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हामिद अंसारी के समर्थन में एएमयू छात्र
Updated Sat, 14 Jul 2018 02:08 AM IST
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
एएमयू के यूनियन हॉल में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने यह कहकर बहस शुरू करा दी है कि जब देश में विक्टोरिया मेमोरियल रह सकता है तो जिन्ना की तस्वीर पर इतना विवाद क्यों।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का कहना है कि हामिद अंसारी बिल्कुल सही बोल रहे हैं। जब देश में विक्टोरिया मेमोरियल रह सकता है तो जिन्ना की तस्वीर पर इतना विवाद क्यों हो रहा है। विभाजन के पूर्व 1938 में जिन्ना को एएमयू छात्र संघ द्वारा आजीवन मानद सदस्यता दी गई थी।
उन्होंने कहा कि हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रहे हैं। कुछ लोग उन्हें टार्गेट कर रहे है जो ठीक नहीं है। उल्लेखनीय है कि एएमयू में जिस दिन जिन्ना प्रकरण को लेकर छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ था, उस समय हामिद अंसारी एएमयू के गेस्ट हाउस नंबर 2 में मौजूद थे।
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एएमयू छात्र संघ द्वारा उन्हें आजीवन मानद सदस्यता देने के लिए आमंत्रित किया गया था। शाम में यूनियन हॉल में कार्यक्रम होना था और रात्रि में कैनेडी हॉल में हामिद अंसारी छात्रों को संबोधित करने वाले थे। लेकिन उसी दिन हिंदू जागरण मंच एवं अन्य संगठनों के युवक नारेबाजी करते हुए एएमयू में पहुंच गए और जिन्ना का पुतला फूंक दिया।
वे लोग एएमयू से जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग कर रहे थे। युवकों से एएमयू छात्रों एवं सुरक्षाकर्मियों से हाथापाई एवं विवाद हुआ। उसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि जबरन सिविल लाइन थाने में तहरीर दर्ज कराने जा रहे हजारों एएमयू छात्रों पर लाठीचार्ज की नौबत आ गई।
विवाद एवं हंगामा के कारण हामिद अंसारी का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। उसी दिन हामिद अंसारी बिना किसी कार्यक्रम में शामिल हुए वापस दिल्ली लौट गए थे।
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एएमयू के यूनियन हॉल में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने यह कहकर बहस शुरू करा दी है कि जब देश में विक्टोरिया मेमोरियल रह सकता है तो जिन्ना की तस्वीर पर इतना विवाद क्यों।
एएमयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष मशकूर अहमद उस्मानी का कहना है कि हामिद अंसारी बिल्कुल सही बोल रहे हैं। जब देश में विक्टोरिया मेमोरियल रह सकता है तो जिन्ना की तस्वीर पर इतना विवाद क्यों हो रहा है। विभाजन के पूर्व 1938 में जिन्ना को एएमयू छात्र संघ द्वारा आजीवन मानद सदस्यता दी गई थी।
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उन्होंने कहा कि हामिद अंसारी उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रहे हैं। कुछ लोग उन्हें टार्गेट कर रहे है जो ठीक नहीं है। उल्लेखनीय है कि एएमयू में जिस दिन जिन्ना प्रकरण को लेकर छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ था, उस समय हामिद अंसारी एएमयू के गेस्ट हाउस नंबर 2 में मौजूद थे।
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एएमयू छात्र संघ द्वारा उन्हें आजीवन मानद सदस्यता देने के लिए आमंत्रित किया गया था। शाम में यूनियन हॉल में कार्यक्रम होना था और रात्रि में कैनेडी हॉल में हामिद अंसारी छात्रों को संबोधित करने वाले थे। लेकिन उसी दिन हिंदू जागरण मंच एवं अन्य संगठनों के युवक नारेबाजी करते हुए एएमयू में पहुंच गए और जिन्ना का पुतला फूंक दिया।
वे लोग एएमयू से जिन्ना की तस्वीर हटाने की मांग कर रहे थे। युवकों से एएमयू छात्रों एवं सुरक्षाकर्मियों से हाथापाई एवं विवाद हुआ। उसके बाद विवाद इतना बढ़ गया कि जबरन सिविल लाइन थाने में तहरीर दर्ज कराने जा रहे हजारों एएमयू छात्रों पर लाठीचार्ज की नौबत आ गई।
विवाद एवं हंगामा के कारण हामिद अंसारी का कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। उसी दिन हामिद अंसारी बिना किसी कार्यक्रम में शामिल हुए वापस दिल्ली लौट गए थे।