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Aligarh: माननीयों ने खोले निधि के दरवाजे, 9 करोड़ से बना डाले 75 स्वागत द्वार, इस पर सीएम भी बोल गए यह

Thu, 07 Aug 2025 02:49 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Thu, 07 Aug 2025 02:49 PM IST
सार

अलीगढ़ आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कलेक्ट्रेट में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहा था कि शहर में स्वागत द्वार काफी संख्या में बनाए गए हैं। इनकी धनराशि अगर नाली और सड़क निर्माण में खर्च की जाती तो यह जनता के लिए अधिक उपयोगी साबित होता।

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75 welcome gates made with 9 crore rupees
रसलगंज चौराहे पर लगा स्वागत द्वार - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ महानगर से गुजरने वाला हाईवे हो या फिर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग। आपको हर विधानसभा क्षेत्र में स्वागत द्वार दिख ही जाएगा। अलीगढ़ जिले में तो भरमार है। इन सभी द्वारों का निर्माण विधायक निधि से कराया गया है। पिछले 18 वर्षों में अलग-अलग पार्टियों की सरकार में 75 स्वागत द्वार जिले में बने हैं। एक द्वार पर करीब 12 लाख की लागत आई है। इस हिसाब से 9 करोड़ रुपये द्वार बनाने पर ही खर्च कर दिए गए ।

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अगर महानगर की ही बात करें तो स्वागत द्वार बारहद्वारी, मसूदाबाद चौराहा, गांधी पार्क बस स्टैंड, जेल रोड, कलेक्ट्रेट के सामने, रामघाट रोड, सासनी गेट, सूतमिल चौराहा, एटा चुंगी रोड, रघुवीर पुरी, गूलर रोड, देहली गेट, मैरिस रोड आदि स्थानों पर बनाए गए हैं। इनका निर्माण विधायकों के प्रस्ताव पर उनकी निधि से कराया गया है। करीब बीस स्वागत द्वार अभी और बनाने की तैयारी की जा रही है।

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हमने मौजूदा कार्यकाल में किसी भी गेट का प्रस्ताव नहीं दिया है। न कोई गेट बनवाया है। सारी निधि निर्माण, शिक्षा और जनकल्याण वाले कार्यों में ही खर्च हुई है।- मुक्ता राजा, विधायक शहर विधानसभा

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स्वागत द्वार जनता की मांग पर उस समाज के महापुरुषों को सम्मान देने के लिए बनाए जाते हैं। मैंने 80 फीसदी निधि विकास कार्यों पर खर्च की है। अभी फिलहाल किसी स्वागत द्वार का प्रस्ताव नहीं हैं। - अनिल पाराशर, विधायक कोल विधानसभा
विधायक निधि से स्वागत द्वार बनवाए गए हैं। चौड़ाई के हिसाब से कीमत कम ज्यादा होती रहती है। यह विधायकों का ही प्रस्ताव रहता है। - भालचंद्र त्रिपाठी, परियोजना निदेशक
स्वागत द्वार तब लगाए जाते हैं जब संबंधित सड़क वाले विभाग की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल जाता है। इससे पहले कोई द्वार नहीं लगाया जाता है। - संजीव रंजन, डीएम

स्वागत द्वार पर खर्च धनराशि से लग जातीं 20 हजार लाइट, 6 हजार हैंडपंप

9 करोड़ रुपये की धनराशि से शहर में 35 वार्ड में 30 वाट की 20 हजार लाइटें लग सकती हैं। 6 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप लग सकते हैं। इसके अलावा 30 मिनी नलकूप लग सकते हैं। 7.5 किलोमीटर की सीसी सड़क बन सकती है। 15 किलोमीटर तारकोल की सड़क बन सकती है (चौड़ाई 3.75 मीटर)। 18 स्कूलों का भवन भी बन सकता है।
स्वागत द्वार
यह कहा था मुख्यमंत्री ने
5 अगस्त को अलीगढ़ आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कलेक्ट्रेट में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहा था कि शहर में स्वागत द्वार काफी संख्या में बनाए गए हैं। इनकी धनराशि अगर नाली और सड़क निर्माण में खर्च की जाती तो यह जनता के लिए अधिक उपयोगी साबित होता। उन्होंने कहा था कि विधायक निधि का प्रयोग जनहित के कार्यों में किया जाए।

इन कस्बों में भी बनाए गए द्वार

छर्रा, अतरौली, खैर, गभाना, जवां, कौड़ियागंज, पिलखना, अकराबाद, विजयगढ़, मडराक, इगलास, गोंडा और जट्टारी के प्रमुख रास्तों पर स्वागत द्वार लगाए गए हैं। अधिकांश स्वागत द्वार महापुरुषों के नाम पर हैं। कुछ कस्बे तो ऐसे हैं जहां तीन चार द्वार बनाए गए हैं। कई कस्बों में तो नगर पंचायत और नगरपालिकाओं द्वारा भी स्वागत द्वार का निर्माण कराया गया है।
स्वागत द्वार
बसपा शासन काल में बने आठ गेट
बसपा शासन काल में सन 2007 से लेकर सन 2012 तक कुल आठ स्वागत गेट लगाए गए थे। बसपा के पूर्व मंत्री चौ. महेंद्र सिंह कहते हैं कि जहां पर बेहद आवश्यक था वहीं पर जनता की मांग पर गेट लगाए गए। अधिकांश निधि का पैसा जनता के उपयोग के कामों पर खर्च किया गया।

समाजवादी पार्टी के शासन में बने 12 गेट

सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष बाबा फरीद आजाद कहते हैं कि सपा शासन काल में 20012 से लेकर 2017 तक 12 स्वागत द्वार ही जिले में बने। इनमें से कोल विधानसभा से पूर्व विधायक हाजी जमीरउल्लाह ने अपने दोनों कार्यकाल में सिर्फ दो स्वागत द्वार ही बनवाए। इनमें से एक द्वार स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन अब्बास अली के नाम पर बनाया था।
स्वागत द्वार
निधि के दुरुपयोग पर सीएम की प्रतिक्रिया सही
मुख्यमंत्री योगी के विधायकों की निधि के दुरुपयोग पर की गई टिप्पणी का सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षपाल सिंह ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि प्रमुख मार्गों, चौराहों और तिराहों पर विधायक निधि से निर्मित स्वागत द्वारों और स्मृति द्वारों पर पैसे खर्च करने की बजाय निधि का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, नाली, बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्होंने और एएमयू के प्रोफेसर ऋषिपाल सिंह ने लगभग तीन साल पहले मुख्यमंत्री को विधायकों द्वारा निधि के दुरुपयोग के बारे में अवगत कराया था, और अब यह कहावत देर आयद दुरुस्त आयद चरितार्थ हो रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि स्थानीय निकायों में प्राप्त धनराशि का हो रहे इस तरह के बंदरबांट को तुरंत रोका जाए।

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