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सोमवार को मनाया जाएगा बासौड़ा, होगी शीतला माता की पूजा
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सोमवार को बासौड़ा मनाया जाएगा। इस दिन शीतला माता की पूजा होगी। वहीं जो लोग शीतला सप्तमी मनाते हैं वह 27 मार्च बुधवार को पूजा करेंगे। शीतला अष्टमी मनाने वाले श्रद्धालु गुरुवार को पूजा करेंगे।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि 25 मार्च सोमवार को शीतला माता की पूजन किया जाएगा। इसे बासौड़ा भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि बासौड़े का त्योहार होली के सात-आठ दिन बाद या होली के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार या गुरुवार को मनाया जाता है। इस दिन बासी भोजन जरूर खाया जाता है। इसमें पथवारी माता (योगिनी देवी) की पूजा होती है।
इसलिए बासौड़े से एक दिन पहले घर की महिलाएं संध्या के समय से ही पकवान बनाकर रख लेती हैं। फिर सुबह तड़के उठकर घर की मुखिया स्त्री या फिर माता एक थाली में सभी बनाए हुए पकवान, रबड़ी, रोटी, चावल, मूंग की छिलके वाली दाल, हल्दी, धूपबत्ती, एक गुलरी की माला (जो होली के दिन बचा कर रखते हैं) थाली में यथायोग्य दक्षिणा रखकर घर के सभी बच्चों, पुरुष, स्त्रियों के साथ देवी ऊपर से पांच या सात वार उतारा उतारकर यह कहकर पूजा करती हैं कि हे शीतला माता आप की पूर्ण कृपा से पूरे वर्ष भर मेरे घर में सभी प्रकार के रोग दोषों का नाश करना और मेरे परिवार में हर प्रकार की खुशहाली, उन्नति के कार्य हों।
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उतारा करने के बाद घर के बाहर भैरों बाबा की सवारी कुत्ते को खिलाना अति आवश्यक होता है। क्योंकि कुत्ता भैरव बाबा का सूचक है। भैरव बाबा भगवान शिव के कोतवाल है। अत: घर परिवार की सुरक्षा के लिए कुत्ते को सामान खिलाया जाता है। जबकि शीतला सप्तमी वाले लोग बुधवार 27 मार्च तो शीतला अष्टमी मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए 28 मार्च गुरुवार को पूजा-पाठ करना मान्य रहेगा।
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सोमवार को बासौड़ा मनाया जाएगा। इस दिन शीतला माता की पूजा होगी। वहीं जो लोग शीतला सप्तमी मनाते हैं वह 27 मार्च बुधवार को पूजा करेंगे। शीतला अष्टमी मनाने वाले श्रद्धालु गुरुवार को पूजा करेंगे।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि 25 मार्च सोमवार को शीतला माता की पूजन किया जाएगा। इसे बासौड़ा भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि बासौड़े का त्योहार होली के सात-आठ दिन बाद या होली के बाद पड़ने वाले पहले सोमवार या गुरुवार को मनाया जाता है। इस दिन बासी भोजन जरूर खाया जाता है। इसमें पथवारी माता (योगिनी देवी) की पूजा होती है।
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इसलिए बासौड़े से एक दिन पहले घर की महिलाएं संध्या के समय से ही पकवान बनाकर रख लेती हैं। फिर सुबह तड़के उठकर घर की मुखिया स्त्री या फिर माता एक थाली में सभी बनाए हुए पकवान, रबड़ी, रोटी, चावल, मूंग की छिलके वाली दाल, हल्दी, धूपबत्ती, एक गुलरी की माला (जो होली के दिन बचा कर रखते हैं) थाली में यथायोग्य दक्षिणा रखकर घर के सभी बच्चों, पुरुष, स्त्रियों के साथ देवी ऊपर से पांच या सात वार उतारा उतारकर यह कहकर पूजा करती हैं कि हे शीतला माता आप की पूर्ण कृपा से पूरे वर्ष भर मेरे घर में सभी प्रकार के रोग दोषों का नाश करना और मेरे परिवार में हर प्रकार की खुशहाली, उन्नति के कार्य हों।
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उतारा करने के बाद घर के बाहर भैरों बाबा की सवारी कुत्ते को खिलाना अति आवश्यक होता है। क्योंकि कुत्ता भैरव बाबा का सूचक है। भैरव बाबा भगवान शिव के कोतवाल है। अत: घर परिवार की सुरक्षा के लिए कुत्ते को सामान खिलाया जाता है। जबकि शीतला सप्तमी वाले लोग बुधवार 27 मार्च तो शीतला अष्टमी मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए 28 मार्च गुरुवार को पूजा-पाठ करना मान्य रहेगा।