{"_id":"5adb94fb4f1c1b46098b5d5b","slug":"141524339963-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मॉडल स्कूलों में गए शिक्षक, पुराने विद्यालयों में हो गई कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मॉडल स्कूलों में गए शिक्षक, पुराने विद्यालयों में हो गई कमी
Updated Sun, 22 Apr 2018 01:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
क्राइम डेस्क, अमर उजाल, अलीगढ़।
बिना किसी ठोस योजना के जब शासन अपनी प्राथमिकता वाली योजनाओं को शुरू करता है तो इसका फायदा कम और नुकसान ज्यादा देखने को मिलता है और सिस्टम में झोल सामने आता है। पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज का संचालन इसका उदाहरण है। पर्याप्त शिक्षकों के न होेने से यह विद्यालय सही तरीके से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। दूसरी ओर इनके संचालन के चक्कर में पुराने स्थापित राजकीय विद्यालयों में भी शिक्षकों का टोटा हो गया है।
जिले के राजकीय विद्यालयोें के तीन दर्जन शिक्षक-शिक्षिकाओं को इन मॉडल स्कूलों से अटैच कर दिया गया है। अकेले नौरंगीलाल जीआईसी के भी 19 अध्यापक वहां से हटा दिए गए हैं। ऐसे में इस जीआईसी में 1,700 विद्यार्थियों को 30 कक्षाओं में पढ़ाने के लिए महज 18 अध्यापक बचे हैं। कई अन्य राजकीय विद्यालयों में भी कमोबेश यही स्थिति है।
वर्ष 2010-11 में शुरू हुई थी मॉडल स्कूल योेजना
बात यदि मॉडल स्कूलोें की करें तो वर्ष 2010-11 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने यह योजना बनाई कि पिछड़े क्षेत्र के बच्चों को अच्छी व सीबीएसई की शिक्षा देने के लिए हर ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल खोला जाएगा। इस योेजना को अमली जामा पहनाया जाने लगा। यहां भी पांच मॉडल स्कूलों के भवन तैयार किए गए। इसमें छलेसर, बडेसरा, जहराना, खेड़ा सत्तू और टमोटिया शामिल थे। कुछ साल बाद ही केंद्र सरकार ने इनके संचालन से हाथ खींच लिया। ऐसे में कई साल तक यह भवन ज्यों के त्यों खड़े रहे। इनमें पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी।
विज्ञापन
सपा सरक ार ने संचालित किया था अभिनव विद्यालय
उसके बाद मंडल स्तर पर पिछली सपा सरकार ने एक-एक विद्यालय को सीबीएसई से संचालित करने का निर्णय लिया। इसमें छलेसर के मॉडल स्कूल का चयन हुआ। इस विद्यालय को समाजवादी अभिनव विद्यालय का नाम दिया गया। शु्रू में यह योजना भी बनाई गई कि यह विद्यालय आवासीय होगा। इस सरकार में भी विद्यालय को ‘जुगाड़’ से चलाया गया। यहां भी अन्य राजकीय विद्यालयों के शिक्षक व स्टॉफ अटैच कर दिया गया और यहां पठन-पाठन शुरू कर दिया गया। उसके बाद जब सत्ता बदली तो इस विद्यालय से समाजवादी शब्द हटा दिया गया और अब यह अभिनव विद्यालय के नाम से जाना जाने लगा।
एक साल में भी नहीं हुआ पर्याप्त शिक्षकों व स्टॉफ का इंतजाम
जब योेगी सरकार आई तो यह तय किया गया कि शेष चार बचे मॉडल स्कूलों को अब सीबीएसई बोर्ड से नहीं बल्कि यूपी बोर्ड से संचालित किया जाएगा। पिछले साल इसके लिए आदेश आया लेकिन स्टॉफ और शिक्षकों की किल्लत के चलते यह संचालित नहीं हो सके। तब यह तय हुआ कि यह विद्यालय अप्रैल 2018 से संचालित होंगे। सबसे खेदजनक पहलू तो यह रहा कि एक साल भी इन विद्यालयोें के लिए अलग से शिक्षक ों व स्टॉफ का इंतजाम नहीं किया गया। अप्रैल से चारों मॉडल स्कूलों को पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों का नाम दे दिया गया।
पुराने राजकीय विद्यालयोें में हो गई शिक्षकों की कमी
इस शैक्षिक सत्र में इन विद्यालयोें का संचालन तो शुरू हो गया लेकिन यहां जिले के अन्य राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों के शिक्षक अटैच कर दिए गए। स्थिति यह है कि अकेले नौरंगीलाल जीआईसी के ही 19 शिक्षकों को वहां से हटा दिया गया। इसमें पिछले साल छलेसर व हाथरस के विद्यालय से संबद्ध कर दिए थे, जबकि 12 शिक्षक इन नये राजकीय मॉडल स्कूलों से अटैच किए गए हैं। ऐसे में जिले के सबसे बड़े जीआईसी में शिक्षकों का टोटा पैदा हो गया है। यहां 1500 विद्यार्थी 30 क्लासों में अध्ययनरत हैं, जबकि अब केवल 18 शिक्षक ही बचे हैं। यही स्थिति कमोबेश अन्य राजकीय विद्यालयों में भी पैदा हो गई है।
नये मॉडल स्कूलों में भी नहीं हैं पर्याप्त शिक्षक
बात यदि इन नये मॉडल स्कूलों की करें तो वहां भी अभी तक शिक्षक व स्टॉफ पूरा नहीं है। कहीं फर्नीचर की व्यवस्था आस-पास के विद्यालयों से की गई है तो कहीं स्वीपर तक नहीं हैं। बडेसरा के विद्यालय में तो पेयजल की किल्लत है। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन तो शुरू हो गए हैं लेकिन वहां पुराने राजकीय विद्यालयों से सबद्धीकरण के बाद भी शिक्षक पर्याप्त नहीं है। ऐसे में यहां भी शिक्षक पर्याप्त नहीं है। स्थिति यह है कि न तो मॉडल स्कूलों का सही संचालन हो पा रहा है और पुराने विद्यालयोें में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है।
--------
पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों का संचालन शुरू हो गया है। यहां शिक्षकोें की तैनाती की गई है। अटैचमेंट के चलते कुछ विद्यालयोें में शिक्षक कम हुए हैं। जल्द ही विभाग द्वारा वहां नये नियुक्त होने वाले शिक्षकोें को तैनात किया जाएगा। वैसे रिटायर शिक्षकों की सेवाएं लेने के आदेश भी आ गए हैं।
- डॉ.धर्मेंद्र शर्मा, डीआईओएस
विज्ञापन
बिना किसी ठोस योजना के जब शासन अपनी प्राथमिकता वाली योजनाओं को शुरू करता है तो इसका फायदा कम और नुकसान ज्यादा देखने को मिलता है और सिस्टम में झोल सामने आता है। पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज का संचालन इसका उदाहरण है। पर्याप्त शिक्षकों के न होेने से यह विद्यालय सही तरीके से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। दूसरी ओर इनके संचालन के चक्कर में पुराने स्थापित राजकीय विद्यालयों में भी शिक्षकों का टोटा हो गया है।
जिले के राजकीय विद्यालयोें के तीन दर्जन शिक्षक-शिक्षिकाओं को इन मॉडल स्कूलों से अटैच कर दिया गया है। अकेले नौरंगीलाल जीआईसी के भी 19 अध्यापक वहां से हटा दिए गए हैं। ऐसे में इस जीआईसी में 1,700 विद्यार्थियों को 30 कक्षाओं में पढ़ाने के लिए महज 18 अध्यापक बचे हैं। कई अन्य राजकीय विद्यालयों में भी कमोबेश यही स्थिति है।
विज्ञापन
वर्ष 2010-11 में शुरू हुई थी मॉडल स्कूल योेजना
बात यदि मॉडल स्कूलोें की करें तो वर्ष 2010-11 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने यह योजना बनाई कि पिछड़े क्षेत्र के बच्चों को अच्छी व सीबीएसई की शिक्षा देने के लिए हर ब्लॉक में एक मॉडल स्कूल खोला जाएगा। इस योेजना को अमली जामा पहनाया जाने लगा। यहां भी पांच मॉडल स्कूलों के भवन तैयार किए गए। इसमें छलेसर, बडेसरा, जहराना, खेड़ा सत्तू और टमोटिया शामिल थे। कुछ साल बाद ही केंद्र सरकार ने इनके संचालन से हाथ खींच लिया। ऐसे में कई साल तक यह भवन ज्यों के त्यों खड़े रहे। इनमें पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी।
विज्ञापन
सपा सरक ार ने संचालित किया था अभिनव विद्यालय
उसके बाद मंडल स्तर पर पिछली सपा सरकार ने एक-एक विद्यालय को सीबीएसई से संचालित करने का निर्णय लिया। इसमें छलेसर के मॉडल स्कूल का चयन हुआ। इस विद्यालय को समाजवादी अभिनव विद्यालय का नाम दिया गया। शु्रू में यह योजना भी बनाई गई कि यह विद्यालय आवासीय होगा। इस सरकार में भी विद्यालय को ‘जुगाड़’ से चलाया गया। यहां भी अन्य राजकीय विद्यालयों के शिक्षक व स्टॉफ अटैच कर दिया गया और यहां पठन-पाठन शुरू कर दिया गया। उसके बाद जब सत्ता बदली तो इस विद्यालय से समाजवादी शब्द हटा दिया गया और अब यह अभिनव विद्यालय के नाम से जाना जाने लगा।
एक साल में भी नहीं हुआ पर्याप्त शिक्षकों व स्टॉफ का इंतजाम
जब योेगी सरकार आई तो यह तय किया गया कि शेष चार बचे मॉडल स्कूलों को अब सीबीएसई बोर्ड से नहीं बल्कि यूपी बोर्ड से संचालित किया जाएगा। पिछले साल इसके लिए आदेश आया लेकिन स्टॉफ और शिक्षकों की किल्लत के चलते यह संचालित नहीं हो सके। तब यह तय हुआ कि यह विद्यालय अप्रैल 2018 से संचालित होंगे। सबसे खेदजनक पहलू तो यह रहा कि एक साल भी इन विद्यालयोें के लिए अलग से शिक्षक ों व स्टॉफ का इंतजाम नहीं किया गया। अप्रैल से चारों मॉडल स्कूलों को पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों का नाम दे दिया गया।
पुराने राजकीय विद्यालयोें में हो गई शिक्षकों की कमी
इस शैक्षिक सत्र में इन विद्यालयोें का संचालन तो शुरू हो गया लेकिन यहां जिले के अन्य राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों के शिक्षक अटैच कर दिए गए। स्थिति यह है कि अकेले नौरंगीलाल जीआईसी के ही 19 शिक्षकों को वहां से हटा दिया गया। इसमें पिछले साल छलेसर व हाथरस के विद्यालय से संबद्ध कर दिए थे, जबकि 12 शिक्षक इन नये राजकीय मॉडल स्कूलों से अटैच किए गए हैं। ऐसे में जिले के सबसे बड़े जीआईसी में शिक्षकों का टोटा पैदा हो गया है। यहां 1500 विद्यार्थी 30 क्लासों में अध्ययनरत हैं, जबकि अब केवल 18 शिक्षक ही बचे हैं। यही स्थिति कमोबेश अन्य राजकीय विद्यालयों में भी पैदा हो गई है।
नये मॉडल स्कूलों में भी नहीं हैं पर्याप्त शिक्षक
बात यदि इन नये मॉडल स्कूलों की करें तो वहां भी अभी तक शिक्षक व स्टॉफ पूरा नहीं है। कहीं फर्नीचर की व्यवस्था आस-पास के विद्यालयों से की गई है तो कहीं स्वीपर तक नहीं हैं। बडेसरा के विद्यालय में तो पेयजल की किल्लत है। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन तो शुरू हो गए हैं लेकिन वहां पुराने राजकीय विद्यालयों से सबद्धीकरण के बाद भी शिक्षक पर्याप्त नहीं है। ऐसे में यहां भी शिक्षक पर्याप्त नहीं है। स्थिति यह है कि न तो मॉडल स्कूलों का सही संचालन हो पा रहा है और पुराने विद्यालयोें में पठन-पाठन प्रभावित हो गया है।
--------
पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों का संचालन शुरू हो गया है। यहां शिक्षकोें की तैनाती की गई है। अटैचमेंट के चलते कुछ विद्यालयोें में शिक्षक कम हुए हैं। जल्द ही विभाग द्वारा वहां नये नियुक्त होने वाले शिक्षकोें को तैनात किया जाएगा। वैसे रिटायर शिक्षकों की सेवाएं लेने के आदेश भी आ गए हैं।
- डॉ.धर्मेंद्र शर्मा, डीआईओएस