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एक ऐसा स्कूल, जहां बच्चे आना गए भूल

Mon, 26 Nov 2018 02:03 AM IST
Updated Mon, 26 Nov 2018 02:03 AM IST
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एक ऐसा स्कूल, जहां बच्चे आना गए भूल
डेस्क न्यूज, अमर उजाला, अलीगढ़
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उस्मान पाड़ा स्थित बालक पाठशाला संख्या 18 का रास्ता यहां के पंजीकृत बच्चे भूल गए हैं। यह स्कूल मात्र पांच बच्चों पर ही संचालित हो रहा है। जबकि यहां 48 बच्चे पंजीकृत हैं। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को इस स्कूल की पड़ताल की। इस दौरान पता चला कि विद्यालय परिसर में जगह न होने, कक्षाओं तक ब्राइट के कारखाने से होकर गुजरने के कारण पढ़ाई का माहौल नहीं है। इस कारण अभिभावक बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल ही नहीं भेजते हैं। प्रधानाध्यापक अपनी नौकरी बचाने के लिए जैसे-तैसे घर जाकर बच्चों को विद्यालय लेकर आते हैं। मंगलवार को प्रधानाध्यापक की छुट्टी के कारण यहां एक शिक्षिका मौजूद थीं। जबकि बच्चे नदारद थे। गुरुवार को पांच बच्चे ही स्कूल पढ़ने आए हुए थे। शुक्रवार अवकाश के बाद शनिवार को भी यहां पांच बच्चे ही पढ़ने आए हुए थे।

ख्वाजा चौक से हबीब पेंटर वाली गली स्थित बालक पाठशाला संख्या 18 तक पहुंचना किसी रहस्य से कम नहीं है। इसका कारण है कि यह विद्यालय एक घर के अंदर संचालित होता है। विद्यालय के लिए कोई भी सांकेतिक पट्टिका व स्कूल की दीवार पर भी कोई संकेत मौजूद नहीं है। इसी विद्यालय के बाहर वाले कमरे में ब्राइट का कारखाना चलता है। इस कारखाने में बिजली के लिए साढ़े दस किलोवाट का जेनरेटर भी है। जिसके चालू होने के कारण यहां का माहौल पढ़ाने योग्य ही नहीं बचता है। जिस कमरे और बरामदे में यह विद्यालय संचालित है। वहां 48 बच्चे पंजीकृत हैं। जबकि मकान मालिक के अनुसार औसतन चार से पांच बच्चे ही प्रतिदिन पढ़ने आते हैं। वहीं स्कूल की कक्षाएं और मकान मालिक का घर एक होने के कारण यह परिसर विद्यालय कम घर ज्यादा लगता है। आसपास के लोगों ने बताया कि इस विद्यालय में बच्चों को भेजने का कोई औचित्य नहीं बचता है। इसका कारण यह है कि यहां पढ़ने का माहौल ही नहीं है। लोगों ने बताया कि उनकी बच्चियां बड़ी हैं और कारखाने में कई सारे लड़के काम करते हैं। यहां आने जाने का मार्ग भी सही नहीं है। कारखाना संचालक पूरी गली को घेरे रहते हैं। इस वजह से बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है।
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उक्त विद्यालय का मामला हमारे संज्ञान में है। विद्यालय के स्थानांतरण के लिए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी गई है। विद्यालय को जल्द से जल्द स्थानांतरित कराने की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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- हेमलता सिंह, खंड शिक्षाधिकारी नगर

यहां बच्चों के पढ़ाने का कोई माहौल नहीं है। वर्षों से किराये पर चल रहा है। इसलिए हम भी कुछ नहीं कहते हैं। लेकिन प्रधानाध्यापक बड़ी मुश्किल से चार से पांच बच्चों को लेकर आते हैं और पढ़ाते हैं। कारखाना होने की वजह और विद्यालय की छोटी सी जगह को देखकर अभिभावक अपने बच्चों को यहां पढ़ने के लिए नहीं भेजते हैं।

- मसूदउर्रहमान, मकान मालिक।

अगर विद्यालय चल नहीं पा रहा है तो इस संबंध में जांच कराई जाएगी। बच्चों को बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के लिए जल्द से जल्द विद्यालय को शिफ्ट करवाया जाएगा।
- डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय, बीएसए
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