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नसीमुद्दीन पर कार्रवाई से बच रही अखिलेश सरकार
लखनऊ/मनीष श्रीवास्तव
Updated Wed, 22 May 2013 01:04 AM IST
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बसपा सरकार में कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर कार्रवाई को लेकर अखिलेश सरकार का एक और इम्तिहान शुरू हो गया है।
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लोकायुक्त की पिछली रिपोर्ट पर सरकार के रवैये को आधार बनाते हुए विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना शुरू कर दी है।
भाजपा के प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि इसकी दो प्रमुख वजहें हैं।
पहली यह कि सरकार मुस्लिम वोट बैंक को नाराज न करने को लेकर सरकार नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर कार्रवाई से बच रही है।
सरकार लगातार यह आकलन कर रही है कि कार्रवाई पर बयान देने से मुस्लिमों की प्रतिक्रिया क्या होगी? वहीं दूसरी वजह यह है कि बसपा और सपा दोनों एक दूसरे के भ्रष्टाचार को छिपाते आए हैं।
उसी कड़ी में इन कद्दावर मंत्री को बचाया जा रहा है। वरना ऐसे कौन से कारण हैं कि बसपा के भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार बनाने वाले खुद ही उस पर कार्रवाई नहीं कर रहे।
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नसीमुद्दीन की आक्रामकता से डरी सरकार
विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष सदन में लगातार सरकार केखिलाफ आक्रामक रहते हैं। संख्या बल के आधार पर विधानपरिषद में बसपा लगातार सरकार पर हावी रहती आयी है।
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सदन के बाहर भी वह सरकार को हर मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करने से नहीं चूकते। लोकायुक्त की जांच पर हुए सवाल पर भी नसीमुद्दीन ने लोकायुक्त की वैधता पर ही सवाल उठा दिए।
नसीमुद्दीन ने कहा- ‘ लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर ही सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है, फैसला आने तक लोकायुक्त की कोई जांच या रिपोर्ट वैध नहीं है।’ भाजपा प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि सरकार ऐसे भयभीत रहती है जैसे पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन के पास सरकार के खिलाफ कुछ दस्तावेज हों।
वहीं कांग्रेस के प्रवक्ता द्विजेन्द्र त्रिपाठी कहते हैं कि समाजवादी पार्टी की सरकार पिछले कार्यकाल में खुद खाद्यान्न घोटाले के आरोपों से घिरी हुई है, ऐसे में उससे किसी निष्पक्ष कार्रवाई या जांच की उम्मीद करना ही बेकार है।
सरकार केवल बहाने बना रही है। बसपा और सपा आपस में मिले हुए हैं। सपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाते हुए आयोग बनाकर पांच साल के बसपा राज के दौरान हुए भ्रष्टाचार के जांच की बात कही थी। लेकिन पूरे होते वादे का ढिंढोरा पीटने वाली इस सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई काम नहीं किया।