जिलों में परिवहन यान में स्पीड गर्वनर (गति नियंत्रण उपकरण) लगाने का जोरों पर है। अलीगढ़ में आधी अधूरी तैयारी के साथ ही अधिकारियों ने इसे वाहनों में लगाने के निर्देश जारी कर दिए। इसी की नतीजा है कि गति नियंत्रण उपकरण की बिक्री पर अवैध वसूली होना शुरू हो गया। यहां तक कि इस उपकरण को लगाने वाले लोग वाहन स्वामी को रसीद तक नहीं दे रहे हैं। इससे टैक्स की खुलेआम चोरी हो रही है। उपकरण किस कंपनी का है उसे वाहन में लगाने की अनुमति है या नहीं अधिकारी यह भी नहीं देख रहे हैं। स्वयं संभागीय निरीक्षक अब तक करीब 50 वाहनों में स्पीड गवर्नर लग चुका है।
जबकि लोगों का कहना है कि स्पीड गवर्नर उन्हीं वाहनों में लगाया जा रहाहै जो लोग सीधे अपने वाहन की फिटनेस के लिए आ रहे हैं। एजेंट के द्वारा आने वाले वाहन स्वामियों के वाहनों की बिना स्पीड गवर्नर के ही फिटनेस की जा रही है। फिलहाल तो लोग अपने वाहन की फिटनेस कराकर जा रहे हैं, लेकिन कुछ दिन बाद जब चेकिंग होगी तो उन्हें मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।
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सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव राजेश सैनी ने बताया कि शनिवार को वह अपनी मिनी बस की फिटनेस के लिए गए। उन्होंने बस में स्पीड गवर्नर लगवाया। स्पीड गवर्नर लगाने वाले व्यक्ति से जब उन्होंने रसीद मांगी तो वह बंगले झांकने लगा। दबाव देने पर वह उपकरण को वापस करने को तो तैयार हो गया, लेकिन रसीद नहीं दी। इससे टैक्स की खुलेआम चोरी हो रही है। अधिकारी अपनी नाक के नीचे राजस्व को चूना लगा रहे हैं।
क्या है स्पीड गवर्नर/गति नियंत्रण उपकरण
- एक ऐसा उपकरण है जो कि इंजन में किया जा रहा है। उपकरण में जो स्पीड फीड की गई है यदि गाड़ी उससे अधिक गति से दौड़ेगी तो इंजन बंद (ट्रिप) हो जाएगा। इसके लगने के बाद चालक गाड़ी को तयशुदा स्पीड के अंदर ही दौड़ाएगा।
60 और 80 से अधिक नहीं दौड़ पाएंगे कॉमर्शियल वाहन
- स्पीड गवर्नर लगने के बाद डंफर, बस, टैंकर, तेल के टैंकर, स्कूल बस 60 की स्पीड से अधिक नहीं दौड़ पाएगी। यदि चालक ने इन्हें 60 से ऊपर दौड़ाने का प्रयास किया तो इंजन बंद हो जाएगी। इसके अलावा अन्य कॉमर्शियल वाहनों में 80 की स्पीड फीड की जा रही है।
स्पीड गवर्नर लगाने के लिए कई कंपनी के आवेदन आए हैं। किस कंपनी को उपकरण लगाने की जिम्मेदारी देनी है यह एआरटीओ (प्रशासन) रंजीत सिंह देख रहे हैं। अभी तक करीब चार लोगों को पंजीकृत कर दिया गया है। यदि पंजीकृत कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी का स्पीड गवर्नर लगा हुआ तो गाड़ी की फिटनेस नहीं होगी। हमारा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा कंपनी को उपकरण लगाने के लिए पंजीकृत कर सके ताकि इसकी कीमत कम हो सके।
राधेश्याम, आरटीओ
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आरटीओ कार्यालय में स्पीड गवर्नर के नाम पर न केवल अवैध वसूली हो रही है, बल्कि अधिकारियों की नाक के नीचे टैक्स की चोरी भी खुलेआम हो रही है। इसके कारण वाहन स्वामी अपने को ठगा सा महसूस कर रहा है। स्पीड गवर्नर लगाने वाली लोग वाहन स्वामी को रसीद तक नहीं दे रहे हैं। अज्ञानता के कारण वाहन स्वामी भी बिना रसीद के ही स्पीड गवर्नर लगवाकर टैक्स चोरी करने वालों का सहयोग कर रहे हैं।
केंद्र सरकार के निर्देश पर प्रदेश के जिलों में परिवहन यान में स्पीड गर्वनर (गति नियंत्रण उपकरण) लगाने का जोरों पर है। अलीगढ़ में आधी अधूरी तैयारी के साथ ही अधिकारियों ने इसे वाहनों में लगाने के निर्देश जारी कर दिए। इसी की नतीजा है कि गति नियंत्रण उपकरण की बिक्री पर अवैध वसूली होना शुरू हो गया। यहां तक कि इस उपकरण को लगाने वाले लोग वाहन स्वामी को रसीद तक नहीं दे रहे हैं। इससे टैक्स की खुलेआम चोरी हो रही है। उपकरण किस कंपनी का है उसे वाहन में लगाने की अनुमति है या नहीं अधिकारी यह भी नहीं देख रहे हैं। स्वयं संभागीय निरीक्षक अब तक करीब 50 वाहनों में स्पीड गवर्नर लग चुका है।
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जबकि लोगों का कहना है कि स्पीड गवर्नर उन्हीं वाहनों में लगाया जा रहाहै जो लोग सीधे अपने वाहन की फिटनेस के लिए आ रहे हैं। एजेंट के द्वारा आने वाले वाहन स्वामियों के वाहनों की बिना स्पीड गवर्नर के ही फिटनेस की जा रही है। फिलहाल तो लोग अपने वाहन की फिटनेस कराकर जा रहे हैं, लेकिन कुछ दिन बाद जब चेकिंग होगी तो उन्हें मुसीबत का सामना करना पड़ेगा।
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सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव राजेश सैनी ने बताया कि शनिवार को वह अपनी मिनी बस की फिटनेस के लिए गए। उन्होंने बस में स्पीड गवर्नर लगवाया। स्पीड गवर्नर लगाने वाले व्यक्ति से जब उन्होंने रसीद मांगी तो वह बंगले झांकने लगा। दबाव देने पर वह उपकरण को वापस करने को तो तैयार हो गया, लेकिन रसीद नहीं दी। इससे टैक्स की खुलेआम चोरी हो रही है। अधिकारी अपनी नाक के नीचे राजस्व को चूना लगा रहे हैं।
क्या है स्पीड गवर्नर/गति नियंत्रण उपकरण
- एक ऐसा उपकरण है जो कि इंजन में किया जा रहा है। उपकरण में जो स्पीड फीड की गई है यदि गाड़ी उससे अधिक गति से दौड़ेगी तो इंजन बंद (ट्रिप) हो जाएगा। इसके लगने के बाद चालक गाड़ी को तयशुदा स्पीड के अंदर ही दौड़ाएगा।
60 और 80 से अधिक नहीं दौड़ पाएंगे कॉमर्शियल वाहन
- स्पीड गवर्नर लगने के बाद डंफर, बस, टैंकर, तेल के टैंकर, स्कूल बस 60 की स्पीड से अधिक नहीं दौड़ पाएगी। यदि चालक ने इन्हें 60 से ऊपर दौड़ाने का प्रयास किया तो इंजन बंद हो जाएगी। इसके अलावा अन्य कॉमर्शियल वाहनों में 80 की स्पीड फीड की जा रही है।
स्पीड गवर्नर लगाने के लिए कई कंपनी के आवेदन आए हैं। किस कंपनी को उपकरण लगाने की जिम्मेदारी देनी है यह एआरटीओ (प्रशासन) रंजीत सिंह देख रहे हैं। अभी तक करीब चार लोगों को पंजीकृत कर दिया गया है। यदि पंजीकृत कंपनी के अलावा किसी अन्य कंपनी का स्पीड गवर्नर लगा हुआ तो गाड़ी की फिटनेस नहीं होगी। हमारा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा कंपनी को उपकरण लगाने के लिए पंजीकृत कर सके ताकि इसकी कीमत कम हो सके।
राधेश्याम, आरटीओ