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पीला पड़ा ताजमहल, सच सरकार बोल रही या एक्सपर्ट
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Thu, 14 May 2015 02:16 AM IST
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‘ताजमहल प्रदूषण से पीला नहीं पड़ रहा है’। केंद्रीय संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने राज्य सभा में बुधवार को यह कहते हुए ताज से जुड़ी चिंताओं को दूर किया, लेकिन वह जिस विभाग के मंत्री हैं, उसी एएसआई ने आईआईटी कानपुर और अमेरिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ शोध कर रिपोर्ट दी कि ताज बायोमास और डीजल वाहनों के धुएं के कारण पीला पड़ रहा है। यही नहीं, राज्यसभा सांसद अश्वनी कुमार की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने भी ताजमहल के पीला पड़ने पर जल्द एक्शन प्लान बनाने की संस्तुति की है।
ताजमहल के पीला पड़ने के मामले में राज्यसभा की कमेटी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री के बयान विरोधाभासी हैं। सांसद अश्वनी कुमार की अध्यक्षता वाली कमेटी ताज को पीलेपन का शिकार मानते हुए लांग टर्म एक्शन प्लान की संस्तुति कर चुकी है। कमेटी ने ताज ट्रिपेजियम अथारिटी, पर्यावरण मंत्रालय, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एएसआई के प्रयासों को फेल करार दिया है। जबकि संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने बुधवार को राज्यसभा में इस बात से भी इंकार किया कि इंटरनेशनल एक्सपर्ट की सेवाएं भी ताज के लिए नहीं ली गई हैं।
दिसंबर में आई थी रिपोर्ट
एएसआई, आईआईटी कानपुर, अमेरिकी विश्वविद्यालय की संयुक्त जांच में ताजमहल पर कार्बन और धूल के कण पाए गए। दिसंबर में जारी रिपोर्ट में कहा गया कि बायोमास और डीजल वाहनों से उत्सर्जित कार्बन के कण ताजमहल की सतह पर बैठ रहे हैं। इसके बाद सरकार हरकत में आई और पर्यावरण मामलों की संसदीय समिति ने आगरा के कमिश्नर को तलब कर दो महीने का वक्त सुधार के लिए दिया। अप्रैल में संसदीय कमेटी ने ताजमहल का दौरा कर हकीकत देखी और ताज के पीले पड़ने की बात मीडिया ब्रीफिंग में कही।
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वर्जन
ताजमहल पीला नहीं पड़ा है। ताज के पास प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासन कदम उठा रहा है। पत्थर की सतह पर प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए संरक्षण और पर्यावरण विकास के काम हो रहे हैं। स्मारक अच्छी स्थिति में है।
डा. महेश शर्मा
केंद्रीय संस्कृति मंत्री
यूएस, आईआईटी रिपोर्ट के मुताबिक ताजमहल पीला पड़ रहा है। श्मशान घाट पर बायोमास जलने, डीजल वाहनों से निकले कार्बन कणों के कारण पीले पड़े ताज पर मडपैक चल रहा है, लेकिन कार्बन, धूल कणों के लगातार जमा होने से पीलापन दिखता है।
- भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद, आगरा
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ताजमहल के पीला पड़ने के मामले में राज्यसभा की कमेटी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री के बयान विरोधाभासी हैं। सांसद अश्वनी कुमार की अध्यक्षता वाली कमेटी ताज को पीलेपन का शिकार मानते हुए लांग टर्म एक्शन प्लान की संस्तुति कर चुकी है। कमेटी ने ताज ट्रिपेजियम अथारिटी, पर्यावरण मंत्रालय, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एएसआई के प्रयासों को फेल करार दिया है। जबकि संस्कृति मंत्री डा. महेश शर्मा ने बुधवार को राज्यसभा में इस बात से भी इंकार किया कि इंटरनेशनल एक्सपर्ट की सेवाएं भी ताज के लिए नहीं ली गई हैं।
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दिसंबर में आई थी रिपोर्ट
एएसआई, आईआईटी कानपुर, अमेरिकी विश्वविद्यालय की संयुक्त जांच में ताजमहल पर कार्बन और धूल के कण पाए गए। दिसंबर में जारी रिपोर्ट में कहा गया कि बायोमास और डीजल वाहनों से उत्सर्जित कार्बन के कण ताजमहल की सतह पर बैठ रहे हैं। इसके बाद सरकार हरकत में आई और पर्यावरण मामलों की संसदीय समिति ने आगरा के कमिश्नर को तलब कर दो महीने का वक्त सुधार के लिए दिया। अप्रैल में संसदीय कमेटी ने ताजमहल का दौरा कर हकीकत देखी और ताज के पीले पड़ने की बात मीडिया ब्रीफिंग में कही।
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ताजमहल पीला नहीं पड़ा है। ताज के पास प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासन कदम उठा रहा है। पत्थर की सतह पर प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए संरक्षण और पर्यावरण विकास के काम हो रहे हैं। स्मारक अच्छी स्थिति में है।
डा. महेश शर्मा
केंद्रीय संस्कृति मंत्री
यूएस, आईआईटी रिपोर्ट के मुताबिक ताजमहल पीला पड़ रहा है। श्मशान घाट पर बायोमास जलने, डीजल वाहनों से निकले कार्बन कणों के कारण पीले पड़े ताज पर मडपैक चल रहा है, लेकिन कार्बन, धूल कणों के लगातार जमा होने से पीलापन दिखता है।
- भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद, आगरा