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120 करोड़ रुपये के गड़बड़झाले में एएमयू इंतजामिया ने दी सफाई..

Sun, 10 Jul 2016 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 10 Jul 2016 01:41 AM IST
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120 crore in the AMU Intjamia said cleaning mess ..
एएमयू
एएमयू में नियमों को ताक पर रख कर 120 करोड़ से अधिक खर्च करने के मामले में अब विवि इंतजामिया अपनी सफाई देने लगा है। गौर हो कि ‘अमर उजाला’ ने ही इस मामले को 7 जुलाई के अंक में प्रमुखता से उठाया था।
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अब इस मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी जवाब तलब किया है। जिससे विवि इंतजामिया चौतरफा घिरने के बाद सफाई देने लगा है। एएमयू के ऑडिट रिपोर्ट के संदर्भ में विश्वविद्यालय प्रशासन ने वित्तीय अनियमितताओं से पल्ला झाड़ते हुए अपना पक्ष रखा है।
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विवि के जनसंपर्क कार्यालय के मेंबर इंचार्ज डॉ. राहत अबरार ने कहा है कि सीएजी ने इस संबंध में कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की है बल्कि उत्तर प्रदेश के कार्यालय प्रधान निदेशक लेखा परीक्षा (केंद्रीय) लखनऊ शाखा कार्यालय इलाहाबाद ने 2014-15 के अपने वार्षिक अवलोकन में विश्वविद्यालय प्रशासन का कुछ बिंदुओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है जो एक सामान्य प्रक्रिया है।
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साथ ही विवि के वित्त अधिकारी प्रो. एसएम जावेद ने कहा है कि 1500 छात्राओं के लिये निर्माणाधीन गर्ल्स हॉस्टल के संदर्भ में 75 करोड़ का आवंटन कोआर्डिनेशन कमेटी और बिल्डिंग कमेटी की अनुशंसा पर किया गया है। जिसको विवि की फाइनेंस कमेटी ने अपनी मंजूरी दी है।
इसमें यूजीसी की किसी निर्देशिका की अवहेलना नहीं की गयी है। इसी प्रकार कैंपस डेवलपमेंट के लिये 10.62 करोड़ रुपये की राशि का प्रयोग यूजीसी की अनुमति द्वारा 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत किया गया था। जिसके लिए विवि को यूजीसी की अंडर सेक्रेटरी सुषमा राठौर का पत्र भी प्राप्त हुआ है। इसी प्रकार अन्य मदों में किए गए खर्च के विवरण भी स्पष्ट किए गए हैं।

विवि ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूरस्थ शिक्षा के अंतर्गत विवि पीएचडी डिग्री प्रदान नहीं करती बल्कि उद्योग और शिक्षा जगत के बीच के पुल को पाटने तथा शोध को बढ़ावा देने के लिये यह अनूठा कार्यक्रम 1997 में ऑल इडिंया मैनेजमेंट एसोसिएशन के सहयोग से यूजीसी पीएचडी रेगूलेशन के अंतर्गत प्रारंभ किया गया जो एक उच्च कोटि का प्रोग्राम है।
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