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सन 2021 तक छह हजार भाषाएं होंगी लुप्त

Tue, 19 Dec 2017 01:57 AM IST
Updated Tue, 19 Dec 2017 01:57 AM IST
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सन 2021 तक छह हजार भाषाएं होंगी लुप्त
सन् 2100 तक 6 हजार भाषाएं होंगी लुप्त : प्रो. निकोलस
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।

एएमयू भाषा विज्ञान विभाग व मैसूर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज के संयुक्त तत्वावधान में ग्लोबल इनीशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क्स (जीआईएएन) के तहत ‘लुप्तप्राय भाषाएं व संबंधित विषय’ पर आयोजित एक सप्ताह पर आधारित कोर्स के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण प्रस्तुत करते हुए ब्रिटिश स्कॉलर प्रो. निकोलस ओसलर ने कहा कि विश्वभर में बोली जाने वाली 6 से 7 हजार भाषाएं सन् 2100 तक लुप्त हो जाएंगी।

हैदराबाद विश्वविद्यालय के प्रो. पंचानन मोहंती ने कहा कि विभिन्न समय काल में भाषाओं के विलुप्त अथवा विकसित होने की प्रक्रिया सदा चलती रही है। कई भाषाएं समय के हाथों लुप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषाओं के संरक्षण के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी के प्रयोग समेत उपाय किए जा सकते हैं।
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कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. मोहम्मद जाहिद ने कहा कि लुप्त प्राय भाषाओं के संरक्षण के लिए विश्व स्तर पर जागरूकता दिखाई देती है। विभाग के प्रो. इम्तियाज हसनैन ने कहा कि हर भाषा अपने आप में महत्वपूर्ण हैं चाहे उसके बोलने वालों की संख्या कितनी ही अधिक अथवा कम हो। उन्होंने कहा कि लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण में स्वयं उस भाषा के लोगों को कार्य करने की आवश्यकता है।
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जीआईएएन के एएमयू चैप्टर के कोआर्डिनेटर डॉ. मोहम्मद जहांगीर वारसी ने कहा कि यह स्कीम मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय मान्यताओं के अनुरूप ढालने के लिए प्रारंभ की गई है। इस अवसर पर प्रो. मसूद अली बेग ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन डॉ. नाजरीन बी लसकर ने किया। विभाग के अध्यक्ष प्रो. अली फातिही ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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