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योगी जी ऐसे तो 20 साल में आ पाएगा चंबल का पानी
ब्यूरो/ अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 09 May 2017 11:23 AM IST
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चंबल
- फोटो : अमर उजाला
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शहर की पेयजल समस्या के निदान के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने चंबल नदी को विकल्प के रूप में चुना है लेकिन सवाल यह उठता है कि गंगाजल लाने में सरकारों को 12 वर्ष लग गए और अभी तक पानी नहीं आया है तो इससे भी दुष्कर योजना में तो कम से कम 20 वर्ष लग जाएंगे।
2005-06 में आगरा और भरतपुर की प्यास बुझाने के लिए चंबल से पानी लाने की योजना बनाई गई थी। उस वक्त इस योजना पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च बताया गया था लेकिन अधिकारियों ने इस योजना को खारिज कर दिया था। जल निगम के तत्कालीन अधिकारी सुशील कुमार आदि ने कहा था कि चंबल बहुत नीची है और आगरा काफी ऊंचाई पर है।
इसके लिए पानी आगरा तक लाने के लिए कम से कम तीन स्थानों पर लिफ्ट करना होगा। इसके पंपिंग स्टेशन बनाने होंगे और पंप स्टेशनों को चलाने के लिए विद्युत सब स्टेशनों का निर्माण करना होगा। हालांकि भरतपुर में चंबल नदी से पानी पहुंचाने का प्रोजेक्ट कामयाब रहा है। जानकारों की मानें तो गंगाजल लाने में सरकार को करीब 13 वर्ष लग गए हैं चंबल का पानी लाना भी आसान नहीं है।
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आगरा से करीब 80 किलोमीटर तक पाइप लाइन डालनी होगी। पानी को लिफ्ट करने के लिए फिर वही विकल्प है कि कम से कम तीन पंपिंग स्टेशन बनाने होंगे और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मार्च, अप्रैल, मई और जून में शहर में पानी कि सबसे अधिक मारामारी होती है उन दिनों में चंबल का जल स्तर काम हो जाता है। इस वजह से चंबल डाल परियोजना भी ठीक से संचालित नहीं हो पा रही है। इन हालातों में चंबल से पानी लाने में गंगाजल से भी अधिक समय लग जाएगा।
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2005-06 में आगरा और भरतपुर की प्यास बुझाने के लिए चंबल से पानी लाने की योजना बनाई गई थी। उस वक्त इस योजना पर करीब 400 करोड़ रुपये खर्च बताया गया था लेकिन अधिकारियों ने इस योजना को खारिज कर दिया था। जल निगम के तत्कालीन अधिकारी सुशील कुमार आदि ने कहा था कि चंबल बहुत नीची है और आगरा काफी ऊंचाई पर है।
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इसके लिए पानी आगरा तक लाने के लिए कम से कम तीन स्थानों पर लिफ्ट करना होगा। इसके पंपिंग स्टेशन बनाने होंगे और पंप स्टेशनों को चलाने के लिए विद्युत सब स्टेशनों का निर्माण करना होगा। हालांकि भरतपुर में चंबल नदी से पानी पहुंचाने का प्रोजेक्ट कामयाब रहा है। जानकारों की मानें तो गंगाजल लाने में सरकार को करीब 13 वर्ष लग गए हैं चंबल का पानी लाना भी आसान नहीं है।
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आगरा से करीब 80 किलोमीटर तक पाइप लाइन डालनी होगी। पानी को लिफ्ट करने के लिए फिर वही विकल्प है कि कम से कम तीन पंपिंग स्टेशन बनाने होंगे और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मार्च, अप्रैल, मई और जून में शहर में पानी कि सबसे अधिक मारामारी होती है उन दिनों में चंबल का जल स्तर काम हो जाता है। इस वजह से चंबल डाल परियोजना भी ठीक से संचालित नहीं हो पा रही है। इन हालातों में चंबल से पानी लाने में गंगाजल से भी अधिक समय लग जाएगा।
गंगाजल प्रोजेक्ट की स्थिति
गंगा
- फोटो : file photo
2005-06 बना था गंगाजल प्रोजेक्ट
2011 तक आना था शहर में गंगा का पानी
350 करोड़ रुपये थी अनुमानित लागत
2012 तक बढ़ गई प्रोजेक्ट की समय सीमा
2014 तक फिर बढ़ाया गया प्रोजेक्ट का समय
2016 तक पानी देने का किया गया था दावा
2017 मार्च तक पानी देने के लिए फिर कहा
2018 तक अब समय दिया जा रहा है समय
2887 करोड़ रुपये तक पहुंच गई प्रोजेक्ट की लागत
2011 तक आना था शहर में गंगा का पानी
350 करोड़ रुपये थी अनुमानित लागत
2012 तक बढ़ गई प्रोजेक्ट की समय सीमा
2014 तक फिर बढ़ाया गया प्रोजेक्ट का समय
2016 तक पानी देने का किया गया था दावा
2017 मार्च तक पानी देने के लिए फिर कहा
2018 तक अब समय दिया जा रहा है समय
2887 करोड़ रुपये तक पहुंच गई प्रोजेक्ट की लागत