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बाहर हो या घर, शहर में संक्रामक रोगों का कहर
Updated Thu, 13 Jul 2017 01:31 AM IST
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बाहर हो या घर, शहर में संक्रामक रोगों का कहर
ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
शहर में इस समय संक्रामक रोगों का जबरदस्त कहर है। मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी में 40 फीसदी बीमार संक्रामक रोगों के आ रहे हैं। इसमें चिकन पॉक्स, मलेरिया, वायरल, एलर्जी इंफेक्शन, आंतों के संक्रमण, दस्त आदि के मामले शामिल है। इसका प्रमुख कारण इस समय उमस भरा मौसम और गंदगी है। इसमें गलत खान पान और लापरवाही मामले को और भी गंभीर कर रहा है।
बुधवार को सुबह बादल छाए हुए थे। लेकिन दोपहर बाद धूप निकली और उमस होने लगी। पिछले कुछ दिनों से मौसम जबरदस्त उमस भरा रहा। मलखान सिंह जिला अस्पताल में आयुष विंग के डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि इस समय जो चिकन पॉक्स के मामले आ रहे हैं, उसका प्रमुख कारण यह भी है कि तीन दिन पहले जहां वातावरण में जबरदस्त उमस थी, वहीं अब दो तीन दिन बाद पारा गिरा हुआ है। वातावरण ठंडा है। ऐसे तापमान और वातावरण में वैक्टीरिया और वायरस खूब पनपता है। यही कारण है कि सावधानी में जरा सी भी ढील होने पर संक्रमण हो जाता है।
रखा हुआ खाना है जहर
डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि इस मौसम में रखा हुआ खाना खाना एक प्रकार से विषाक्त पदार्थ का सेवन करने जैसा है। अक्सर देखने में लगता है कि भोजन सही है, लेकिन उसमें वैक्टीरिया पनप चुके होते हैं। यही खाना उनके संक्रमण का शिकार होने की वजह बनता है। दूसरी ओर ठेल, ढकेल और खाद्य सामग्री बेचने वाले भी अगर रखी हुई सामग्री का इस्तेमाल कर लें तो उससे भी संक्रमण का शिकार होने की संभावना हो जाती है।
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सरकारी अस्पताल ही नहीं निजी क्लीनिक भी फुल
ऐसा नहीं है कि मरीजों की भीड़ सरकारी अस्पतालों में ही उमड़ रही है। निजी क्लीनिकों पर भी मरीजों की खूब भीड़ देखी जा रही है। खास तौर से बच्चों के बीमार होने की संख्या में इजाफा हुआ है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बंसल कहते हैं कि बच्चे संक्रमण का आसानी से शिकार हो जाते है। इसलिए उनके बीमार होने की संख्या अधिक है। छोटे बच्चों के मामले में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
बीमार को फल खिलाने में हो गई विफल
बीमार होने पर बच्चों को सेव खिलाने की सलाह अब अभिभावकों को असहज कर रही है। बुधवार को जिला अस्पताल में वायरल होने पर बच्चे को दिखाने आई देहली गेट की सायरा को डाक्टर से सलाह दी कि इसको सेव खिलाओ। लेकिन जब सायरा सेब लेने ढकेल पर पहुंची तो उसकी कीमत (160 से 200 रुपये किलो) सुनकर ठिठक गई। फल विक्रेता नाजिम ने बताया कि इस समय कश्मीर का सेब बाजार में नहीं आ रहा है। जो सेब बाजार में है वह आस्ट्रेलिया और चीन का सेब है। इसलिए मंहगा है। जब कश्मीर का सेब आ जाएगा तो कीमतों में गिरावट भी आ जाएगी।
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ब्यूरो, अमर उजाला अलीगढ़।
शहर में इस समय संक्रामक रोगों का जबरदस्त कहर है। मलखान सिंह जिला अस्पताल की ओपीडी में 40 फीसदी बीमार संक्रामक रोगों के आ रहे हैं। इसमें चिकन पॉक्स, मलेरिया, वायरल, एलर्जी इंफेक्शन, आंतों के संक्रमण, दस्त आदि के मामले शामिल है। इसका प्रमुख कारण इस समय उमस भरा मौसम और गंदगी है। इसमें गलत खान पान और लापरवाही मामले को और भी गंभीर कर रहा है।
बुधवार को सुबह बादल छाए हुए थे। लेकिन दोपहर बाद धूप निकली और उमस होने लगी। पिछले कुछ दिनों से मौसम जबरदस्त उमस भरा रहा। मलखान सिंह जिला अस्पताल में आयुष विंग के डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि इस समय जो चिकन पॉक्स के मामले आ रहे हैं, उसका प्रमुख कारण यह भी है कि तीन दिन पहले जहां वातावरण में जबरदस्त उमस थी, वहीं अब दो तीन दिन बाद पारा गिरा हुआ है। वातावरण ठंडा है। ऐसे तापमान और वातावरण में वैक्टीरिया और वायरस खूब पनपता है। यही कारण है कि सावधानी में जरा सी भी ढील होने पर संक्रमण हो जाता है।
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रखा हुआ खाना है जहर
डॉ. ताजुद्दीन कहते हैं कि इस मौसम में रखा हुआ खाना खाना एक प्रकार से विषाक्त पदार्थ का सेवन करने जैसा है। अक्सर देखने में लगता है कि भोजन सही है, लेकिन उसमें वैक्टीरिया पनप चुके होते हैं। यही खाना उनके संक्रमण का शिकार होने की वजह बनता है। दूसरी ओर ठेल, ढकेल और खाद्य सामग्री बेचने वाले भी अगर रखी हुई सामग्री का इस्तेमाल कर लें तो उससे भी संक्रमण का शिकार होने की संभावना हो जाती है।
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सरकारी अस्पताल ही नहीं निजी क्लीनिक भी फुल
ऐसा नहीं है कि मरीजों की भीड़ सरकारी अस्पतालों में ही उमड़ रही है। निजी क्लीनिकों पर भी मरीजों की खूब भीड़ देखी जा रही है। खास तौर से बच्चों के बीमार होने की संख्या में इजाफा हुआ है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप बंसल कहते हैं कि बच्चे संक्रमण का आसानी से शिकार हो जाते है। इसलिए उनके बीमार होने की संख्या अधिक है। छोटे बच्चों के मामले में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है।
बीमार को फल खिलाने में हो गई विफल
बीमार होने पर बच्चों को सेव खिलाने की सलाह अब अभिभावकों को असहज कर रही है। बुधवार को जिला अस्पताल में वायरल होने पर बच्चे को दिखाने आई देहली गेट की सायरा को डाक्टर से सलाह दी कि इसको सेव खिलाओ। लेकिन जब सायरा सेब लेने ढकेल पर पहुंची तो उसकी कीमत (160 से 200 रुपये किलो) सुनकर ठिठक गई। फल विक्रेता नाजिम ने बताया कि इस समय कश्मीर का सेब बाजार में नहीं आ रहा है। जो सेब बाजार में है वह आस्ट्रेलिया और चीन का सेब है। इसलिए मंहगा है। जब कश्मीर का सेब आ जाएगा तो कीमतों में गिरावट भी आ जाएगी।