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सीपीआई पर संशय बरकरार, स्कूल और अभिभावकों में रार
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
निजी स्कूलों में अपनी मर्जी से स्कूल संचालक फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बाकायदा शुल्क अधिनियम भी बना दिया है, ताकि मनमर्जी से फीस न बढ़ायी जा सके।
यदि फीस बढ़ानी पड़े तो इसके लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) के औसत में 5 फीसदी जोड़कर फीस में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। मगर कुछ स्कूल संचालक सीपीआई को समझ नहीं पा रहे। ऐसी सूरत में फीस में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इस पर अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन ने चिंता जताई है।
एसोसिएशन के मंडल प्रभारी अनुराग गुप्ता ने कहा कि स्कूलों में मनमानी तरीके से फीस बढ़ोत्तरी की जा रही है। एनसीईआरटी की किताबें लगाने में स्कूल प्रशासन आनाकानी कर रहे हैं। डीएस बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल दीप्ति गोविला ने कहा कि जिन स्कूलों में 20 हजार से कम फीस है, वहां शुल्क अधिनियम नहीं लागू होता है, लेकिन 20 हजार से ज्यादा फीस लेने पर यह अधिनियम लागू होता है।
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फीस संबंधित जानकारी सरकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होती है। डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि सत्र शुरू होने से 60 दिन पहले जारी सीपीआई की औसत में 5 फीसदी जोड़कर फीस में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फीस बढ़ोत्तरी के साथ शिक्षकों का वेतन भी बढ़ाना होगा। हर महीने सरकारी स्तर से सीपीआई वेबसाइट पर जारी होती है।
क्या है सीपीआई
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के औसत मूल्य को मापने वाला एक सूचकांक है। आठ प्रकार के खर्चों को सूचकांक में शामिल किया जाता है। इनमें शिक्षा, संचार, परिवहन, मनोरंजन, कपड़े, खाद्य-पेय पदार्थ, आवास व चिकित्सा खर्च।
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निजी स्कूलों में अपनी मर्जी से स्कूल संचालक फीस नहीं बढ़ा सकते हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बाकायदा शुल्क अधिनियम भी बना दिया है, ताकि मनमर्जी से फीस न बढ़ायी जा सके।
यदि फीस बढ़ानी पड़े तो इसके लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) के औसत में 5 फीसदी जोड़कर फीस में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। मगर कुछ स्कूल संचालक सीपीआई को समझ नहीं पा रहे। ऐसी सूरत में फीस में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इस पर अलीगढ़ अभिभावक एसोसिएशन ने चिंता जताई है।
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एसोसिएशन के मंडल प्रभारी अनुराग गुप्ता ने कहा कि स्कूलों में मनमानी तरीके से फीस बढ़ोत्तरी की जा रही है। एनसीईआरटी की किताबें लगाने में स्कूल प्रशासन आनाकानी कर रहे हैं। डीएस बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल दीप्ति गोविला ने कहा कि जिन स्कूलों में 20 हजार से कम फीस है, वहां शुल्क अधिनियम नहीं लागू होता है, लेकिन 20 हजार से ज्यादा फीस लेने पर यह अधिनियम लागू होता है।
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फीस संबंधित जानकारी सरकारी वेबसाइट पर अपलोड करनी होती है। डीआईओएस डॉ. धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि सत्र शुरू होने से 60 दिन पहले जारी सीपीआई की औसत में 5 फीसदी जोड़कर फीस में बढ़ोत्तरी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फीस बढ़ोत्तरी के साथ शिक्षकों का वेतन भी बढ़ाना होगा। हर महीने सरकारी स्तर से सीपीआई वेबसाइट पर जारी होती है।
क्या है सीपीआई
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के औसत मूल्य को मापने वाला एक सूचकांक है। आठ प्रकार के खर्चों को सूचकांक में शामिल किया जाता है। इनमें शिक्षा, संचार, परिवहन, मनोरंजन, कपड़े, खाद्य-पेय पदार्थ, आवास व चिकित्सा खर्च।