{"_id":"5b21855a4f1c1bfa6e8b7cab","slug":"111528923482-aligarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हत्या और फर्जीवाड़े में जमानत अर्जियां खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हत्या और फर्जीवाड़े में जमानत अर्जियां खारिज
Updated Thu, 14 Jun 2018 02:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीके सिंह के न्यायालय से हत्या व फर्जीवाड़े आदि के मुकदमे में जमानत अर्जियां खारिज की गई हैं।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी डॉ. अबसार किदवई के अनुसार पिछले दिनों गांधीपार्क पुलिस द्वारा मामू भांजा से पकड़े गए मोबाइल शॉप संचालक भाइयों की जमानत खारिज की गई है।
पकड़े गए सतनाम सिंह व मनमोहन सिंह उर्फ शिब्बू निवासी नईबस्ती पर दुकान में चोरी व लूट के मोबाइल की आईएमईआई बदलने का धंधा चलाने का आरोप है।
इसी तरह धर्मपाल, खूबीराम, भूरा, लक्ष्मण व पुष्पेंद्र निवासी सालारपुर पालीमुकीमपुर पर 2 मार्च 2018 को हमले में जेल भेजा गया था।
उनकी जमानत भी खारिज कर दी गई है। इसी तरह पप्पू खां, नफीस, शाहिद, मुन्ना निवासी कौड़ियागंज अकराबाद को 7 मार्च 2018 को पैगाम की हत्या में जेल भेजा गया था।
उनकी जमानत भी खारिज की गई है। इसी तरह पूरन निवासी खैर की जमानत भी 22 मई 2018 को हुई यामीन की हत्या में जमानत नहीं मिली है।
विज्ञापन
जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीके सिंह के न्यायालय से हत्या व फर्जीवाड़े आदि के मुकदमे में जमानत अर्जियां खारिज की गई हैं।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता डीजीसी डॉ. अबसार किदवई के अनुसार पिछले दिनों गांधीपार्क पुलिस द्वारा मामू भांजा से पकड़े गए मोबाइल शॉप संचालक भाइयों की जमानत खारिज की गई है।
पकड़े गए सतनाम सिंह व मनमोहन सिंह उर्फ शिब्बू निवासी नईबस्ती पर दुकान में चोरी व लूट के मोबाइल की आईएमईआई बदलने का धंधा चलाने का आरोप है।
इसी तरह धर्मपाल, खूबीराम, भूरा, लक्ष्मण व पुष्पेंद्र निवासी सालारपुर पालीमुकीमपुर पर 2 मार्च 2018 को हमले में जेल भेजा गया था।
उनकी जमानत भी खारिज कर दी गई है। इसी तरह पप्पू खां, नफीस, शाहिद, मुन्ना निवासी कौड़ियागंज अकराबाद को 7 मार्च 2018 को पैगाम की हत्या में जेल भेजा गया था।
विज्ञापन
उनकी जमानत भी खारिज की गई है। इसी तरह पूरन निवासी खैर की जमानत भी 22 मई 2018 को हुई यामीन की हत्या में जमानत नहीं मिली है।