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शहर में चल रहीं डेयरी बंद नहीं हो रही
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:52 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
गांधी पार्क में रास्ते के गोबर के विवाद में हुई हत्या के बाद विचारणीय है कि शहर में घनी आबादी वाले इलाके में चल रही डेयरियां और नालियों व सड़कों पर बहाए जाने वाला गोबर कभी भी बड़े टकराव की वजह बन सकता है। हालांकि हाईकोर्ट और शासन के सख्त निर्देश हैं कि इन सभी डेयरियों को शहरी क्षेत्र की सीमा से बाहर किया जाए, लेकिन नगर निगम की उदासीनता के चलते यह डेयरियां शहर के लोगों के लिए नासूर बनी हुई हैं।
शहर में सराय हकीम, गांधी नगर, देहली, खैर रोड, जयगंज सराय बाला, सराय जवां, स्कूल नंबर 35, लोदी विहार, पंच नगरी, प्रतिभा कॉलोनी, गूलर रोड तहसील के पीछे, महेंद्र नगर, ऊपर कोट, हाथी वाला पुल आदि इलाकों में डेयरियां संचालित हैं। अधिकांश डेयरी संचालक अपना गोबर नाली में बहा देते हैं।
गोबर को इकट्ठा करके गाड़ी में लादने के बाद भी इतना गोबर बच जाता है कि वह नाली या नाले को ब्लाक करने के लिए काफी होता है। यही नहीं यह डेयरियां आसपास के लोगों और राहगीरों के लिए नासूर बनी हुई हैं।
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इन डेयरियों से जब पशु बाहर निकाले जाते हैं और अंदर किए जाते हैं तो यह काफी खतरनाक होता है। इसके अलावा होने वाली गंदगी से वहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।
हाईकोर्ट ने शासन को आदेश दिए। शासन ने नगर निगम को आदेश दिए। यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि नगर निगम हाईकोर्ट और शासन दोनों के ही आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। इससे साफ संकेत हैं कि डेयरी संचालक नगर निगम के हितों की पूर्ति कर रहे हैं। इसके चलते लाखों की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
- राम कृष्ण तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
आवारा पशु बन सकते हैं जानलेवा
आगरा में सड़कों पर घूम रहे आवारा सांड़ एक सपा नेता की मौत का कारण बन गए। अलीगढ़ में भी सड़कों पर आवारा पशु और पशु पालकों द्वारा छोड़े गए पशुओं को देखा जा सकता है।
नगर निगम की उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों जब अमर उजाला ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी से यह पूछा कि गंदगी फैलाने वाले कितने लोगों के खिलाफ चालान किया गया तो वह यह जानकारी भी नहीं दे सके। नगर निगम की आवारा पशुओं के लिए यह उदासीनता किसी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है।
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गांधी पार्क में रास्ते के गोबर के विवाद में हुई हत्या के बाद विचारणीय है कि शहर में घनी आबादी वाले इलाके में चल रही डेयरियां और नालियों व सड़कों पर बहाए जाने वाला गोबर कभी भी बड़े टकराव की वजह बन सकता है। हालांकि हाईकोर्ट और शासन के सख्त निर्देश हैं कि इन सभी डेयरियों को शहरी क्षेत्र की सीमा से बाहर किया जाए, लेकिन नगर निगम की उदासीनता के चलते यह डेयरियां शहर के लोगों के लिए नासूर बनी हुई हैं।
शहर में सराय हकीम, गांधी नगर, देहली, खैर रोड, जयगंज सराय बाला, सराय जवां, स्कूल नंबर 35, लोदी विहार, पंच नगरी, प्रतिभा कॉलोनी, गूलर रोड तहसील के पीछे, महेंद्र नगर, ऊपर कोट, हाथी वाला पुल आदि इलाकों में डेयरियां संचालित हैं। अधिकांश डेयरी संचालक अपना गोबर नाली में बहा देते हैं।
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गोबर को इकट्ठा करके गाड़ी में लादने के बाद भी इतना गोबर बच जाता है कि वह नाली या नाले को ब्लाक करने के लिए काफी होता है। यही नहीं यह डेयरियां आसपास के लोगों और राहगीरों के लिए नासूर बनी हुई हैं।
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इन डेयरियों से जब पशु बाहर निकाले जाते हैं और अंदर किए जाते हैं तो यह काफी खतरनाक होता है। इसके अलावा होने वाली गंदगी से वहां सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।
हाईकोर्ट ने शासन को आदेश दिए। शासन ने नगर निगम को आदेश दिए। यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि नगर निगम हाईकोर्ट और शासन दोनों के ही आदेशों की धज्जियां उड़ा रहा है। इससे साफ संकेत हैं कि डेयरी संचालक नगर निगम के हितों की पूर्ति कर रहे हैं। इसके चलते लाखों की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
- राम कृष्ण तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता
आवारा पशु बन सकते हैं जानलेवा
आगरा में सड़कों पर घूम रहे आवारा सांड़ एक सपा नेता की मौत का कारण बन गए। अलीगढ़ में भी सड़कों पर आवारा पशु और पशु पालकों द्वारा छोड़े गए पशुओं को देखा जा सकता है।
नगर निगम की उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों जब अमर उजाला ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी से यह पूछा कि गंदगी फैलाने वाले कितने लोगों के खिलाफ चालान किया गया तो वह यह जानकारी भी नहीं दे सके। नगर निगम की आवारा पशुओं के लिए यह उदासीनता किसी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है।