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बीएससी के छात्र ने नौकरी के नाम पर दो हजार लोगों से 70 लाख ठगे

Sat, 14 Sep 2019 12:42 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 14 Sep 2019 12:42 AM IST
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70 lakh rupees cheated from two thousands people name of  the job
क्वार्सी पुलिस द्वारा पकड़े गये नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य। - फोटो : CITY OFFICE
महानगर के क्वार्सी इलाके की जनकपुरी पानी टंकी के पास वाहन चेकिंग के दौरान शुक्रवार को थाना पुलिस ने एक साइबर फ्राड गिरोह के तीन सदस्यों को दबोचा। गिरोह का सरगना एक बीएससी का छात्र है, जिसने पिछले डेढ़ साल में दो हजार से अधिक बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर 70 लाख रुपये से अधिक की ठगी की। शमशाद मार्केट में संचालित एक वेब डिजाइनिंग के ऑफिस से गिरोह का संचालन होता था। गिरोह में नौकरी दिलाने का दावा करने वाली आनलाइन वेबसाइट शाइन डाट कॉम के एक अधिकारी से 40 हजार रुपये माह में खरीदने का भी खुलासा हुआ है। पकड़े गए दो शातिरों के पास से पुलिस ने दो चोरी के वाहन भी बरामद किए हैं। तीनों शातिरों को सुसंगत धाराओं में पाबंद कर जेल भेज दिया है।
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एसपी क्राइम डा. अरविंद कुमार ने एसएसपी कार्यालय में प्रेसवार्ता कर गिरोह का खुलासा करते हुए बताया कि थाना क्वार्सी पुलिस की एक टीम जनपकपुरी पानी टंकी के पास वाहन चेकिंग कर रही थी, तभी एक बाइक और एक स्कूटी पर तीन युवक आते दिखे। तीनों को रोककर पूछताछ की तो इनके पास वाहनों के दस्तावेज नहीं मिले। साथ ही एक से बैग मिला, जिसमें सात मोबाइल फोन, 17 सिम कार्ड, 18 रेपर, 2 मोहर, एक चैक, 26 आधार कार्ड मिले।
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थाने लाकर युवकों से पूछताछ की तो उन्होंने अपनी पहचान कमरुद्दीन उर्फ जैदी पुत्र शमशुद्दीन निवासी शहंशाबाद गली-4, क्वार्सी, राजा पुत्र अब्दुल कदीर निवासी मौलाना आजाद नगर, गली-4, क्वार्सी और मोनू पुत्र मोहम्मद अली निवासी मौलाना आजाद नगर, गली-5, क्वार्सी के तौर पर बताई। साथ ही वाहन चोरी की बात कुबूल की।
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गिरोह सरगना कमरुद्दीन ने बताया कि वह बीएससी का छात्र है। शमशाद मार्केट में डायरल टेक्नालॉजी के नाम से वेबसाइट डिजाइनिंग का ऑफिस है। वहीं से वह एक ठगी का गिरोह संचालित करता है। जो कि बेरोजगार युवाओं को संपर्क कर नौकरी दिलाने का झांसा देकर पंजीकरण के नाम पर दो से दस हजार रुपये तक की ठगी करता है। लोगों से संपर्क करने के लिए करीब 150 सिम कार्डों का इस्तेमाल किया जाता है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित अन्य दूर के प्रदेशों के दो हजार से अधिक बेरोजगार युवाओं से 70 लाख की ठगी अब तक की जा चुकी है।
40 हजार रुपये प्रतिमाह देकर खरीदते थे बेरोजगारों का डाटा
एसपी क्राइम के अनुसार शातिर गिरोह का रैकेट के तार दिल्ली से भी जुडे़ हैं। बेरोजगारों को नौकरी दिलाने का दावा करने वाली आनलाइन वेबसाइट शाइन डाट कॉम के सेल्स विभाग के गौरव नाम के युवक से कमरु द्दीन का संपर्क है। कमरुद्दीन 40 हजार रुपये प्रतिमाह देकर गौरव से बेरोजगार युवक-युवतियों का डाटा लेता था। गौरव कंपनी से डाटा चोरी कर गिरोह को उपलब्ध कराता था। दूसरी ओर दिल्ली का ही रहने वाला एक फरहान नाम का युवक 500 से 1000 रुपये लेकर एक टेलीकॉम कंपनी की सिमें गिरोह का उपलब्ध कराता था। अब तक गिरोह करीब 150 सिमों को खरीद चुका था।
गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बेरोजगारों को बनाया शिकार
शातिर गिरोह सरगना कमरुद्दीन ने बताया कि वह गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बेरोजगारों को शिकार बनाता था। इतनी दूर के होने के चलते वह लोग ठगी का शिकार होने के बाद भी पुलिस से शिकायत नहीं कर पाते थे। एसपी क्राइम के अनुसार महाराष्ट्र के अहमदनगर के रहने वाले किशोर मधुकर ने कमरुद्दीन के खिलाफ नौकरी के नाम पर 9 हजार की ठगी करने की एफआईआर दर्ज करा रखी है। किशोर मधुकर से संपर्क हो गया है। अन्य पीड़ितों से भी संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।
ऑफिस पर ताला ठोक भागा गिरोह का एक शातिर
ठगी के गिरोह से पूछताछ के बाद हरकत में आई पुलिस ने शमशाद मार्केट स्थित डायरल टेक्नालॉजी ऑफिस पर छापामार कार्रवाई की। मगर, पूछताछ में सामने आया एक अन्य शातिर अब्दुल हासिम निवासी नगला पटवारी पुलिस के पहुंचने से पहले ही किसी प्रकार से भनक पाने पर ऑफिस पर ताला ठोककर फरार हो गया। पुलिस ने ताले तोड़कर कम्प्यूटरों को खंगाला तो सारा डाटा डिलीट मिला। हालांकि पुलिस ने हार्ड डिस्कों को कब्जे में ले लिया है और डाटा रिकवर करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
छह माह की नौकरी में बन गया ‘नटवरलाल’
ठगी का मास्टमाइंड कमरुद्दीन बीएससी का छात्र है। 23 वर्ष की उम्र में ही इसके दिमाग में नटवरलाल बनने की सनक चढ़ गई। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि कमरुद्दीन की अंग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ है। साथ ही दिमाग से शातिर होने के साथ ही पढ़ाई लिखाई में भी तेज तरार है। इसी काबिलियत के बूते उसने दो साल पहले शाइन डाट कॉम में नौकरी हासिल की। वहां युवक-युवतियों का डाटा मिलने पर उनसे फोन पर नौकरी के संबंध में बातचीत करता था।

इसी दौरान उसके दिमाग में खुद की एक इसी प्रकार की कंपनी बनाने का आइडिया आया। मगर, वह ठगी की दुनिया में आगे बढ़ गया। इस काम को अंजाम देने के लिए वह अलीगढ़ वापस आ गया। यहां आकर उसने अपने ही इलाके के कई लड़कों को मोटी तनख्वाह देने की एवज में गिरोह में शामिल किया। यह लड़के ठगी की वारदात के साथ ही चोरी की वारदातों को भी अंजाम देने लगे। इधर, दिन प्रतिदिन कमरुद्दीन बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाता चला गया।
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