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Aligarh News: जेएन मेडिकल कॉलेज में हर महीने हो रही 200 एंजियोग्राफी
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
अनियमित, निष्क्रिय दिनचर्या और खराब खानपान की वजह से दिल के मरीजों की संख्या बढ़ी है। जेएन मेडिकल कॉलेज में हर महीने करीब 200 एंजियोग्राफी हो रही हैं। इनमें लगभग 70 फीसदी पुरुष और 30 फीसदी महिलाएं हैं। जांच के बाद करीब 110 मरीजों की हर माह एंजियोप्लास्टी भी की जा रही है।
कार्डियोलॉजी विभाग में एंजियोग्राफी के लिए 30 से 60 वर्ष आयु के मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 30 से 40 वर्ष आयु के 40 फीसदी मरीज होते हैं। ये संख्या यह संकेत देती है कि हृदय संबंधी समस्याओं को लेकर समय रहते सावधानी जरूरी है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल, धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोग की आशंका बढ़ा सकते हैं। ऐसे में बीमारी के इलाज के साथ बचाव और समय पर जांच को लेकर जागरूकता भी अहम है।
हार्ट अटैक से बचाव के लिए जोखिम कारकों पर नियंत्रण जरूरी
जेएन मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. मलिक मोहम्मद अजहरुद्दीन ने बताया कि हार्ट अटैक से बचाव के लिए सजगता जरूरी है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल को नियंत्रण में रखना चाहिए तथा धूम्रपान से दूरी बनानी चाहिए। इन जोखिम कारकों पर नियंत्रण और नियमित व्यायाम से हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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जिला अस्पताल से रेफर होते हैं हृदय संबंधी मरीज
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। सीएमएस डॉ. जगवीर सिंह ने बताया कि हृदय रोग के गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि यहां विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं।
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कार्डियोलॉजी विभाग में एंजियोग्राफी के लिए 30 से 60 वर्ष आयु के मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 30 से 40 वर्ष आयु के 40 फीसदी मरीज होते हैं। ये संख्या यह संकेत देती है कि हृदय संबंधी समस्याओं को लेकर समय रहते सावधानी जरूरी है। हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल, धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोग की आशंका बढ़ा सकते हैं। ऐसे में बीमारी के इलाज के साथ बचाव और समय पर जांच को लेकर जागरूकता भी अहम है।
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हार्ट अटैक से बचाव के लिए जोखिम कारकों पर नियंत्रण जरूरी
जेएन मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. मलिक मोहम्मद अजहरुद्दीन ने बताया कि हार्ट अटैक से बचाव के लिए सजगता जरूरी है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल को नियंत्रण में रखना चाहिए तथा धूम्रपान से दूरी बनानी चाहिए। इन जोखिम कारकों पर नियंत्रण और नियमित व्यायाम से हृदय रोग के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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जिला अस्पताल से रेफर होते हैं हृदय संबंधी मरीज
जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। सीएमएस डॉ. जगवीर सिंह ने बताया कि हृदय रोग के गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, क्योंकि यहां विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं।