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अलीगढ़ : जिला अस्पताल में साल में 5 लाख मरीज, डॉक्टर सिर्फ 17
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कौशल कुमार ओझा
जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में आखिर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे उपलब्ध होंगी। जब डॉक्टर, फार्मासिस्ट, सिस्टर, स्टाफ नर्स से लेकर सफाई कर्मचारियों तक की भारी कमी है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में वर्ष 2019 में 17 डॉक्टरों ने पांच लाख से अधिक मरीजों को उपचार दिया। मोहनलाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं है।
मलखान सिंह जिला चिकित्सालय
मलखान सिंह जिला चिकित्सालय की ओपीडी में वर्ष 2019 (कोविड-19 से पहले ) में 504011 मरीज उपचार कराने के लिए पहुंचे थे। जबकि इस अवधि में 24582 लोग वार्ड में भर्ती हुए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि इन मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी मात्र 17 डॉक्टरों के कंधे पर थी। डॉक्टरों के लिए सृजित 33 पदों में से 16 खाली हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में चिकित्सा के स्तर का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह अस्पताल अंग्रेजों के जमाने का है।
मोहनलाल गौतम राजकीय महिला अस्पताल
मोहनलाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय में डॉक्टरों के 15 पद सृजित हैं, जिसमें 10 रिक्त हैं। पांच चिकित्सकों के कंधे पर हजारों महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञ, निश्चेतक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और ईएमओ तक के पद खाली हैं। अस्पताल परिसर में स्थित 100 शैय्या के मातृ एवं शिशु विंग में डॉक्टरों के 17 पद सृजित हैं, जो रिक्त हैं। संविदा के तीन निश्चेतक, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक पैथोलॉजिस्ट एवं दो स्त्री रोग विशेषज्ञ के भरोसे अस्पताल संचालित हो रहा है।
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पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय की ओपीडी में 2019 (कोविड पूर्व) में 333248 मरीज आए, जिनके उपचार की जिम्मेदारी मात्र 15 चिकित्सकों के कंधे पर थी। वैसे तो इस अस्पताल में चिकित्सकों के 33 पद सृजित हैं, जिसमें से 18 रिक्त हैं। कोविड महामारी शुरू होने के बाद इस अस्पताल को कोविड अस्पताल (लेवल-2) घोषित कर दिया गया। कोविड मरीजों के लिए आईसीयू एवं पीडियाट्रिक आईसीयू भी है, लेकिन डॉक्टर एवं स्टाफ की कमी दूर नहीं हुईं। यहां पर चेस्ट फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, स्किन, निश्चेतक, जनरल सर्जन, ईएनटी सर्जन और महिला अधीक्षक की कमी है।
पद सृजन भी आबादी के हिसाब से नहीं
मलखान सिंह जिला चिकित्सालय एवं मोहनलाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय अंग्रेजों के समय के हैं। यहां पर चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों के जो पद सृजित हैं, वह भी वर्षों पूर्व की आबादी के आधार पर हैं। वर्तमान में शहर की आबादी काफी बढ़ गई है। नगर निगम क्षेत्र में 19 गांव जुड़ गए हैं। राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ कहते हैं कि वर्तमान आबादी एवं उनकी स्वास्थ्य चिंताओं को ध्यान में रखकर डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियोेें के पद सृजित करने एवं तैनात करने की जरूरत है।
कोविड काल में अस्पतालों में आए कम मरीज
वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी की शुरुआत हुई थी। इसकी वजह से अन्य तमाम तरह की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। अस्पतालों में सामान्य मरीज नहीं आ रहे थे या बहुत कम आ रहे थे। इसकी वजह से 2020 और 2021 में राजकीय अस्पतालों में ओपीडी एवं अन्य सेवाएं पूर्व के वर्षों से कम रहीं।
जनपद में एवं राजकीय अस्पतालों में चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। यह सही है जो पद सृजित हैं, वह वर्तमान आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। समय-समय पर अधिकारियों को चिंताओं से अवगत कराया जाता रहा है। हमलोग भी डॉटा तैयार करा रहे हैं। सीएमओ के अधीन सृजित पद के विरुद्ध मात्र 30 प्रतिशत चिकित्सक हैं।
- डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ
अस्पतालों में डॉक्टरों की स्थिति....
- मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में डॉक्टर के 33 पद, 17 तैनात, 16 रिक्त
- मोहनलाल गौतम महिला चिकित्सालय में डॉक्टर के 15 पद, 5 तैनात, 10 रिक्त
- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में डॉक्टर के 33 पद, 15 तैनात, 18 रिक्त
- मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में पिछले तीन वर्ष में ओपीडी
- वर्ष 2019 - 504011
- वर्ष 2020 - 362705
- वर्ष 2021 - 420570
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में पिछले तीन वर्ष में ओपीडी
- वर्ष 2019 - 333248
- वर्ष 2020 - 125412
- वर्ष 2021 - 179803
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जिला स्तरीय सरकारी अस्पतालों में आखिर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे उपलब्ध होंगी। जब डॉक्टर, फार्मासिस्ट, सिस्टर, स्टाफ नर्स से लेकर सफाई कर्मचारियों तक की भारी कमी है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में वर्ष 2019 में 17 डॉक्टरों ने पांच लाख से अधिक मरीजों को उपचार दिया। मोहनलाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं है।
मलखान सिंह जिला चिकित्सालय
मलखान सिंह जिला चिकित्सालय की ओपीडी में वर्ष 2019 (कोविड-19 से पहले ) में 504011 मरीज उपचार कराने के लिए पहुंचे थे। जबकि इस अवधि में 24582 लोग वार्ड में भर्ती हुए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि इन मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी मात्र 17 डॉक्टरों के कंधे पर थी। डॉक्टरों के लिए सृजित 33 पदों में से 16 खाली हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में चिकित्सा के स्तर का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह अस्पताल अंग्रेजों के जमाने का है।
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मोहनलाल गौतम राजकीय महिला अस्पताल
मोहनलाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय में डॉक्टरों के 15 पद सृजित हैं, जिसमें 10 रिक्त हैं। पांच चिकित्सकों के कंधे पर हजारों महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। विशेषज्ञ, निश्चेतक, स्त्री रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट और ईएमओ तक के पद खाली हैं। अस्पताल परिसर में स्थित 100 शैय्या के मातृ एवं शिशु विंग में डॉक्टरों के 17 पद सृजित हैं, जो रिक्त हैं। संविदा के तीन निश्चेतक, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक पैथोलॉजिस्ट एवं दो स्त्री रोग विशेषज्ञ के भरोसे अस्पताल संचालित हो रहा है।
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पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय की ओपीडी में 2019 (कोविड पूर्व) में 333248 मरीज आए, जिनके उपचार की जिम्मेदारी मात्र 15 चिकित्सकों के कंधे पर थी। वैसे तो इस अस्पताल में चिकित्सकों के 33 पद सृजित हैं, जिसमें से 18 रिक्त हैं। कोविड महामारी शुरू होने के बाद इस अस्पताल को कोविड अस्पताल (लेवल-2) घोषित कर दिया गया। कोविड मरीजों के लिए आईसीयू एवं पीडियाट्रिक आईसीयू भी है, लेकिन डॉक्टर एवं स्टाफ की कमी दूर नहीं हुईं। यहां पर चेस्ट फिजीशियन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, स्किन, निश्चेतक, जनरल सर्जन, ईएनटी सर्जन और महिला अधीक्षक की कमी है।
पद सृजन भी आबादी के हिसाब से नहीं
मलखान सिंह जिला चिकित्सालय एवं मोहनलाल गौतम राजकीय महिला चिकित्सालय अंग्रेजों के समय के हैं। यहां पर चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों के जो पद सृजित हैं, वह भी वर्षों पूर्व की आबादी के आधार पर हैं। वर्तमान में शहर की आबादी काफी बढ़ गई है। नगर निगम क्षेत्र में 19 गांव जुड़ गए हैं। राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ कहते हैं कि वर्तमान आबादी एवं उनकी स्वास्थ्य चिंताओं को ध्यान में रखकर डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियोेें के पद सृजित करने एवं तैनात करने की जरूरत है।
कोविड काल में अस्पतालों में आए कम मरीज
वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी की शुरुआत हुई थी। इसकी वजह से अन्य तमाम तरह की स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। अस्पतालों में सामान्य मरीज नहीं आ रहे थे या बहुत कम आ रहे थे। इसकी वजह से 2020 और 2021 में राजकीय अस्पतालों में ओपीडी एवं अन्य सेवाएं पूर्व के वर्षों से कम रहीं।
जनपद में एवं राजकीय अस्पतालों में चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। यह सही है जो पद सृजित हैं, वह वर्तमान आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। समय-समय पर अधिकारियों को चिंताओं से अवगत कराया जाता रहा है। हमलोग भी डॉटा तैयार करा रहे हैं। सीएमओ के अधीन सृजित पद के विरुद्ध मात्र 30 प्रतिशत चिकित्सक हैं।
- डॉ. नीरज त्यागी, सीएमओ
अस्पतालों में डॉक्टरों की स्थिति....
- मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में डॉक्टर के 33 पद, 17 तैनात, 16 रिक्त
- मोहनलाल गौतम महिला चिकित्सालय में डॉक्टर के 15 पद, 5 तैनात, 10 रिक्त
- पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में डॉक्टर के 33 पद, 15 तैनात, 18 रिक्त
- मलखान सिंह जिला चिकित्सालय में पिछले तीन वर्ष में ओपीडी
- वर्ष 2019 - 504011
- वर्ष 2020 - 362705
- वर्ष 2021 - 420570
पं. दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में पिछले तीन वर्ष में ओपीडी
- वर्ष 2019 - 333248
- वर्ष 2020 - 125412
- वर्ष 2021 - 179803